
संवाद 24 नई दिल्ली। देश के करोड़ों युवाओं और प्रतियोगी परीक्षार्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा लाया गया ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक-2026’ संसद में मुख्य चर्चा का केंद्र बन गया है। एक तरफ जहाँ सरकार देश में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने और पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसने के लिए कड़े से कड़ा कानून बनाने को तत्पर दिख रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष के लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण सदन में विधायी चर्चाओं में बार-बार बाधा आ रही है।
युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए सरकार का बड़ा कदम
सोमवार को केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ऐतिहासिक संशोधन विधेयक पेश किया। केंद्र सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है—देश के करोड़ों मेहनती छात्रों का भरोसा डिगने न पाए और किसी भी परीक्षा में नकल या भ्रष्टाचार कराने वाले गिरोहों को कठोर से कठोर सजा मिले।
विधेयक के प्रमुख और सख्त प्रावधान:
10 साल की सजा और ₹10 करोड़ का जुर्माना: संगठित रूप से पेपर लीक या धांधली कराने वाले माफिया के लिए 10 साल तक की जेल और ₹10 करोड़ तक के भारी जुर्माने का कड़ा प्रावधान।
फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स का गठन: परीक्षा धांधली से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए राज्यों में विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों (Special Fast Track Courts) का गठन किया जाएगा, जहाँ 2 महीने के भीतर जांच पूरी करने का लक्ष्य होगा।
क्या देश के युवाओं के मुद्दे पर राजनीति कर रहा है विपक्ष?
संसद का मानसून सत्र शुरू होने के बाद से ही सरकार नीट (NEET) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के सुधार पर खुली और गंभीर चर्चा कराने की बात लगातार दोहरा रही है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों से बार-बार अपील की कि यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी का नहीं, बल्कि देश के भविष्य और छात्रों की मेहनत को न्याय दिलाने का है। इसके बावजूद, सोमवार को जब सरकार संसद में युवाओं के हित में यह सख्त कानून पेश कर रही थी, तब विपक्षी सांसदों ने वेल में आकर नारेबाजी की और सदन की कार्यवाही बाधित की।
संसदीय कार्य मंत्री ने संसद के पटल पर विपक्ष के इस रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा:
“विपक्ष पहले खुद परीक्षा सुधारों पर चर्चा की मांग करता है, लेकिन जब सरकार सदन में आठ घंटे की लंबी चर्चा का समय तय करती है और ऐतिहासिक कानून पेश करती है, तो वही विपक्ष नारेबाजी करके कार्यवाही स्थगित कराने की कोशिश करता है। देश के युवा संसद की कार्यवाही देख रहे हैं और वे समझ रहे हैं कि कौन उनके हक की बात कर रहा है और कौन सिर्फ राजनीति।”
स्पीकर की पहल से बना रास्ता, मंगलवार को आर-पार की बहस
सदन में लगातार होते व्यवधान के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के फ्लोर लीडर्स के साथ बातचीत कर उन्हें समझाया कि परीक्षा की शुचिता का विषय देश के करोड़ों अभ्यर्थियों से जुड़ा है। स्पीकर की मध्यस्थता के बाद सदन के गतिरोध को खत्म करने और विधेयक पर 8 घंटे की सकारात्मक बहस के लिए सभी दल सहमत हुए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार का यह विजन स्पष्ट है कि देश में किसी भी स्तर पर परीक्षा में सेंधमारी करने वाले गिरोहों को बख्शा नहीं जाएगा। अब सबकी निगाहें मंगलवार को संसद में होने वाली इस व्यापक चर्चा पर टिकी हैं, जहाँ देश का युवा देखना चाहता है कि राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर क्या संसद एक स्वर में इस जनहितकारी कानून को अपना समर्थन देती है या नहीं।






