
संवाद 24 जम्मू-कश्मीर। शांत होते माहौल और तरक्की की ओर बढ़ते कदमों के बीच एक बार फिर सीमा पार से नापाक साजिश की गूंज सुनाई दी है। दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले में देर शाम पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों ने कायराना हरकत को अंजाम देते हुए निहत्थे और बेकसूर प्रवासी मजदूरों को अपना निशाना बनाया। इस अचानक हुई अंधाधुंध गोलीबारी में छत्तीसगढ़ के रहने वाले एक मजदूर की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनका एक साथी गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका अस्पताल में इलाज चल रहा है। लेकिन सवाल यह उठता है कि लंबे समय के शांत माहौल के बाद अचानक यह हमला क्यों किया गया? रक्षा और सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों ने जब इस घटना की परतों को उधेड़ा, तो इसके पीछे पाकिस्तान की एक बेहद गहरी, खौफनाक और रणनीतिक बौखलाहट सामने आई। विशेषज्ञों का दावा है कि इस हमले का असल मकसद घाटी में सिर्फ दहशत फैलाना नहीं, बल्कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके (PoK) में भड़की भयंकर जन-बगावत से पूरी दुनिया का ध्यान भटकाना है।
पीओके में आजादी की गूंज और सुलगता जनाक्रोश
दरअसल, इस समय पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हालात पाकिस्तान सरकार और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के नियंत्रण से पूरी तरह बाहर हो चुके हैं। मुजफ्फराबाद, रवालाकोट, गिलगित-बाल्टिस्तान और मीरपुर जैसे प्रमुख इलाकों में हजारों की संख्या में स्थानीय नागरिक सड़कों पर उतरे हुए हैं। आसमान छूती महंगाई, भारी-भरकम बिजली बिलों, बुनियादी सुविधाओं के अभाव और पाकिस्तानी सेना के दमनकारी रवैये के खिलाफ वहां की जनता ने खुला मोर्चा खोल दिया है। पीओके की गलियों में आज पाकिस्तान विरोधी और आजादी के जोरदार नारे गूंज रहे हैं। पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना इस अभूतपूर्व जन-आंदोलन से बुरी तरह घबराई हुई है। उन्हें डर है कि अगर पीओके का यह विद्रोह अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में बना रहा, तो दुनिया के सामने पाकिस्तान का दोहरा चेहरा और मानवाधिकारों का हनन पूरी तरह बेनकाब हो जाएगा। इसी वैश्विक फजीहत और घरेलू नाकामी पर पर्दा डालने के लिए आईएसआई ने अपने पुराने ‘कश्मीर कार्ड’ का इस्तेमाल करते हुए आतंकियों को कश्मीर में खूनखराबा करने का फरमान जारी कर दिया।
निर्दोषों को निशाना बनाने की मजबूरी और टीआरएफ की साजिश
शुरुआती सुरक्षा जांच और खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, कुलगाम में इस कायराना हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के छद्म संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का हाथ माना जा रहा है। आतंकियों ने दिन ढलने के बाद अंधेरे का फायदा उठाकर प्रवासी मजदूरों पर गोलियां बरसाईं और मौके से फरार हो गए। जम्मू-कश्मीर के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) एस.पी. वैद सहित कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान कभी भी कश्मीर में बहाल होती शांति और सामान्य स्थिति को बर्दाश्त नहीं कर सकता। पूर्व डीजीपी ने स्पष्ट किया कि जब भी पीओके या पाकिस्तान के भीतर कोई बड़ा आंतरिक संकट पैदा होता है, तो वहां के हुक्मरान भारत की सीमा में आतंकी वारदातों को अंजाम देकर अपनी जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश करते हैं। कुलगाम की घटना इसी बौखलाहट का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
कश्मीर में लौटती रंगत से क्यों सहमा है पाकिस्तान?
अनुच्छेद 370 हटने के बाद से कश्मीर घाटी में हालात तेजी से बदले हैं। इस साल कश्मीर में शांति और विकास का एक नया दौर देखने को मिला है। रिकॉर्ड तोड़ संख्या में देश-विदेश से पहुंचे पर्यटकों ने घाटी के पर्यटन उद्योग को नई उड़ान दी है। हाल ही में संपन्न हुई अमरनाथ यात्रा में भी श्रद्धालुओं का रिकॉर्ड सैलाब उमड़ा, जो पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल रहा है, बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है और प्रवासी मजदूर बिना किसी भय के घाटी के निर्माण कार्यों में अपना योगदान दे रहे थे। दक्षिण कश्मीर में पिछले चार वर्षों के दौरान प्रवासी मजदूरों पर यह पहला बड़ा हमला है। घाटी की यह तरक्की और खुशहाली पाकिस्तान और उसके पालतू आतंकी आकाओं की आंखों में खटक रही है। वे किसी भी कीमत पर कश्मीर को वापस भय, बंद और हिंसा के काले दौर में धकेलना चाहते हैं।
सुरक्षा बल मुस्तैद, घाटी में सघन तलाशी अभियान जारी
इस कायराना हमले के तुरंत बाद भारतीय सुरक्षा बलों और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पूरे इलाके को सील कर दिया है। हमले में शामिल आतंकियों को पकड़ने या उनका काम तमाम करने के लिए दक्षिण कश्मीर के चप्पे-चप्पे पर व्यापक घेराबंदी और तलाशी अभियान (CASO) चलाया जा रहा है। प्रवासी मजदूरों के रहने वाले इलाकों, निर्माण स्थलों और यात्रा मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था को पहले से कई गुना कड़ा कर दिया गया है। अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती के साथ-साथ हाई-टेक निगरानी उपकरणों की मदद ली जा रही है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों का साफ संदेश है कि सीमा पार से चलाए जा रहे इस नापाक अजेंडे को किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने दिया जाएगा और बेकसूर की शहादत का कड़ा जवाब दिया जाएगा।






