
कटावरोधी कार्यों पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने प्रशासन से की तत्काल हस्तक्षेप की मांग
संवाद 24 फर्रुखाबाद। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही फर्रुखाबाद के तटीय क्षेत्रों में कटान की रफ्तार तेज हो गई है। विकासखंड बढ़पुर के अंतर्गत पंखियों की मढ़ैया, दिलीप की मढ़ैया और कटरी भीमपुर सहित गंगा किनारे बसे कई गांवों में नदी की तेज धारा लगातार भूमि का कटाव कर रही है। हालात ऐसे हैं कि कटान रोकने के लिए लगाए गए पार्कोपाइन, जियो बैग और स्टड भी पानी के तेज बहाव के आगे टिक नहीं पा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में अपने घरों और कृषि भूमि की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तेज बहाव के आगे नहीं टिक पाए कटावरोधी इंतजाम
तटीय गांवों को गंगा के कटाव से बचाने के लिए सिंचाई विभाग द्वारा विभिन्न स्थानों पर पार्कोपाइन, जियो बैग और अन्य कटावरोधी संरचनाएं लगाई गई थीं। इनका उद्देश्य नदी की तेज धारा का दबाव कम कर तटों की सुरक्षा करना था। लेकिन जलस्तर बढ़ने के बाद कई स्थानों पर ये संरचनाएं स्वयं ही बहने लगीं, जिससे कटाव की स्थिति और गंभीर होती दिखाई दे रही है।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता, घरों तक पहुंचा कटान का खतरा
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नदी लगातार खेतों और आबादी की ओर बढ़ रही है। कई मकानों के आसपास की भूमि पहले ही कटकर गंगा में समा चुकी है। यदि आने वाले दिनों में जलस्तर और बढ़ता है, तो कई अन्य घर भी खतरे की जद में आ सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि समय रहते प्रभावी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो बाढ़ के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
कटावरोधी कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
ग्रामीण महिलाओं धन देवी और संतोषी ने बताया कि कटाव रोकने के लिए लगाए गए पार्कोपाइन से उन्हें काफी उम्मीद थी, लेकिन तेज बहाव के सामने ये भी टिक नहीं सके। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कटावरोधी कार्यों में निर्धारित मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उनका दावा है कि जहां जियो बैग लगाए जाने थे, वहां कई स्थानों पर सीमेंट की खाली बोरियों में मिट्टी भरकर उपयोग किया गया और ऊपर से सीमित संख्या में जियो बैग लगाकर कार्य पूरा होने का दावा कर दिया गया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित विभाग की ओर से भी इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
निरीक्षण और स्थायी समाधान की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों से तत्काल प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कराने, क्षतिग्रस्त कटावरोधी कार्यों की जांच करने तथा प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अभी से मजबूत इंतजाम नहीं किए गए, तो कटान के कारण कई परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो सकता है।
बाढ़ के मौसम में बढ़ी प्रशासन की चुनौती
मानसून के दौरान गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ तटीय क्षेत्रों में कटान हर वर्ष बड़ी चुनौती बनकर सामने आता है। ऐसे में प्रशासन के लिए जलस्तर की लगातार निगरानी, संवेदनशील गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना और कटावरोधी कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक माना जा रहा है। स्थानीय लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि संबंधित विभाग समय रहते प्रभावी कार्रवाई करेगा, ताकि गांवों, कृषि भूमि और लोगों की आजीविका को संभावित नुकसान से बचाया जा सके।






