लिंक एक्सप्रेस-वे पर किसानों का बड़ा आंदोलन तय: 15 मई से अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान
Share your love

भारतीय किसान यूनियन ने फर्रुखाबाद में प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेस-वे को लेकर आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है। संगठन ने आरोप लगाया है कि एक्सप्रेस-वे के कटों के निर्माण में भारी विसंगतियां हैं और किसानों की जरूरत से अधिक जमीन अधिग्रहित की जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर 15 मई से जिला मुख्यालय पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू करने की घोषणा की गई है।
“आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे मॉडल” की मांग पर अड़े किसान
सोमवार शाम नेकपुर स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में जिलाध्यक्ष अजय कटियार ने कहा कि लिंक एक्सप्रेस-वे में बनाए जा रहे तीन बड़े कट किसानों के लिए परेशानी का कारण बन रहे हैं। उनका आरोप है कि इन कटों के कारण अतिरिक्त भूमि अधिग्रहित की जा रही है। किसान संगठन की मांग है कि इन कटों का डिजाइन आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे की तर्ज पर तैयार किया जाए, जिससे कम जमीन में बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।
“पहले संशोधन हुआ, फिर पुराने डिजाइन बहाल”
अजय कटियार ने दावा किया कि कुछ समय पहले संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद यूपीडा ने कटों के डिजाइन में बदलाव किया था। उस दौरान किसानों की सहमति के अनुरूप संशोधित नक्शा तैयार किया गया था, लेकिन बाद में प्रशासनिक बदलाव के बाद फिर से पुराने प्रस्ताव लागू कर दिए गए। यूनियन का कहना है कि इस संबंध में एक सप्ताह पूर्व जिलाधिकारी को ज्ञापन देकर स्थिति से अवगत कराया जा चुका है।
भूमिहीन होने का डर, बच्चों के भविष्य पर उठे सवाल
प्रेस वार्ता में छोटे और सीमांत किसानों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई गई। किसान नेताओं ने कहा कि बड़ी मात्रा में भूमि अधिग्रहण के बाद कई परिवार भूमिहीन हो सकते हैं, लेकिन सरकार की ओर से पुनर्वास या रोजगार को लेकर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई है। यूनियन ने आशंका जताई कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तरह यहां भी कटों के आसपास अतिरिक्त जमीन लेकर भविष्य में व्यावसायिक भूखंड विकसित किए जा सकते हैं।
मुआवजे और सर्किल रेट पर भी बढ़ा विवाद
किसानों ने अधिग्रहित जमीन के मुआवजे को लेकर भी नाराजगी जताई है। संगठन की मांग है कि सर्किल रेट को बाजार मूल्य से चार गुना तक बढ़ाया जाए, ताकि किसान दूसरी जगह समान जमीन खरीद सकें। हाल ही में जनप्रतिनिधियों ने भी मुख्यमंत्री से मुलाकात कर फर्रुखाबाद लिंक एक्सप्रेस-वे के लिए भूमि अधिग्रहण में बाजार दर के अनुरूप मुआवजा देने की मांग उठाई थी।
आबादी के करीब से गुजर रहा एक्सप्रेस-वे, मकानों पर भी संकट
भारतीय किसान यूनियन ने आरोप लगाया कि कुछ गांवों में एक्सप्रेस-वे का प्रस्तावित मार्ग आबादी के बेहद करीब से निकाला गया है। इससे कई मकानों और निर्माणों के टूटने की आशंका बढ़ गई है। संगठन का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
राकेश टिकैत के निर्देश पर होगा आंदोलन
यूनियन नेताओं ने बताया कि राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के निर्देश पर 15 मई से आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन का दावा है कि इसमें जिले के हजारों किसान शामिल होंगे और मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा। प्रेस वार्ता में यूनियन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।






