यूपी असिस्टेंट प्रोफेसर पुनर्परीक्षा: इस बार ‘स्मार्ट’ सवालों और AI निगरानी ने बदली तस्वीर

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संवाद 24 डेस्क। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से प्रतीक्षित असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पुनर्परीक्षा आखिरकार 18 और 19 अप्रैल को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। पिछली परीक्षा में पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोपों के बाद जिस परीक्षा को रद्द करना पड़ा था, उसी परीक्षा की पुनर्परीक्षा इस बार प्रशासन और आयोग दोनों के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी थी। ऐसे में परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा, तकनीक और पारदर्शिता का ऐसा संयोजन देखने को मिला, जिसने अभ्यर्थियों के बीच भरोसा पैदा किया।

पिछली विवादित परीक्षा के बाद थी साख बचाने की चुनौती
असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा को लेकर पिछले वर्ष बड़ा विवाद खड़ा हो गया था। पेपर लीक और गड़बड़ियों की पुष्टि के बाद राज्य सरकार ने परीक्षा को निरस्त कर दिया था। इसके बाद अभ्यर्थियों में गहरा असंतोष था और आयोग की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे थे। यही वजह रही कि इस बार पुनर्परीक्षा केवल एक भर्ती प्रक्रिया नहीं, बल्कि आयोग की साख बहाल करने की परीक्षा भी बन गई।

दो दिन, दो शिफ्ट और हजारों अभ्यर्थियों की परीक्षा
पुनर्परीक्षा 18 और 19 अप्रैल को दो-दो शिफ्टों में आयोजित की गई। सुबह की शिफ्ट 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी शिफ्ट 2:30 बजे से 4:30 बजे तक चली। परीक्षा प्रदेश के कई बड़े शहरों में आयोजित की गई, जिनमें Agra, Meerut, Lucknow, Prayagraj, Gorakhpur और Varanasi शामिल रहे। परीक्षा विभिन्न विषयों के लिए आयोजित हुई, जिनमें कला, विज्ञान, वाणिज्य, भाषा और अन्य विषय शामिल थे।

इस बार परीक्षा में दिखी तकनीक की मजबूत मौजूदगी
इस बार परीक्षा प्रक्रिया की सबसे बड़ी खासियत रही तकनीक का व्यापक उपयोग। आयोग ने AI आधारित निगरानी प्रणाली लागू की। सभी परीक्षा केंद्रों पर कैमरे लगाए गए और उनकी लाइव मॉनिटरिंग एक AI इंटीग्रेटेड कंट्रोल कमांड रूम से की गई। आयोग के अध्यक्ष, सचिव और परीक्षा नियंत्रक खुद इस कंट्रोल रूम से गतिविधियों पर नजर रख रहे थे। किसी भी संदिग्ध हरकत की पहचान तुरंत हो सके, इसके लिए कैमरों को स्मार्ट एनालिटिक्स से जोड़ा गया था।

AI कैमरों ने नकल पर कसी लगाम
पिछले वर्षों में कई भर्ती परीक्षाओं में नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई थी। यही कारण रहा कि इस बार AI कैमरों की मदद से परीक्षार्थियों की हर गतिविधि रिकॉर्ड की गई। संदिग्ध मूवमेंट, बार-बार सिर घुमाना, किसी अन्य परीक्षार्थी से संवाद की कोशिश या अनुचित व्यवहार जैसे पैटर्न तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच रहे थे। इससे परीक्षा केंद्रों पर अनुशासन बना रहा और अभ्यर्थियों को भी यह संदेश गया कि इस बार किसी तरह की धांधली की गुंजाइश नहीं है।

प्रश्नपत्र में दिखा नया और आधुनिक पैटर्न
अभ्यर्थियों के अनुसार इस बार प्रश्नपत्र का स्तर पिछले वर्षों की तुलना में अधिक आधुनिक और विश्लेषणात्मक था। सामान्य अध्ययन खंड में पारंपरिक तथ्यात्मक प्रश्नों की जगह ऐसे सवाल पूछे गए, जिनमें तर्क, विश्लेषण और समसामयिक समझ की जरूरत थी। कई प्रश्न “सुमेलित कीजिए” और “कथन पर विचार कीजिए” जैसे पैटर्न पर आधारित थे। इससे परीक्षा केवल रटने वाले उम्मीदवारों के लिए नहीं, बल्कि अवधारणात्मक समझ रखने वालों के लिए अधिक उपयोगी बन गई।

‘स्मार्ट’ सवालों ने अभ्यर्थियों को किया प्रभावित
परीक्षा देकर बाहर निकले कई अभ्यर्थियों ने माना कि प्रश्नपत्र चुनौतीपूर्ण जरूर था, लेकिन गुणवत्तापूर्ण भी था। सवालों में नई तकनीक, समसामयिक घटनाएं, तर्कशक्ति और विश्लेषण का मिश्रण था। यही कारण है कि कई परीक्षार्थियों ने इसे “स्मार्ट पेपर” बताया। उनका कहना था कि इस तरह के प्रश्न उच्च शिक्षा के शिक्षक पद के लिए अधिक उपयुक्त हैं, क्योंकि इससे उम्मीदवार की वास्तविक समझ का आकलन होता है।

केवल सामान्य ज्ञान नहीं, सोचने की क्षमता भी परखी गई
इस बार सामान्य अध्ययन के प्रश्न केवल तथ्यों पर आधारित नहीं थे। उम्मीदवारों को कथनों का मूल्यांकन करना पड़ा, विकल्पों के बीच संबंध समझना पड़ा और कई सवालों में बहुस्तरीय सोच की जरूरत महसूस हुई। इससे यह साफ हुआ कि आयोग अब केवल जानकारी रखने वाले उम्मीदवारों की बजाय, समझदारी और विवेक रखने वाले शिक्षकों का चयन करना चाहता है। यही बदलाव इस परीक्षा को अन्य भर्ती परीक्षाओं से अलग बनाता है।

परीक्षा के दौरान लखनऊ में आग की घटना से मची हलचल
हालांकि परीक्षा शांतिपूर्ण रही, लेकिन Lucknow के एक परीक्षा केंद्र पर आग लगने की घटना ने कुछ समय के लिए अफरा-तफरी जरूर मचा दी। हालांकि प्रशासन और केंद्र प्रबंधन की तत्परता से स्थिति पर जल्दी नियंत्रण पा लिया गया। किसी भी परीक्षार्थी को नुकसान नहीं हुआ और परीक्षा प्रक्रिया भी प्रभावित नहीं हुई। इस घटना ने यह जरूर दिखाया कि बड़े स्तर की परीक्षाओं में केवल तकनीकी सुरक्षा ही नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन भी बेहद महत्वपूर्ण है।

कितने पदों के लिए हो रही है भर्ती
यह भर्ती अभियान लंबे समय से लंबित 900 से अधिक पदों को भरने के लिए चलाया जा रहा है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में 910 से 917 पद शामिल हैं। इनमें अलग-अलग विषयों के लिए असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर चयन किया जाएगा। आयोग के अनुसार परीक्षा के बाद उत्तर कुंजी और प्रश्नपत्र भी जारी किए जाएंगे, ताकि अभ्यर्थी अपने प्रदर्शन का आकलन कर सकें।

परीक्षा के बाद अब क्या होगा
पुनर्परीक्षा संपन्न होने के बाद अब उम्मीदवारों की नजर उत्तर कुंजी और परिणाम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोग जल्द ही विषयवार प्रश्नपत्र और संभावित उत्तर कुंजी जारी करेगा। इसके बाद आपत्तियां आमंत्रित की जाएंगी और फिर अंतिम उत्तर कुंजी तैयार होगी। उसके आधार पर परिणाम जारी किए जाएंगे। पिछले अनुभवों को देखते हुए आयोग इस बार प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी रखने की कोशिश करेगा।

भविष्य के लिए क्या संकेत देती है यह परीक्षा
यह पुनर्परीक्षा केवल एक भर्ती प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि यह संकेत भी थी कि आने वाले समय में सरकारी परीक्षाएं तकनीक के सहारे और अधिक पारदर्शी हो सकती हैं। AI आधारित निगरानी, स्मार्ट प्रश्नपत्र, लाइव मॉनिटरिंग और परीक्षा के हर चरण पर नियंत्रण जैसी व्यवस्थाएं अब भर्ती परीक्षाओं का स्थायी हिस्सा बन सकती हैं। इससे ईमानदार अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ेगा और नकल माफिया पर लगाम लगेगी।

अभ्यर्थियों के लिए बड़ा संदेश
इस परीक्षा ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि अब केवल रटकर परीक्षा पास करना आसान नहीं होगा। उम्मीदवारों को विषय की गहरी समझ, समसामयिक घटनाओं की जानकारी और विश्लेषणात्मक क्षमता विकसित करनी होगी। आने वाले वर्षों में ऐसी ही परीक्षाओं का चलन बढ़ेगा, जहां उम्मीदवार की सोच, तर्क और समझ को प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में तैयारी का तरीका भी बदलना होगा।

Geeta Singh
Geeta Singh

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