IMF के भरोसे सैन्य ताकत बढ़ाने की तैयारी! पाकिस्तान रक्षा बजट में करेगा 100 अरब रुपये की बढ़ोतरी

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संवाद 24 नई दिल्ली । आर्थिक संकट, महंगाई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कर्ज के दबाव से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब अपने रक्षा बजट को बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान सरकार अगले वित्त वर्ष 2026-27 में रक्षा खर्च में करीब 100 अरब पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी कर सकती है। यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब देश की अर्थव्यवस्था गंभीर चुनौतियों से गुजर रही है और आम जनता महंगाई की मार झेल रही है।

रक्षा बजट 2.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान
रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान का रक्षा बजट मौजूदा 2.564 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये से बढ़कर लगभग 2.665 ट्रिलियन रुपये तक पहुंच सकता है। यानी अगले वित्त वर्ष में रक्षा क्षेत्र पर खर्च में भारी इजाफा देखने को मिल सकता है। बताया जा रहा है कि यह प्रस्ताव IMF समर्थित आर्थिक सुधार कार्यक्रम के तहत तैयार किए जा रहे नए बजट का हिस्सा है।

IMF की शर्तों के बीच बढ़ेगा सैन्य खर्च
पाकिस्तान इस समय IMF के बड़े आर्थिक सहायता कार्यक्रम पर निर्भर है। IMF ने पाकिस्तान के लिए राजस्व बढ़ाने, सरकारी खर्च नियंत्रित करने और कई आर्थिक सुधार लागू करने की शर्तें रखी हैं। इसके बावजूद सरकार रक्षा खर्च में बढ़ोतरी की योजना बना रही है। रिपोर्ट के अनुसार IMF ने 2026-27 के लिए पाकिस्तान की कुल संघीय आय 17.144 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये रहने का अनुमान लगाया है, जो मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 13.5 प्रतिशत अधिक है।

भारत के साथ तनाव के बाद बढ़ी चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के साथ हाल के तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता मजबूत करना चाहता है। पिछले वर्षों में भी पाकिस्तान ने रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी की थी। रिपोर्टों के मुताबिक सीमावर्ती सुरक्षा, हथियारों के आधुनिकीकरण और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) की सुरक्षा पर सरकार विशेष ध्यान दे रही है।

जनता पर बढ़ रहा आर्थिक दबाव
एक तरफ सरकार रक्षा बजट बढ़ाने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की आम जनता आर्थिक संकट का सामना कर रही है। देश में महंगाई, बेरोजगारी और ऊर्जा संकट लगातार बढ़ रहे हैं। कई आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि रक्षा खर्च बढ़ाने से सामाजिक क्षेत्रों जैसे शिक्षा और स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। आलोचकों का मानना है कि पाकिस्तान पहले से ही अपने बजट का बड़ा हिस्सा सेना और कर्ज भुगतान पर खर्च करता है।

भ्रष्टाचार रोकने और डिजिटल सिस्टम पर भी जोर
IMF कार्यक्रम के तहत पाकिस्तान सरकार ने भ्रष्टाचार कम करने और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी कई वादे किए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार इस वर्ष के अंत तक सबसे अधिक भ्रष्टाचार प्रभावित 10 संस्थानों की पहचान कर उनका ऑडिट करेगी। साथ ही जून 2027 तक सरकारी भुगतानों को पूरी तरह डिजिटल करने की योजना पर भी काम किया जाएगा।

आर्थिक सुधारों के साथ सख्त फैसलों की तैयारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान सरकार विशेष आर्थिक क्षेत्रों और कुछ उद्योगों को मिलने वाली टैक्स छूट और प्रोत्साहनों को धीरे-धीरे समाप्त करने की तैयारी में भी है। IMF चाहता है कि सभी उद्योगों और व्यापारिक क्षेत्रों के लिए समान आर्थिक माहौल तैयार किया जाए। इसके चलते आने वाले समय में कई क्षेत्रों में सब्सिडी और सरकारी राहत कम हो सकती है।

विपक्ष और विशेषज्ञ उठा रहे सवाल
पाकिस्तान में विपक्षी दल और कई अर्थशास्त्री सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब देश की बड़ी आबादी आर्थिक रूप से कमजोर है और सरकार IMF के कर्ज पर निर्भर है, तब रक्षा बजट में इतनी बड़ी बढ़ोतरी जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है। कुछ विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि आर्थिक सुधार सफल नहीं हुए तो पाकिस्तान को भविष्य में और अधिक विदेशी कर्ज लेना पड़ सकता है।

Madhvi Singh
Madhvi Singh

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