UP असिस्टेंट प्रोफेसर री-एग्जाम में नया मोड़, सिर्फ पांच विषयों को मिलेगी प्राथमिकता!

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संवाद 24 डेस्क। उत्तर प्रदेश में सहायक प्रोफेसर भर्ती का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थियों के लिए एक नई जानकारी सामने आई है। लंबे समय से विवादों, परीक्षा निरस्तीकरण और देरी से जूझ रही उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की सहायक प्रोफेसर भर्ती अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। खबर है कि री-एग्जाम के बाद प्रारंभिक स्तर पर केवल पांच विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पहले किया जाएगा, जबकि बाकी विषयों के अभ्यर्थियों को परिणाम के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब पहले ही हजारों उम्मीदवार चार साल से अधिक समय से भर्ती प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2022 में जारी विज्ञापन संख्या 51 के तहत आवेदन लिए गए थे, लेकिन परीक्षा, विवाद और पुनर्परीक्षा की प्रक्रिया के कारण भर्ती लगातार लंबी खिंचती गई।

चार साल बाद हो रही परीक्षा, अभ्यर्थियों में बढ़ी बेचैनी
उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा सेवा आयोग की सहायक प्रोफेसर भर्ती का विज्ञापन वर्ष 2022 में जारी हुआ था। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद परीक्षा आयोजित हुई, लेकिन कई विषयों में पेपर और प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। इसके बाद परीक्षा निरस्त करनी पड़ी और री-एग्जाम कराने का फैसला लिया गया।
अब री-एग्जाम 18 और 19 अप्रैल 2026 को आयोजित किया जा रहा है। परीक्षा दो दिनों में दो-दो शिफ्ट में होगी और राज्य के 53 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। इसमें आगरा, मेरठ, लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर और वाराणसी जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं।
री-एग्जाम में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 84 हजार से अधिक बताई जा रही है। इतने बड़े स्तर पर परीक्षा आयोजित करने के कारण आयोग के सामने मूल्यांकन और परिणाम जारी करने की चुनौती भी बड़ी है।

पांच विषयों की कॉपियां पहले जांचने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार आयोग ने मूल्यांकन प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी की है। शुरुआत में केवल पांच विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं की जांच पहले कराई जाएगी। माना जा रहा है कि जिन विषयों में अभ्यर्थियों की संख्या कम है या जहां भर्ती प्रक्रिया अपेक्षाकृत जल्दी पूरी कराई जा सकती है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
हालांकि आयोग की ओर से अभी आधिकारिक रूप से सभी विषयों की सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन इस फैसले ने बाकी विषयों के उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है। जिन अभ्यर्थियों ने बड़े विषयों जैसे हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, राजनीति विज्ञान, अर्थशास्त्र या कॉमर्स में आवेदन किया है, उन्हें आशंका है कि उनके परिणाम जारी होने में अधिक समय लग सकता है।
यही कारण है कि सोशल मीडिया और अभ्यर्थी समूहों में इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि आयोग कहीं चरणबद्ध परिणाम जारी करने की तैयारी तो नहीं कर रहा। कई उम्मीदवारों का मानना है कि यदि कुछ विषयों का मूल्यांकन पहले होगा, तो बाकी विषयों के लिए चयन प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।

किन विषयों के लिए हो रही है परीक्षा
री-एग्जाम 18 और 19 अप्रैल को कुल कई विषयों के लिए आयोजित किया जा रहा है। पहले दिन अंग्रेजी, समाजशास्त्र, रसायन विज्ञान, शिक्षा, जूलॉजी, हिंदी, विधि, दर्शनशास्त्र और मानवशास्त्र जैसे विषय शामिल हैं। दूसरे दिन इतिहास, गणित, भूगोल, सांख्यिकी, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, कॉमर्स और भौतिकी जैसे विषयों की परीक्षा होगी।
परीक्षा दो शिफ्टों में आयोजित होगी। पहली शिफ्ट सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 2:30 बजे से 4:30 बजे तक चलेगी।

भर्ती प्रक्रिया में लगातार देरी बनी बड़ी समस्या
यह भर्ती प्रक्रिया अब केवल परीक्षा तक सीमित मुद्दा नहीं रह गई है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में रिक्त पदों और शिक्षकों की कमी से भी जुड़ा बड़ा सवाल बन चुकी है। कई सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में वर्षों से सहायक प्रोफेसर के पद खाली पड़े हैं।
भर्ती में देरी के कारण कॉलेजों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। कई संस्थानों में अतिथि शिक्षकों के सहारे व्यवस्था चलाई जा रही है। ऐसे में यदि मूल्यांकन भी चरणबद्ध और सीमित विषयों तक किया गया, तो इससे नियुक्ति प्रक्रिया और लंबी हो सकती है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि पहले ही चार साल का समय निकल चुका है। अब यदि कुछ विषयों का परिणाम पहले और कुछ का बाद में आएगा, तो इससे पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। उम्मीदवारों की मांग है कि आयोग सभी विषयों की कॉपियों का मूल्यांकन समानांतर तरीके से कराए और जल्द से जल्द परिणाम घोषित करे।

परीक्षा केंद्र, एडमिट कार्ड और सिटी स्लिप को लेकर भी तैयारी पूरी
आयोग ने परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों के लिए सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर दी है। इसके जरिए उम्मीदवार अपने परीक्षा शहर की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। एडमिट कार्ड भी जारी किए जा चुके हैं और उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट से उन्हें डाउनलोड कर सकते हैं।
परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को एडमिट कार्ड के साथ वैध फोटो पहचान पत्र ले जाना अनिवार्य होगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचना जरूरी है, क्योंकि देर से पहुंचने वालों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

क्या चरणबद्ध परिणाम से बढ़ेगी नाराजगी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि आयोग पांच विषयों का मूल्यांकन पहले करता है और उन्हीं के परिणाम जारी करता है, तो बाकी विषयों के उम्मीदवारों में नाराजगी बढ़ सकती है। इससे आयोग पर दबाव भी बनेगा कि वह शेष विषयों का मूल्यांकन जल्द पूरा करे।
हालांकि दूसरी ओर कुछ लोग यह भी मानते हैं कि यदि आयोग सीमित विषयों से शुरुआत करता है, तो इससे भर्ती प्रक्रिया कम से कम आंशिक रूप से आगे बढ़ेगी और कुछ कॉलेजों में रिक्तियां भरने का रास्ता खुलेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आयोग जल्द ही उन पांच विषयों की सूची सार्वजनिक करेगा, जिनका मूल्यांकन पहले होना है। यदि ऐसा होता है, तो इससे अभ्यर्थियों को अपनी स्थिति समझने में मदद मिलेगी और अनिश्चितता कुछ हद तक कम होगी।

अभ्यर्थियों की निगाह अब आयोग की अगली घोषणा पर
री-एग्जाम की तारीख सामने आने और एडमिट कार्ड जारी होने के बाद अब उम्मीदवारों की नजर केवल परीक्षा पर नहीं, बल्कि उसके बाद की मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी टिकी हुई है। सभी को इंतजार है कि आयोग कब और किस क्रम में परिणाम जारी करेगा।
यदि आयोग पारदर्शी तरीके से समयबद्ध कार्यक्रम जारी करता है, तो इससे अभ्यर्थियों का भरोसा मजबूत होगा। लेकिन यदि मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अस्पष्टता बनी रहती है, तो यह भर्ती एक बार फिर विवादों में घिर सकती है।
फिलहाल इतना तय है कि उत्तर प्रदेश की सहायक प्रोफेसर भर्ती केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि हजारों युवाओं के करियर, उच्च शिक्षा संस्थानों की जरूरत और सरकार की भर्ती व्यवस्था की साख से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुकी है।

Geeta Singh
Geeta Singh

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