
संवाद 24 नई दिल्ली। महंगाई से जूझ रहे आम लोगों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकार और तेल विपणन कंपनियों की ओर से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की वृद्धि लागू कर दी गई है। नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं, जिससे देशभर के करोड़ों परिवारों का मासिक बजट प्रभावित होने की आशंका है।
लगातार बढ़ती महंगाई के बीच नया झटका
रोजमर्रा की जरूरतों की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के बीच रसोई गैस के दाम बढ़ना आम उपभोक्ताओं के लिए चिंता का विषय बन गया है। एलपीजी भारतीय घरों में खाना पकाने का सबसे प्रमुख ईंधन है और इसकी कीमत में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी का सीधा असर घरेलू खर्च पर पड़ता है। नई बढ़ोतरी के बाद परिवारों को हर सिलेंडर पर पहले की तुलना में अधिक रकम खर्च करनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।
दिल्ली में सिलेंडर 942 रुपये पहुंचा
ताजा बढ़ोतरी के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 913 रुपये से बढ़कर 942 रुपये हो गई है। हालांकि विभिन्न राज्यों और शहरों में स्थानीय करों तथा परिवहन लागत के कारण अंतिम कीमतों में थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है। तेल कंपनियां आमतौर पर इन कारकों को ध्यान में रखकर अलग-अलग शहरों के लिए खुदरा दरें निर्धारित करती हैं।
तीन महीनों में दूसरी बार बढ़े दाम
जानकारों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में यह दूसरी बार है जब घरेलू एलपीजी की कीमतों में वृद्धि की गई है। इससे पहले भी कीमतों में संशोधन किया गया था और अब नई बढ़ोतरी ने उपभोक्ताओं की चिंता और बढ़ा दी है। लगातार हो रहे बदलाव यह संकेत दे रहे हैं कि ऊर्जा क्षेत्र में लागत का दबाव अभी पूरी तरह कम नहीं हुआ है।
क्यों बढ़ती हैं एलपीजी की कीमतें?
एलपीजी की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारकों से प्रभावित होती हैं। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आयात लागत, मुद्रा विनिमय दर, परिवहन खर्च और सरकारी नीतियां इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलावों का असर घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुंचता है।
परिवारों के मासिक बजट पर पड़ेगा असर
एलपीजी सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा प्रभाव घरेलू बजट पर दिखाई देगा। जिन परिवारों में हर महीने एक या उससे अधिक सिलेंडर की खपत होती है, उन्हें अब अतिरिक्त खर्च वहन करना पड़ेगा। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में एलपीजी का उपयोग तेजी से बढ़ा है, ऐसे में कीमतों में यह बदलाव व्यापक असर डाल सकता है। कई परिवार पहले से ही खाद्य पदार्थों, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन पर बढ़ते खर्च का सामना कर रहे हैं। ऐसे में रसोई गैस महंगी होने से आर्थिक दबाव और बढ़ सकता है।
आगे क्या हो सकते हैं संकेत?
ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि आने वाले महीनों में वैश्विक परिस्थितियों और कच्चे तेल की कीमतों पर काफी कुछ निर्भर करेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बनी रहती है तो ईंधन की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं उपभोक्ताओं की नजर अब इस बात पर टिकी है कि सरकार और तेल कंपनियां भविष्य में कीमतों को लेकर क्या रुख अपनाती हैं। फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों के साथ ही अपनी रसोई का बजट संभालना होगा।






