
विशेष संपादकीय रिपोर्ट: संवाद 24 फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश के तटीय मैदानी इलाकों में मानसूनी उफान और नदियों के जलस्तर में हुई अप्रत्याशित वृद्धि ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। गंगा और रामगंगा के दोहरे दबाव से जूझ रहे फर्रुखाबाद जनपद के सैकड़ों गांवों में बाढ़ और भीषण कटान की विभीषिका ने हजारों परिवारों की जिंदगी को संकट में डाल दिया है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ गुरुवार को स्वयं जमीनी मोर्चे पर पहुंचे।
फतेहगढ़ पुलिस लाइन में आयोजित विशाल राहत वितरण शिविर में उपस्थित जनसमूह और बेघर हुए ग्रामीणों के बीच मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि राज्य सरकार प्राकृतिक आपदा की इस घड़ी में मूकदर्शक नहीं, बल्कि एक सजग और संवेदनशील अभिभावक के रूप में प्रत्येक नागरिक के साथ खड़ी है। हवाई सर्वेक्षण से लेकर फतेहगढ़ पुलिस लाइन में मंच से सीधे बाढ़ पीड़ितों के हाथों में 1,000 विशेष राहत किट, आवासीय भूमि के पट्टा आवंटन पत्र और आपदा राहत चेक सौंपने तक, मुख्यमंत्री का यह दौरा तात्कालिक मदद से आगे बढ़कर स्थायी पुनर्वास की दिशा में उठाया गया कदम साबित हुआ।
जलमग्न कटरी का किया हवाई सर्वेक्षण
गुरुवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लखनऊ से विशेष हेलीकॉप्टर द्वारा फर्रुखाबाद के लिए रवाना हुए। जनपद की सीमा में प्रवेश करते ही मुख्यमंत्री ने सीधे उतरने के बजाय गंगा और रामगंगा के कछार में बसे अति-संवेदनशील और जलमग्न गांवों का हवाई सर्वेक्षण किया। हवाई निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने देखा कि किस प्रकार नरौरा बैराज और अन्य जलस्रोतों से पानी छोड़े जाने के कारण शमसाबाद, अमृतपुर, कायमगंज और राजेपुर विकासखंडों के दर्जनों तटीय गांव पानी से घिर चुके हैं। कई मजरों का संपर्क मुख्य मार्गों से कट गया है और खेतों में खड़ी खरीफ फसलें जलमग्न हो चुकी हैं।
हवाई निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को मैप और जीपीएस लोकेशन के आधार पर उन गांवों को तुरंत चिह्नित करने के निर्देश दिए जो नदी के मुख्य बहाव क्षेत्र में टापू जैसे बन गए हैं, ताकि वहां नावों और रेस्क्यू टीमों की त्वरित तैनाती सुनिश्चित की जा सके। सर्वेक्षण पूरा करने के बाद सुबह ठीक 11:30 बजे मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर फतेहगढ़ स्थित पुलिस लाइन परेड ग्राउंड के अस्थायी हेलीपैड पर सुरक्षित उतरा। वहां मौजूद जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी अगवानी की। बिना किसी औपचारिक विलंब के मुख्यमंत्री सीधे पुलिस लाइन परिसर में बनाए गए मुख्य राहत शिविर पंडाल में पहुंचे।
मंच से सीधा संवाद: “आपदा की हर घड़ी में सरकार साथ खड़ी है”
पुलिस लाइन के विशाल पंडाल में एकत्रित बाढ़ पीड़ितों से रूबरू होते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का रुख संवेदनशील और दृढ़ नजर आया। उन्होंने कहा कि संकट के समय में आम जनमानस की रक्षा और उनकी बुनियादी आवश्यकताओं की पूर्ति ही डबल इंजन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
मुख्यमंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए कहा: “प्राकृतिक आपदा पर किसी भी मनुष्य का जोर नहीं होता। जब नदियां उफान पर आती हैं, तो खेत, खलिहान और मकानों को नुकसान पहुंचता है। लेकिन संकट की इस घड़ी में सरकार की संवेदनशीलता और तत्परता पीड़ितों के आंसू पोंछने में कभी पीछे नहीं रहेगी। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन और प्रदेश सरकार के दृढ़ संकल्प के साथ हम हर पीड़ित परिवार को आश्वस्त करते हैं कि आप अकेले नहीं हैं।”
सीएम योगी ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य केवल औपचारिकता निभाना या चंद दिनों के भोजन के पैकेट बांटकर इतिश्री कर लेना नहीं है। बल्कि जिन ग्रामीण परिवारों की गृहस्थी गंगा और रामगंगा की तेज धारा में विलीन हो गई है, उन्हें दोबारा समाज की मुख्यधारा में सम्मानजनक जीवन देना है। सरकार पीड़ितों को सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर भूमि पट्टे उपलब्ध कराकर पक्के आवासों का निर्माण कराएगी, जिससे भविष्य में आने वाली बाढ़ से उनका जीवन हमेशा के लिए सुरक्षित हो सके।
1,000 परिवारों को राहत राशन किट: भोजन, रोशनी और तिरपाल की गारंटी
शिविर के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं मंच पर बुलाकर बाढ़ प्रभावित परिवारों को व्यापक राहत राशन किट सौंपी। प्रशासन द्वारा पारदर्शी सर्वेक्षण के आधार पर चिह्नित 1,000 जरूरतमंद परिवारों को दी गई इस राहत सामग्री को इस तरह तैयार किया गया है कि एक सामान्य परिवार को कम से कम एक माह तक किसी बुनियादी खाद्य वस्तु के लिए परेशान न होना पड़े:
अनाज एवं दालें: प्रत्येक किट में गुणवत्तापूर्ण आटा (10 किग्रा), चावल (10 किग्रा), अरहर/चना दाल, नमक और शुद्ध सरसों व रिफाइंड तेल शामिल हैं।
मसाले व सूखा राशन: रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हल्दी, धनिया, मिर्च पाउडर सहित भुने चने, बिस्कुट और गुड़ के पैकेट दिए गए हैं ताकि भोजन पकाने की स्थिति न होने पर भी बच्चों और बुजुर्गों को तात्कालिक पोषण मिल सके।
सुरक्षा एवं रोशनी: अंधेरे और बिजली गुल होने की स्थिति से निपटने के लिए मोमबत्तियां, माचिस और टॉर्च उपलब्ध कराई गई हैं।
आश्रय सुरक्षा (वाटरप्रूफ तिरपाल): जिन परिवारों के कच्चे मकानों की छतें टपक रही हैं या जो अस्थायी बांधों पर शरण लिए हुए हैं, उन्हें भारी बारिश और धूप से बचाव के लिए मजबूत वाटरप्रूफ तिरपाल बांटी गई हैं।
राहत सामग्री प्राप्त करने वाले ग्रामीणों ने कहा कि राहत पैकेटों में रोजमर्रा की छोटी-छोटी चीजों का ध्यान रखा गया है, जिससे उनके परिवार को आने वाले हफ्तों में भोजन की चिंता से मुक्ति मिलेगी।
आशियाना खो चुके बेघरों को मिला नया संबल: भूमि पट्टे और मुआवजे के चेक
फर्रुखाबाद में बाढ़ के साथ-साथ सबसे बड़ी त्रासदी नदी कटान (रिवर इरोजन) की रही है। कई गांवों में गंगा और रामगंगा के तीव्र बहाव ने उपजाऊ जमीनों और पुश्तैनी मकानों को अपने आगोश में ले लिया। इस विभीषिका में पूरी तरह बेघर हो चुके परिवारों के लिए मुख्यमंत्री का यह दौरा एक नया जीवनदान लेकर आया।
मुख्यमंत्री ने मंच से कटान पीड़ितों को आवासीय भूमि पट्टा आवंटन प्रमाण-पत्र वितरित किए।
सुरक्षित भूमि का आवंटन: बाढ़ क्षेत्र से दूर, सुरक्षित और ऊंचाई वाले स्थानों पर राजस्व विभाग द्वारा चिह्नित ग्राम समाज की भूमि के पट्टे पीड़ितों के नाम हस्तांतरित किए गए।
आवास योजना से जुड़ाव: मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया कि जिन परिवारों को जमीन के पट्टे दिए गए हैं, उन्हें तत्काल ‘मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण)’ अथवा ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत पक्का मकान बनाने हेतु पहली किस्त जारी की जाए।
आपदा मोचक निधि (SDRF) से सीधी सहायता: इसके अतिरिक्त, जिन ग्रामीणों के कच्चे-पक्के मकान आंशिक या पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए हैं, तथा जिनकी फसलें डूब गई हैं या दुधारू पशु बाढ़ में बह गए हैं, उन्हें राज्य आपदा मोचक निधि से आर्थिक मुआवजे के चेक सीधे प्रदान किए गए।
अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा: सीएम योगी की दो टूक चेतावनी
राहत सामग्री वितरण के पश्चात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फतेहगढ़ पुलिस लाइन सभागार में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर, पुलिस अधीक्षक आरती सिंह और अन्य संबंधित विभागों के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री के तेवर सख्त रहे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राहत कार्यों में लालफीताशाही, कागजी खानापूरी या किसी भी स्तर पर लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन और पुलिस महकमे को चार प्रमुख बिंदुओं पर तत्काल कार्रवाई के कड़े निर्देश दिए:
(क) नावों और मोटरबोट्स की चौबीसों घंटे गश्त
जलभराव वाले गांवों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), राज्य आपदा मोचक बल (SDRF) और पीएसी की फ्लड यूनिट्स की मोटरबोट्स लगातार निगरानी करें। निजी नावों को भी अधिग्रहित कर नाविकों को जीवन रक्षक जैकेट उपलब्ध कराई जाएं। किसी भी गांव में कोई भी नागरिक, गर्भवती महिला, वृद्ध या बीमार व्यक्ति अलग-थलग न रहे। जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित राहत शिविरों में तुरंत शिफ्ट किया जाए।
(ख) जलजनित रोगों पर वार: घर-घर पहुंचे मोबाइल मेडिकल वैन
बाढ़ का पानी स्थिर होने या घटने के समय संक्रामक बीमारियों का खतरा सर्वाधिक होता है। इसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग तत्काल मोबाइल मेडिकल यूनिट्स को गांव-गांव भेजे। प्रभावित बस्तियों में क्लोरीन की गोलियां, ओआरएस पैकेट, जिंक की गोलियां और आवश्यक एंटीबायोटिक्स व एंटी-वेनम (सर्पदंश की दवाएं) प्रचुर मात्रा में उपलब्ध कराई जाएं। जलभराव वाले इलाकों में नियमित रूप से फॉगिंग और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव हो ताकि डेंगू, मलेरिया और डायरिया जैसी बीमारियों के प्रसार को शुरुआत में ही रोका जा सके।
(ग) अन्नदाता के मवेशियों और पशुधन की सुरक्षा
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ पशुधन की रक्षा के लिए पशुपालन विभाग को युद्धस्तर पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में स्थापित पशु शिविरों में सूखे भूसे और हरे चारे की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। बाढ़ के पानी के कारण मवेशियों में फैलने वाले गलघोंटू और खुरपका-मुंहपका (FMD) जैसे रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण और प्राथमिक उपचार की टीमें मौके पर मौजूद रहें।
(घ) 24 घंटे सक्रिय रहे जिला आपदा कंट्रोल रूम (1077)
जिला आपदा नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर 1077 को पूरी तरह सक्रिय रखा जाए। कंट्रोल रूम पर प्राप्त होने वाली प्रत्येक कॉल का रिकॉर्ड दर्ज किया जाए और संबंधित क्षेत्र के नोडल अधिकारी अधिकतम 30 मिनट के भीतर समस्या का संज्ञान लेकर समाधान करें। वरिष्ठ अधिकारी स्वयं फील्ड में उतरें और केवल दफ्तरों में बैठकर रिपोर्ट तैयार करने की मानसिकता से बाहर निकलें।
फर्रुखाबाद से मथुरा: आपदा प्रबंधन से विकास के महायज्ञ तक
फतेहगढ़ पुलिस लाइन में लगभग एक घंटे तक चले सघन राहत कार्यक्रम, संवाद और समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दोपहर करीब 12:15 बजे अपने अगले गंतव्य मथुरा के लिए रवाना हो गए। काबिलेगौर है कि एक तरफ मुख्यमंत्री ने फर्रुखाबाद में आपदा की मार झेल रहे सीमांत नागरिकों के आंसू पोंछे, वहीं दूसरी तरफ वे सीधे कान्हा की नगरी मथुरा पहुंचे, जहां उन्होंने 1,051 करोड़ रुपये लागत की 229 विकास परियोजनाओं के शिलान्यास एवं लोकार्पण का महायज्ञ संपन्न कराया। मथुरा में स्वामी श्री हरिदास प्रेक्षागृह का उद्घाटन करने के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने 7,240 आवास लाभार्थियों को सहायता राशि के चेक और किसानों को ट्रैक्टर की चाबियां सौंपीं।
यह एक ही दिन में शासन के दो अलग-अलग आयामों, एक तरफ संवेदनशील संकट प्रबंधन और दूसरी तरफ तीव्र अधोसंरचनात्मक विकास को दर्शाने वाली कार्यशैली का प्रत्यक्ष उदाहरण है।
संवाद 24 ग्राउंड एनालिसिस: तात्कालिक मदद और स्थायी समाधान की दरकार
‘संवाद 24’ की ग्राउंड रिपोर्टिंग टीम ने फतेहगढ़ पुलिस लाइन से लेकर गंगा-रामगंगा के तटवर्ती गांवों (शमसाबाद, राजेपुर और अमृतपुर) तक स्थिति की पड़ताल की। मुख्यमंत्री की सीधी मौजूदगी ने निश्चित रूप से जिला प्रशासन की कार्यशैली में तेजी ला दी है और पीड़ितों के मन में यह विश्वास जगाया है कि वे लावारिस नहीं हैं। हालांकि, जमीनी हकीकत यह भी दर्शाती है कि फर्रुखाबाद में बाढ़ केवल इस वर्ष की समस्या नहीं है। हर मानसून में हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा बैराज से भारी मात्रा में छोड़े जाने वाले पानी के कारण यह क्षेत्र जलप्रलय का शिकार बनता है।
संवाद 24 के संपादकीय दृष्टिकोण से तीन कदम बेहद अहम हैं:
रिवर ट्रेनिंग एवं पक्के तटबंध: गंगा और रामगंगा के किनारे जहां-जहां आबादी वाले गांव स्थित हैं, वहां केवल मिट्टी की बोरियों (सैंडबैग्स) के भरोसे कटान नहीं रोका जा सकता। इसके लिए जल संसाधन विभाग को जियो-ट्यूब और पक्के पत्थरों की पिचिंग वाले दीर्घकालिक तटबंध बनाने होंगे।
समतल भूमि पर पुनर्वास का त्वरित क्रियान्वयन: मुख्यमंत्री ने आज पट्टे तो वितरित कर दिए हैं, लेकिन राजस्व विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि इन पट्टों पर पीड़ितों को वास्तविक भौतिक कब्जा बिना किसी कानूनी अड़चन या स्थानीय विवाद के तुरंत मिले।
फसल क्षति का त्वरित सर्वे: सैकड़ों हेक्टेयर में फैली मक्का, बाजरा, उर्द और सब्जियों की फसलें नष्ट हो चुकी हैं। लेखपालों और कृषि विभाग की टीमों को बिना किसी भ्रष्टाचार के हर किसान के नुकसान का पारदर्शी मूल्यांकन कर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और आपदा राहत कोष से सीधी आर्थिक मदद बैंक खातों में भेजनी होगी।
फतेहगढ़ की धरती पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आगमन मात्र एक औपचारिक सरकारी दौरा नहीं था, बल्कि इसने प्रशासनिक तंत्र को सक्रियता का इंजेक्शन दिया और बेबस ग्रामीणों को जीने का संबल प्रदान किया। 1,000 परिवारों को मिले खाद्यान्न किट, बेघरों को आवासीय जमीन के पट्टे और नुकसान की भरपाई के चेक इस बात का प्रमाण हैं कि जब राज्य का नेतृत्व संकट के केंद्र में खुद खड़ा होता है, तो व्यवस्था में संवेदनशीलता और जवाबदेही स्वतः प्रवाहित होने लगती है। अब दारोमदार स्थानीय प्रशासन पर है कि वह मुख्यमंत्री के सख्त दिशा-निर्देशों को धरातल पर किस निष्ठा के साथ लागू करता है।






