
संवाद 24 | कन्नौज जिले में लगातार गिरता भूजल स्तर प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) राजेंद्र कुमार श्रीवास की अध्यक्षता में आयोजित वर्षा जल संचयन एवं भूजल संरक्षण समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों ने भविष्य के जल संकट की आशंका को और गहरा कर दिया। अधिकारियों ने माना कि यदि वर्तमान स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में जिले के कई हिस्सों में पेयजल और सिंचाई दोनों पर असर पड़ सकता है।
छिबरामऊ सबसे अधिक प्रभावित, 5 साल में 5.87 मीटर गिरा भूजल स्तर
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, छिबरामऊ विकासखंड में वर्ष 2021 से 2026 के बीच भूजल स्तर में 5.87 मीटर की गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2021 में जहां भूजल 15.19 मीटर की गहराई पर था, वहीं अब यह 21.06 मीटर तक पहुंच गया है। इसके अलावा हसेरन, कन्नौज, तालग्राम, जलालाबाद और सौरिख ब्लॉकों में भी भूजल स्तर में लगातार कमी दर्ज की गई, जिसे विशेषज्ञों ने दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए चुनौती बताया।
तीन नदियां होने के बावजूद क्यों बढ़ रही चिंता?
सीडीओ राजेंद्र कुमार श्रीवास ने कहा कि जिले से गंगा, काली और ईशन जैसी नदियां गुजरने के बावजूद भूजल स्तर का लगातार नीचे जाना चिंताजनक संकेत है। उन्होंने वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण, तालाबों के पुनर्जीवन और व्यापक पौधरोपण को समयबद्ध तरीके से लागू करने के निर्देश दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित भूजल दोहन और वर्षा जल के पर्याप्त पुनर्भरण की कमी इस समस्या के प्रमुख कारण हैं।
किसानों से कम पानी वाली फसलें अपनाने की अपील
बैठक में उपनिदेशक कृषि संतोष कुमार ने किसानों से ऐसी फसलों की खेती को बढ़ावा देने की अपील की जिनमें सिंचाई की आवश्यकता अपेक्षाकृत कम होती है। उनका कहना था कि इससे भूजल दोहन कम होगा और जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा। साथ ही अधिकारियों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता अभियान तेज करने पर भी जोर दिया।
जल संरक्षण अब विकल्प नहीं, आवश्यकता
जल विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा जल संचयन, भूजल रिचार्ज, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों और जल संरक्षण आधारित खेती को बढ़ावा दिए बिना भूजल संकट से निपटना कठिन होगा। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करते हुए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।






