G7 शिखर सम्मेलन में दुनिया की नजरें मोदी-ट्रंप वार्ता पर, क्या नए दौर में प्रवेश करेंगे भारत-अमेरिका संबंध

संवाद 24 नई दिल्ली । फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के बीच भारत और अमेरिका के संबंधों पर दुनिया की नजरें टिक गई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता को मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। करीब 16 महीनों बाद दोनों नेताओं की आमने-सामने मुलाकात होने जा रही है, जिससे कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच अहम मुलाकात
जी-7 सम्मेलन इस समय केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और क्षेत्रीय संघर्षों जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में हैं। ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक को दोनों देशों के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक सहयोग, तकनीकी साझेदारी तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में मजबूत हुए संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी बातचीत होने की संभावना है।

16 महीने बाद आमने-सामने होंगे दोनों नेता
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह पहली प्रत्यक्ष मुलाकात लगभग 16 महीनों के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले दोनों नेताओं की मुलाकात फरवरी 2025 में हुई थी। जी-7 सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं ने प्रारंभिक मुलाकात में एक-दूसरे का अभिवादन किया और संक्षिप्त बातचीत भी की, जिसके बाद औपचारिक द्विपक्षीय बैठक का कार्यक्रम तय किया गया। राजनयिक हलकों में इस मुलाकात को दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद की नई शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि बैठक के दौरान विभिन्न द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर खुलकर चर्चा होगी।

व्यापार, निवेश और वीजा नीति पर रह सकती है चर्चा
सूत्रों के अनुसार भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते, निवेश सहयोग, आपूर्ति श्रृंखलाओं की मजबूती तथा एच-1बी वीजा जैसे मुद्दे बैठक के प्रमुख एजेंडों में शामिल हो सकते हैं। भारतीय पेशेवरों और कारोबारियों से जुड़े विषय भी चर्चा में आने की संभावना है। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध लगातार मजबूत हुए हैं, लेकिन कुछ व्यापारिक मामलों में मतभेद भी बने हुए हैं। ऐसे में यह बैठक आर्थिक सहयोग को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

वैश्विक सुरक्षा और समुद्री मार्गों पर विशेष ध्यान
जी-7 सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा और नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार की रीढ़ माने जाने वाले समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखना सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है। हाल के महीनों में पश्चिम एशिया क्षेत्र में बढ़े तनाव और समुद्री गतिविधियों पर पड़े प्रभाव को देखते हुए भारत इस विषय को गंभीरता से उठा रहा है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी इस विषय पर भी अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ चर्चा कर सकते हैं।

जी-7 मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी ने सम्मेलन में भाग लेते हुए कहा कि भारत केवल अपने हितों की नहीं बल्कि वैश्विक दक्षिण के देशों की आकांक्षाओं की भी आवाज उठाएगा। उन्होंने देशों के बीच विश्वास को सबसे बड़ी रणनीतिक पूंजी बताते हुए पारदर्शिता और सहयोग आधारित वैश्विक व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया। भारत लगातार जी-7 बैठकों में आमंत्रित देश के रूप में भाग ले रहा है और वैश्विक मंचों पर उसकी भूमिका पहले से अधिक प्रभावशाली होती जा रही है।

दुनिया को वार्ता के नतीजों का इंतजार
भारत और अमेरिका दुनिया की दो बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियां हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की बैठक केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके परिणामों का असर वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। अब दुनिया की नजरें इस महत्वपूर्ण वार्ता पर टिकी हैं और सभी को इंतजार है कि दोनों नेता किन मुद्दों पर सहमति बनाते हैं तथा भविष्य के लिए किस प्रकार का साझा रोडमैप सामने आता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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