
संवाद 24 डेस्क। भारतीय भोजन अपनी विविधता, स्वाद और पौष्टिकता के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में चीला एक ऐसा लोकप्रिय और स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता है, जिसे भारत के लगभग हर क्षेत्र में अलग-अलग शैली से बनाया जाता है। बेसन का चीला, मूंग दाल का चीला, सूजी का चीला और मिश्रित आटे का चीला आज हर घर की रसोई में पसंद किया जाता है।
चीला न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि यह प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और खनिजों का भी अच्छा स्रोत माना जाता है। इसे कम तेल में तैयार किया जा सकता है, इसलिए यह बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों के लिए एक उत्तम विकल्प है।
चीला क्या है?
चीला एक पारंपरिक भारतीय पैनकेक जैसा व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से बेसन, दाल, सूजी या विभिन्न प्रकार के आटे के घोल से बनाया जाता है। इसमें स्वाद बढ़ाने के लिए प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, धनिया, अदरक तथा विभिन्न मसाले मिलाए जाते हैं। तवे पर हल्के तेल के साथ इसे दोनों ओर से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंका जाता है।
चीला बनाने की सामग्री (4 लोगों के लिए)
मुख्य सामग्री
- बेसन – 2 कप
- पानी – लगभग 1½ से 2 कप (आवश्यकतानुसार)
- बारीक कटा प्याज – 1 मध्यम आकार
- बारीक कटा टमाटर – 1
- बारीक कटी हरी मिर्च – 2
- बारीक कटा हरा धनिया – 3 बड़े चम्मच
- कद्दूकस किया हुआ अदरक – 1 छोटा चम्मच
मसाले
- नमक – स्वादानुसार
- लाल मिर्च पाउडर – ½ छोटा चम्मच
- हल्दी – ¼ छोटा चम्मच
- भुना जीरा पाउडर – ½ छोटा चम्मच
- अजवाइन – ½ छोटा चम्मच
- काली मिर्च पाउडर – ¼ छोटा चम्मच (वैकल्पिक)
- हींग – एक चुटकी
सेंकने के लिए
- तेल या घी – 2 से 3 बड़े चम्मच
आवश्यक रसोई उपकरण
- बड़ा मिक्सिंग बाउल
- व्हिस्क या चम्मच
- नॉन-स्टिक या लोहे का तवा
- कलछी
- स्पैचुला
- ब्रश या चम्मच (तेल लगाने के लिए)
घोल तैयार करने की विधि
सबसे पहले बेसन को एक बड़े बर्तन में छान लें। इससे उसमें मौजूद गांठें समाप्त हो जाती हैं और घोल चिकना बनता है।
अब इसमें हल्दी, नमक, लाल मिर्च, जीरा पाउडर, अजवाइन तथा हींग डालें।
थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाते हुए लगातार चलाएं ताकि गांठें न बनें।
घोल तैयार होने के बाद इसमें प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, अदरक और हरा धनिया मिला दें।
घोल को लगभग 10–15 मिनट तक ढककर रख दें। इससे बेसन अच्छी तरह पानी सोख लेता है और चीला अधिक स्वादिष्ट बनता है।
घोल की स्थिरता इतनी होनी चाहिए कि वह आसानी से तवे पर फैल सके।
चीला बनाने की चरणबद्ध विधि
चरण 1
तवे को मध्यम आंच पर गर्म करें।
चरण 2
तवे पर हल्का तेल लगाएं।
चरण 3
एक कलछी घोल लेकर तवे के बीच में डालें।
चरण 4
कलछी की सहायता से गोलाकार में धीरे-धीरे फैलाएं।
चरण 5
किनारों पर थोड़ा-सा तेल डालें।
चरण 6
मध्यम आंच पर लगभग 2 मिनट तक पकाएं।
चरण 7
जब नीचे की सतह सुनहरी हो जाए तो स्पैचुला की सहायता से पलट दें।
चरण 8
दूसरी ओर भी 1–2 मिनट तक सेंकें।
चरण 9
दोनों ओर से सुनहरा और कुरकुरा होने पर प्लेट में निकाल लें।
इसी प्रकार बाकी घोल से सभी चीले तैयार करें।
स्वाद बढ़ाने के लिए वैकल्पिक सामग्री
आप अपनी पसंद के अनुसार निम्न सामग्री भी मिला सकते हैं
- कद्दूकस की हुई गाजर
- बारीक कटी शिमला मिर्च
- पालक
- मेथी की पत्तियां
- पत्ता गोभी
- स्वीट कॉर्न
- कद्दूकस किया हुआ पनीर
- चीज़
- ओट्स
- तिल
चीला के विभिन्न प्रकार
- बेसन का चीला
सबसे लोकप्रिय और जल्दी बनने वाला चीला। - मूंग दाल का चीला
भीगी हुई मूंग दाल पीसकर तैयार किया जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है। - सूजी का चीला
सूजी, दही और सब्जियों से तैयार किया जाता है। - पालक चीला
पालक मिलाने से आयरन और फोलेट की मात्रा बढ़ जाती है। - पनीर चीला
बच्चों और प्रोटीन की अधिक आवश्यकता वाले लोगों के लिए उपयुक्त। - मल्टीग्रेन चीला
विभिन्न प्रकार के आटे मिलाकर बनाया जाता है।
चीला के स्वास्थ्य लाभ
- प्रोटीन का अच्छा स्रोत
बेसन और दाल दोनों में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। - फाइबर से भरपूर
यह पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में सहायक होता है। - लंबे समय तक पेट भरा रखता है
फाइबर और प्रोटीन के कारण जल्दी भूख नहीं लगती। - कम तेल में तैयार
यह तले हुए नाश्ते की तुलना में अधिक स्वास्थ्यवर्धक होता है। - वजन नियंत्रण में सहायक
संतुलित मात्रा में सेवन करने पर यह वजन प्रबंधन में मदद कर सकता है। - ऊर्जा प्रदान करता है
इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन शरीर को ऊर्जा देते हैं।
पोषण संबंधी अनुमान (प्रति चीला)
- ऊर्जा – लगभग 150–180 कैलोरी
- प्रोटीन – 6–8 ग्राम
- कार्बोहाइड्रेट – 18–22 ग्राम
- वसा – 5–7 ग्राम
- फाइबर – 3–4 ग्राम
यह मात्रा उपयोग की गई सामग्री और तेल के अनुसार बदल सकती है।
चीला के साथ परोसी जाने वाली चटनियां
- हरी धनिया-पुदीना चटनी
- नारियल की चटनी
- टमाटर की चटनी
- लहसुन की चटनी
- इमली की मीठी चटनी
परोसने के तरीके
चीला को गर्मागर्म परोसना सबसे अच्छा माना जाता है।
इसे दही, चटनी, अचार या एक कप चाय के साथ परोसा जा सकता है।
यदि इसे भोजन के रूप में परोसना हो तो सलाद और दही के साथ परोसें।
चीला बनाते समय ध्यान रखने योग्य बातें
- बेसन को हमेशा छानकर उपयोग करें।
- घोल बहुत पतला या बहुत गाढ़ा न रखें।
- तवा अच्छी तरह गर्म होना चाहिए।
- तेज आंच पर चीला न बनाएं।
- तेल सीमित मात्रा में उपयोग करें।
- घोल को 10–15 मिनट अवश्य रखें।
- तवे पर फैलाते समय अधिक दबाव न डालें।
सामान्य गलतियां
- बिना छाने बेसन का उपयोग करना।
- बहुत अधिक पानी मिला देना।
- ठंडे तवे पर घोल डालना।
- जल्दी पलट देना।
- अत्यधिक मोटा चीला बनाना।
- बहुत अधिक तेल डालना।
बच्चों के लिए विशेष चीला
यदि बच्चों के लिए बना रहे हैं तो—
- बारीक कटी सब्जियां मिलाएं।
- थोड़ा पनीर डालें।
- हल्के मसाले रखें।
- टमाटर सॉस या दही के साथ परोसें।
फिटनेस प्रेमियों के लिए
यदि आप व्यायाम करते हैं या प्रोटीन युक्त आहार चाहते हैं, तो—
- बेसन और मूंग दाल का मिश्रण लें।
- पनीर या टोफू भरें।
- कम तेल का प्रयोग करें।
- हरी सब्जियां अधिक मिलाएं।
चीला को अधिक स्वादिष्ट बनाने के सुझाव
- थोड़ा दही मिलाने से स्वाद बढ़ता है।
- कसूरी मेथी मिलाने से सुगंध आती है।
- काली मिर्च स्वाद को संतुलित करती है।
- ऊपर से तिल छिड़कने से कुरकुरापन आता है।
- लोहे के तवे पर बना चीला अधिक स्वादिष्ट बन सकता है।
चीला कब खाना सबसे अच्छा है?
- सुबह का नाश्ता
- शाम का हल्का नाश्ता
- बच्चों के टिफिन में
- यात्रा के लिए
- हल्के रात के भोजन के रूप में
भंडारण
घोल को रेफ्रिजरेटर में 24 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है। उपयोग से पहले अच्छी तरह मिला लें। ताजा बना चीला सबसे अधिक स्वादिष्ट और पौष्टिक माना जाता है।
चीला भारतीय रसोई का एक सरल, पौष्टिक और बहुउपयोगी व्यंजन है, जिसे कम समय और कम सामग्री में आसानी से तैयार किया जा सकता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे अपनी पसंद और पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार अनेक प्रकार की सब्जियों, दालों और अन्य सामग्रियों के साथ बनाया जा सकता है। चाहे पौष्टिक नाश्ते की बात हो, बच्चों के टिफिन की, या हल्के एवं संतुलित भोजन की—चीला हर अवसर के लिए एक उत्कृष्ट विकल्प है।
यदि सही अनुपात में सामग्री का उपयोग किया जाए, घोल को उचित समय तक विश्राम दिया जाए और मध्यम आंच पर धैर्यपूर्वक सेंका जाए, तो चीला स्वाद, बनावट और पौष्टिकता—तीनों में श्रेष्ठ बनता है। नियमित रूप से विभिन्न प्रकार के चीले अपने आहार में शामिल करके स्वाद के साथ-साथ संतुलित पोषण भी प्राप्त किया जा सकता है।






