
संवाद 24 नई दिल्ली। देश के करोड़ों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के भविष्य पर मंडराते अनिश्चितता के बादलों को छांटने की दिशा में संसद ने एक बड़ा कदम उठाया है। सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026 को संसद के दोनों सदनों से हरी झंडी मिल गई है। लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी भारी हंगामे और विपक्ष के वॉकआउट के बीच इस ऐतिहासिक विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। अब इस पर केवल राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होना बाकी है, जिसके बाद यह कानून का रूप ले लेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विधेयक के पारित होने पर संतोष जताते हुए कहा है कि इस कड़े कानून से देश की परीक्षा प्रणाली पर अभ्यर्थियों का भरोसा वापस लौटेगा और पारदर्शी व्यवस्था कायम होगी।
विपक्ष के वॉकआउट के बीच राज्यसभा से पारित
संसद के उच्च सदन में इस संशोधन विधेयक पर लगभग सात घंटे तक तीखी बहस हुई। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने जब विधेयक के कड़े प्रावधानों को सदन के सामने रखा, तो विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष ने विधेयक के कानूनी प्रावधानों को अधूरा बताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से पांच तीखे सवाल पूछते हुए गृह मंत्री के जवाब की मांग रखी। चर्चा का जवाब देने के लिए जैसे ही मंत्री जितेंद्र सिंह खड़े हुए, विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में उपस्थिति की जिद पकड़ी। सभापति सीपी राधाकृष्णन द्वारा इस मांग को खारिज किए जाने के बाद कांग्रेस सहित समूचे विपक्षी दलों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। इसके बाद सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष के इस आचरण की कड़ी आलोचना करते हुए इसे संसदीय लोकतंत्र और मर्यादा का अनादर करार दिया।
इस कानून के दायरे में क्या-क्या आएगा?
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह कानून केवल प्रश्न-पत्र लीक होने की घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं में होने वाली हर छोटी-बड़ी गड़बड़ी को रोकने के लिए तैयार किया गया है। कानून के दायरे में निम्नलिखित मुख्य गतिविधियां शामिल होंगी:
पेपर और उत्तर कुंजी लीक: परीक्षा से पहले या दौरान प्रश्न-पत्र अथवा आंसर-की बेचना या वायरल करना।
सिस्टम से छेड़छाड़: उत्तर-पुस्तिकाओं (OMR sheets) और कंप्यूटर नेटवर्क या ऑनलाइन परीक्षा प्रणालियों से अवैध छेड़छाड़ करना।
फर्जीवाड़ा: फर्जी वेबसाइट्स, नकली प्रवेश पत्र (Admit Cards) या जाली पहचान पत्र तैयार करना।
संगठित गिरोह: परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की जगह सॉल्वर बिठाने या अनुचित साधनों के जरिए नकल कराने वाले संगठित सिंडिकेट पर शिकंजा।
यह कानून केवल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं पर ही लागू नहीं होगा, बल्कि इसके दायरे में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड और बैंकिंग परीक्षाओं समेत केंद्र सरकार की सभी प्रमुख भर्ती प्रक्रियाएं आएंगी।
सरकार का पक्ष: ‘निशाना सही जगह लगा है’
विपक्षी सदस्यों की टिप्पणियों पर चुटकी लेते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष की बौखलाहट से साफ है कि ‘तीर सही निशाने पर लगा है’। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं ने विधेयक के बारीकी से तैयार किए गए प्रावधानों का ठीक से अध्ययन नहीं किया है। राधाकृष्णन समिति की रिपोर्ट पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति की 76 प्रतिशत से अधिक सिफारिशों को सरकार पहले ही लागू कर चुकी है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पेपर लीक की समस्या किसी एक राज्य या किसी एक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों – चाहे वहां किसी भी दल की सरकार हो – में ऐसी घटनाएं देखी गई हैं। सरकार का लक्ष्य किसी पर राजनीति करना नहीं, बल्कि परीक्षाओं में ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की नीति लागू करना है।
युवाओं के भविष्य की सुरक्षा का संकल्प
इस संशोधन कानून का मुख्य उद्देश्य ईमानदार और मेहनत करने वाले छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना है। सालों तक दिन-रात एक करके पढ़ाई करने वाले युवाओं के सपनों पर जब पेपर लीक का पानी फिरता था, तो उनका मनोबल पूरी तरह टूट जाता था। नए कड़े प्रावधानों, त्वरित जांच प्रक्रियाओं और कठोर सजा के चलते अब नकल माफिया और संगठित अपराध सिंडिकेट में खौफ पैदा होगा। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद यह नया कानून देशभर में पूरी सख्ती से लागू कर दिया जाएगा।






