अब नहीं चलेगी मनमानी फीस! दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों पर सख्ती – महीनेवार शुल्क का नियम लागू
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संवाद 24 नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर लंबे समय से चल रही शिकायतों के बीच अब बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब स्कूल अभिभावकों से तिमाही (Quarterly) या एकमुश्त फीस नहीं वसूल सकेंगे, बल्कि केवल महीनेवार (Monthly) शुल्क ही लिया जाएगा। इस फैसले को अभिभावकों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।
दरअसल, दिल्ली में लगातार प्राइवेट स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने और एक साथ भारी रकम वसूलने की शिकायतें सामने आ रही थीं। कई अभिभावकों ने आरोप लगाया था कि स्कूल अचानक फीस में बढ़ोतरी कर देते हैं और तीन-तीन महीने की फीस एक साथ जमा करने का दबाव बनाते हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने सख्त रुख अपनाया है।
अब कैसे वसूली जाएगी फीस?
नए नियम के अनुसार अब स्कूलों को फीस वसूली के तरीके में बदलाव करना होगा।
केवल महीनेवार फीस ही ली जा सकेगी
तिमाही या सालाना अग्रिम भुगतान का दबाव नहीं बनाया जाएगा
फीस से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता जरूरी होगी
इस कदम का उद्देश्य अभिभावकों पर अचानक पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करना है, ताकि उन्हें एक बार में बड़ी रकम न चुकानी पड़े।
फीस बढ़ोतरी पर भी लगाम
दिल्ली सरकार पहले ही निजी स्कूलों की फीस पर नियंत्रण के लिए कानून ला चुकी है। Delhi School Education (Transparency in Fixation and Regulation of Fees) Act, 2025 के तहत अब बिना मंजूरी के फीस बढ़ाना आसान नहीं होगा। इस कानून के जरिए लगभग 1700 निजी स्कूलों को एक नियामक ढांचे में लाने की कोशिश की गई है, ताकि मनमानी फीस वसूली रोकी जा सके।
कोर्ट और सरकार के बीच चल रहा मामला
हालांकि, इस कानून को लागू करने को लेकर मामला अदालत में भी पहुंचा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर रोक लगाते हुए फिलहाल मौजूदा फीस ढांचे को बनाए रखने की बात कही है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कानून को लागू करने के समय को लेकर सावधानी बरतने को कहा था, ताकि बीच सत्र में कोई अव्यवस्था न हो।
अभिभावकों को क्या होगा फायदा?
इस नए नियम से अभिभावकों को कई स्तर पर राहत मिलने की उम्मीद है:
एकमुश्त भारी फीस देने का दबाव खत्म होगा
घर का मासिक बजट संभालना आसान होगा
फीस में पारदर्शिता बढ़ेगी
मनमानी बढ़ोतरी पर रोक लगेगी
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।
स्कूलों की क्या प्रतिक्रिया?
दूसरी तरफ, कुछ निजी स्कूलों ने इस नियम पर चिंता भी जताई है। उनका कहना है कि इससे उनकी वित्तीय योजना और संचालन पर असर पड़ सकता है। स्कूल प्रबंधन का तर्क है कि कई खर्च एक साथ होते हैं, ऐसे में मासिक फीस मॉडल अपनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
पहले क्या थी स्थिति?
अब तक कई निजी स्कूल तिमाही या सालाना फीस एक साथ लेते थे। इससे अभिभावकों पर अचानक बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता था। इसी वजह से लंबे समय से इस व्यवस्था में बदलाव की मांग उठ रही थी।
बड़ा सवाल: क्या पूरी तरह रुकेगी मनमानी?
सरकार के इस कदम से जरूर राहत की उम्मीद जगी है, लेकिन असली चुनौती इसके सख्त पालन की है। अगर नियमों का सही तरीके से पालन हुआ, तो यह फैसला शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है। फिलहाल, दिल्ली के लाखों अभिभावकों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह नया नियम वाकई उन्हें राहत दिला पाएगा या फिर यह भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।






