क्या खत्म होगा युद्ध? इस्लामाबाद में आज शुरू हो रही US-ईरान शांति वार्ता
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संवाद 24 नई दिल्ली। दुनिया की नजरें आज पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हुई हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच बहुप्रतीक्षित शांति वार्ता शुरू होने जा रही है। हाल ही में हुए भीषण संघर्ष और तनावपूर्ण हालात के बीच यह बातचीत दोनों देशों के बीच स्थायी शांति की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। करीब छह सप्ताह तक चले संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच एक अस्थायी युद्धविराम लागू हुआ था, जिसे अब स्थायी समझौते में बदलने की कोशिश की जा रही है। हालांकि यह सीजफायर बेहद नाजुक माना जा रहा है और कई मुद्दे अब भी विवादित बने हुए हैं।
तनाव के बीच वार्ता की शुरुआत
इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पूरे शहर को लगभग किले में तब्दील कर दिया गया है और उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडलों की आवाजाही पर विशेष नजर रखी जा रही है। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हो रहे हैं।
सबसे बड़ा मुद्दा: लेबनान और होर्मुज
इस शांति वार्ता में कई जटिल मुद्दों पर चर्चा होने वाली है –
लेबनान में जारी संघर्ष और उसकी स्थिति
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Hormuz) पर नियंत्रण
ईरान का परमाणु कार्यक्रम
अमेरिकी प्रतिबंधों में राहत
इनमें से सबसे बड़ा विवाद लेबनान को लेकर है। ईरान चाहता है कि वहां भी पूरी तरह युद्धविराम लागू हो, जबकि इजराइल के हमले जारी रहने से बातचीत पर खतरा मंडरा रहा है।
असफलता की स्थिति में युद्ध का खतरा
वार्ता शुरू होने से पहले ही अमेरिका ने कड़ा रुख दिखाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि बातचीत असफल होती है, तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास अब भी बना हुआ है, जिससे किसी ठोस समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।
पाकिस्तान की बड़ी कूटनीतिक भूमिका
इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की भूमिका बेहद अहम रही है। उसने ही दोनों देशों के बीच प्रारंभिक युद्धविराम कराने में मध्यस्थता की थी और अब वही इस ऐतिहासिक वार्ता की मेजबानी कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह वार्ता सफल होती है तो न केवल मध्य पूर्व में शांति स्थापित हो सकती है, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ेगा।
दुनिया की उम्मीदें जुड़ीं
यह वार्ता सिर्फ दो देशों के बीच बातचीत नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। अगर समझौता होता है तो यह आने वाले समय में बड़े युद्ध को टाल सकता है, लेकिन असफलता की स्थिति में हालात और भी बिगड़ सकते हैं। फिलहाल पूरी दुनिया इस्लामाबाद से आने वाली हर खबर पर नजर बनाए हुए है – क्योंकि यहीं से तय होगा कि आने वाले दिनों में शांति होगी या फिर तनाव और बढ़ेगा।






