
संवाद 24 डेस्क। देश के अलग-अलग हिस्सों में मानसून का विकराल और प्रलयकारी रूप देखने को मिल रहा है। पूर्वोत्तर राज्य असम से लेकर दक्षिण भारत के केरल तक, नदियां उफान पर हैं और बस्तियां जलमग्न हो चुकी हैं। हर तरफ पानी का सितम ऐसा है कि लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। कुदरत के इस कहर के आगे मानवीय व्यवस्थाएं बौनी साबित हो रही हैं। असम में जहां बाढ़ की भीषण विभीषिका ने लाखों लोगों को बेघर कर दिया है, वहीं केरल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है।
असम में उफान पर नदियां, मौतों का आंकड़ा पहुंचा 87
असम में कुदरत का प्रकोप थमने का नाम नहीं ले रहा है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में दो और लोगों ने अपनी जान गंवा दी है। ये दोनों मौतें शिवसागर जिले से दर्ज की गई हैं। इसके साथ ही राज्य में बाढ़ के कारण अपनी जान गंवाने वाले लोगों की कुल संख्या बढ़कर 87 तक पहुंच चुकी है। वर्तमान में राज्य के 7 प्रमुख जिलों में 1.28 लाख से अधिक लोग बाढ़ की चपेट में हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए असम सरकार ने राहत कार्यों में तेजी ला दी है। बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित लगभग 75 हजार परिवारों की मदद के लिए सरकार ने 160 करोड़ रुपये की पहली अंतरिम राहत किस्त जारी कर दी है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने डिब्रूगढ़ से इस राहत राशि को डिजिटल रूप से स्थानांतरित किया। सिवासागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों में जिन लोगों के घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें तत्काल पुनर्वास के लिए 15-15 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। इसके अतिरिक्त, प्रभावित पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत सब्सिडी का लाभ देने की भी घोषणा की गई है।
केरल में बारिश और भूस्खलन का हाहाकार, 15 लोगों की मौत
दूसरी ओर, दक्षिण भारत के खूबसूरत राज्य केरल में मानसूनी बारिश अब तबाही का पर्याय बन चुकी है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन की भयावह घटनाएं सामने आई हैं। राज्य में अब तक बारिश और भूस्खलन से जुड़ी हादसों में 15 लोगों की दुखद मृत्यु हो चुकी है, जबकि 7 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए राहत एवं बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। केरल सरकार ने स्थिति से निपटने के लिए आपातकालीन कदम उठाए हैं। प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए अंतिम संस्कार हेतु 10,000 रुपये की तात्कालिक वित्तीय मदद देने का ऐलान किया है।
किसानों पर दोहरी मार, कई जिलों में स्कूल-कॉलेज बंद
केरल में इस प्राकृतिक आपदा ने कृषि क्षेत्र को भारी चोट पहुंचाई है। अब तक प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 165 हेक्टेयर कृषि भूमि पूरी तरह जलमग्न हो चुकी है, जिससे 3,596 से अधिक किसान सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाने से किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। इसे देखते हुए राज्य सरकार ने आगामी कैबिनेट बैठक में प्रभावित किसानों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाने का निर्णय लिया है। आपदा की स्थिति को देखते हुए राज्य के पथनामथिट्टा, कोट्टायम सहित संवेदनशील इलाकों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और भारतीय सुरक्षा बलों की टीमों को तैनात कर दिया गया है।
10 जिलों में ऑरेंज अलर्ट, अलर्ट मोड पर प्रशासन
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने केरल में बिगड़ते हालात को देखते हुए राज्य के 10 जिलों में ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है, जबकि 4 अन्य जिलों के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी किया गया है। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद राज्य के 12 जिलों में जिला कलेक्टरों ने सुरक्षा के मद्देनजर सभी शैक्षणिक संस्थानों (स्कूलों और कॉलेजों) में छुट्टी घोषित कर दी है। देश के ये दोनों छोर वर्तमान में जल-प्रलय की दोहरी चुनौती से जूझ रहे हैं। एक तरफ जहां असम में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहकर तबाही फैला रही हैं, वहीं केरल में पहाड़ों का खिसकना और अचानक आई बाढ़ जनजीवन को निगल रही है। राहत एजेंसियां दिन-रात मुस्तैदी से काम कर रही हैं, लेकिन कुदरत के इस मिजाज ने पूरे देश को चिंता में डाल दिया है।






