ऐतिहासिक समझौता: भारत में अब बेहद सस्ते दामों पर मिलेंगी ब्रिटिश लग्जरी कारें और स्कॉच व्हिस्की, जानें आपकी जेब पर क्या होगा असर!

संवाद 24 नई दिल्ली। भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के व्यापारिक इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से प्रतीक्षित और बहु-चर्चित मुक्त व्यापार समझौता यानी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस ऐतिहासिक समझौते के प्रभावी होते ही दोनों देशों के बीच आयात और निर्यात होने वाली सैकड़ों वस्तुओं पर लगने वाले भारी-भरकम सीमा शुल्क (कस्टम ड्यूटी) में ऐतिहासिक कटौती का रास्ता साफ हो गया है। इस डील के बाद भारतीय बाजार में ब्रिटिश लग्जरी कारों, स्कॉच व्हिस्की और प्रीमियम कॉस्मेटिक्स की कीमतों में भारी गिरावट आने वाली है, जो सीधे तौर पर भारतीय उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है।

शौकीनों की मौज: स्कॉच और व्हिस्की की कीमतों में होगी भारी गिरावट
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस मुक्त व्यापार समझौते का एक सबसे बड़ा और सीधा असर शराब उद्योग, विशेष रूप से ब्रिटिश स्कॉच और व्हिस्की पर पड़ने जा रहा है। अब तक भारत में बाहर से आने वाली स्कॉच व्हिस्की पर 150 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क लगाया जाता था, जिसके कारण ये उत्पाद आम भारतीय की पहुंच से काफी दूर थे। नए नियमों और इस एग्रीमेंट के तहत, इस 150 फीसदी की भारी ड्यूटी को विभिन्न चरणों में घटाकर मात्र 40 प्रतिशत के स्तर पर लाया जाएगा। इसका सीधा गणित यह है कि आने वाले समय में प्रीमियम स्कॉच और व्हिस्की की कीमतों में 110 प्रतिशत तक की रिकॉर्ड गिरावट देखने को मिल सकती है। इस फैसले से न केवल शौकीनों की जेब को राहत मिलेगी, बल्कि भारत के हॉस्पिटैलिटी और पर्यटन क्षेत्र को भी एक नया बूस्ट मिलेगा।

भारतीय सड़कों पर दौड़ेंगी ब्रिटेन की सस्ती लग्जरी कारें
इस समझौते का दूसरा सबसे बड़ा असर भारत के ऑटोमोबाइल सेक्टर पर दिखने वाला है। यदि आप भी जगुआर, लैंड रोवर, एस्टन मार्टिन, डिफेंडर या रोल्स रॉयस जैसी प्रीमियम कारों के दीवाने हैं, तो आपके लिए यह डील किसी लॉटरी से कम नहीं है। कोटा व्यवस्था (Quota System) के माध्यम से ब्रिटेन से आयात होने वाली इन शानदार गाड़ियों पर लगने वाले टैक्स को 100% से घटाकर मात्र 10% के स्तर पर लाया जा रहा है। प्रावधानों के अनुसार, समझौते के पहले साल में कम ड्यूटी रेट पर कुल 20,000 लग्जरी कारों का आयात किया जा सकेगा। इसके वर्गीकरण को इस प्रकार तय किया गया है:
बड़ी क्षमता वाले इंजन (3000cc से अधिक पेट्रोल और 2500cc से अधिक डीजल): इन 10,000 कारों पर सीमा शुल्क 110% से घटाकर सीधे 30% कर दिया गया है।
मध्यम क्षमता वाले इंजन (1500cc से 3000cc के बीच): ऐसी 5,000 कारों पर ड्यूटी 66% से कम करके 50% पर ला दी गई है।
दीर्घकालिक योजना: अगले 15 वर्षों के दौरान इस ड्यूटी को क्रमशः घटाते हुए अंतिम रूप से 10% के न्यूनतम स्तर पर स्थिर कर दिया जाएगा।

ब्यूटी प्रोडक्ट्स और कॉस्मेटिक्स भी होंगे बेहद किफायती
सिर्फ कार और शराब ही नहीं, बल्कि आम उपभोक्ताओं और खासकर महिलाओं के पसंदीदा प्रीमियम ब्यूटी ब्रांड्स भी अब बजट में आने वाले हैं। ब्रिटेन से भारत आने वाले विभिन्न कॉस्मेटिक्स, त्वचा की देखभाल करने वाले उत्पाद (स्किनकेयर) और अन्य घरेलू उपभोक्ता सामानों पर फिलहाल 22 प्रतिशत तक का आयात शुल्क लगता है। इस एग्रीमेंट के तहत इनमें से कई उत्पादों पर से ड्यूटी को तुरंत प्रभाव से समाप्त कर दिया गया है, जबकि कुछ अन्य श्रेणियों में अगले 10 वर्षों के भीतर इसे धीरे-धीरे घटाकर शून्य (0%) कर दिया जाएगा।

भारतीय निर्यातकों के लिए खुला यूके का बाजार, पड़ोसी देशों को झटका
यह मुक्त व्यापार समझौता एकतरफा नहीं है; बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था और निर्यातकों के लिए यह मुनाफे की एक नई गाथा लिखने जैसा है। इसके लागू होने से भारत के 99 प्रतिशत से अधिक उत्पादों को ब्रिटेन के बाजारों में ‘ड्यूटी-फ्री’ यानी शून्य शुल्क पर सीधे प्रवेश मिलेगा। पहले जहां भारतीय कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट्स पर 12%, बेस मेटल्स पर 10% और रसायनों (केमिकल्स) पर 8% की कस्टम ड्यूटी चुकानी पड़ती थी, वहीं अब यह पूरी तरह मुफ्त हो जाएगी। इससे भारत के कपड़े, जूते, चमड़े के सामान, मरीन प्रोडक्ट्स और फार्मास्यूटिकल्स (दवाइयाँ) ब्रिटेन में अन्य देशों के मुकाबले काफी प्रतिस्पर्धी और किफायती दरों पर बिक सकेंगे। इस डील से वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति और मजबूत होगी, जबकि टेक्सटाइल क्षेत्र में भारत को टक्कर देने वाले पड़ोसी देश जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश के निर्यात पर इसका सीधा नकारात्मक असर देखने को मिल सकता है।

दोनों महाशक्तियों की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक आर्थिक अनुमानों के अनुसार, भारत के साथ हुआ यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था में लगभग 4.8 अरब पाउंड (करीब 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक) का सीधा इजाफा करेगा। इसके साथ ही वहां के कामकाजी लोगों के वास्तविक वेतन में भी 2.2 अरब पाउंड की वृद्धि होने की संभावना जताई गई है। ब्रिटेन के प्रशासनिक हलकों में इसे भारत द्वारा वैश्विक स्तर पर अब तक हस्ताक्षरित किया गया सबसे बड़ा, व्यापक और ऐतिहासिक व्यापार समझौता माना जा रहा है, जो दोनों लोकतांत्रिक देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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