क्या आपकी पसंदीदा ड्रिंक में है ‘खतरनाक’ खेल? FSSAI के कड़े एक्शन से शराब कंपनियों में मचा हड़कंप

संवाद 24 नई दिल्ली। देश में शराब, बीयर, व्हिस्की और वाइन के शौकीनों के लिए एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। यदि आप भी वीकेंड्स पर या पार्टियों में विभिन्न ब्रांड्स की शराब का सेवन करते हैं, तो अब आपको थोड़ा संभल जाने की जरूरत है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण यानी FSSAI (Food Safety and Standards Authority of India) ने देश की कई बड़ी शराब निर्माता कंपनियों (Liquor Manufacturing Companies) के खिलाफ एक बहुत बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। नियामक ने नियमों की अनदेखी करने वाली इन कंपनियों को कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे पूरे लिकर उद्योग में हड़कंप मच गया है।
प्राधिकरण को लंबे समय से शिकायतें और इनपुट्स मिल रहे थे कि कुछ कंपनियां बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने और ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए नियमों को ताक पर रखकर काम कर रही हैं। इस कड़े एक्शन के बाद अब शराब प्रेमियों के बीच भी अपनी सेहत और सुरक्षा को लेकर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं।

क्या है पूरा मामला? क्यों उठी कार्रवाई की तलवार?
FSSAI द्वारा की गई इस औचक और बड़ी कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण सामने आए हैं। नियामक ने पाया कि कुछ कंपनियां अपने लिकर प्रोडक्ट्स का स्वाद बढ़ाने के लिए उनमें ऐसे अतिरिक्त फ्लेवर्स (Artificial Flavors) का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रही हैं, जिनकी अनुमति देश के खाद्य सुरक्षा कानूनों में बिल्कुल नहीं है।
दूसरा गंभीर मुद्दा शराब की ‘उम्र’ यानी उसके ‘एजिंग’ (Ageing Claims) के दावों से जुड़ा है। अक्सर महंगी व्हिस्की, रम या वाइन की बोतलों पर यह दावा किया जाता है कि वे कई वर्षों पुरानी हैं, क्योंकि माना जाता है कि शराब जितनी पुरानी होती है, उसकी गुणवत्ता और कीमत उतनी ही बढ़ जाती है। नियामक के संज्ञान में आया है कि कुछ ब्रांड्स ग्राहकों को भ्रमित करने के लिए अपनी बोतलों पर भ्रामक और झूठे दावे छाप रहे थे। FSSAI के मुताबिक, यह पूरी कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक (अल्कोहलिक बेवरेज) विनियम, 2018 के कड़े प्रावधानों के तहत की गई है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश में बिकने वाले किसी भी मादक पेय में कोई ऐसा तत्व न हो, जो इंसानी स्वास्थ्य को भारी नुकसान पहुंचा सके।

नियमों की धज्जियां उड़ाकर मिलाया जा रहा था ‘स्वाद’
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि रम, ब्रांड, जिन, व्हिस्की, वाइन और यहां तक कि बीयर बनाने वाली कुछ कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स में प्राकृतिक स्वाद जैसा अहसास (Natural Flavor Mimicking Effect) पैदा करने के लिए कृत्रिम रसायनों और अनधिकृत फ्लेवर का सहारा ले रही थीं।
सरल शब्दों में कहें तो, जो स्वाद प्राकृतिक तरीके से लंबे समय तक रखने के बाद आना चाहिए था, उसे रसायनों के शॉर्टकट के जरिए चंद घंटों में तैयार किया जा रहा था। FSSAI ने इसे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और भरोसे के साथ सीधा खिलवाड़ माना है। प्राधिकरण ने नोटिस जारी कर सभी संबंधित कंपनियों से बेहद कड़े शब्दों में स्पष्टीकरण मांगा है। कंपनियों को यह बताना होगा कि आखिर नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त दंडात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए और क्यों न उनके उत्पादों की बिक्री पर रोक लगा दी जाए।

उद्योग जगत में खलबली, बुलाई गई आपात बैठक
इस नोटिस के सामने आने के बाद शराब उद्योग का प्रतिनिधित्व करने वाले संगठनों में भी हलचल तेज हो गई है। ‘कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बेवरेज कंपनीज’ (CIABC) ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि FSSAI ने इस संवेदनशील मुद्दे और विभिन्न तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा करने के लिए सभी हितधारकों (Stakeholders) और उद्योग संगठनों की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। हालांकि, संगठन ने अपने बचाव में यह दावा भी किया है कि उनके सदस्य और उनसे जुड़ी प्रमुख कंपनियां FSSAI द्वारा निर्धारित सभी नियमों, मानकों और दिशानिर्देशों का पूरी तरह पालन करती हैं। अब इस बैठक के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कौन-कौन सी कंपनियां नियामक के रडार पर हैं और किन पर गाज गिरने वाली है।

उपभोक्ताओं की सेहत से समझौता नहीं: विशेषज्ञ
खाद्य सुरक्षा मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि FSSAI का यह कदम देश के करोड़ों उपभोक्ताओं के हित में है। अल्कोहल का अत्यधिक सेवन वैसे ही स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है, लेकिन अगर उसमें अनधिकृत रासायनिक फ्लेवर या अशुद्धियां भी शामिल हो जाएं, तो यह लिवर, किडनी और पाचन तंत्र के लिए और भी ज्यादा घातक साबित हो सकता है। नियामक की इस कड़ाई से कंपनियों पर यह दबाव बनेगा कि वे अपने लेबल पर केवल वही जानकारियां छापें जो 100% सच हों। आने वाले दिनों में FSSAI बाजार से शराब के विभिन्न ब्रांड्स के सैंपल भी इकट्ठा कर सकती है ताकि लैबोरेट्री में उनकी गहन जांच की जा सके। ऐसे में शराब बनाने वाली कंपनियों की मुश्किलें आने वाले समय में और अधिक बढ़ना तय माना जा रहा है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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