
आचार्य मधुसूदन अग्निहोत्री (वैदिक ज्योतिष, कर्मकांड एवं धर्मनिर्णय विशेषज्ञ)।
वैदिक पंचांग
अंग्रेजी दिनांक – 8 अप्रैल 2026, बुधवार
कालगणना
सृष्टि संवत् – 1,95,58,85,127
युगाव्द – 5128
युधिष्ठिर संवत् – 5127
विक्रम संवत् – 2083
शक संवत् – 1948
सम्वत्सर – रौद्र
अयन – उत्तरायण
ऋतु – वसंत
मास, पक्ष एवं वार विवरण
मास – वैशाख
पक्ष – कृष्ण
तिथि – षष्ठी सायं 05:40 तक, तत्पश्चात् सप्तमी
वार – बुधवार
नक्षत्र, योग एवं करण
नक्षत्र – मूल सुबह 06:14 तक, तत्पश्चात् पूर्वाषाढ़ा
योग – परिघ सायं 05:15 तक, तत्पश्चात् शिव
करण – वणिज सुबह 05:12 तक, तत्पश्चात् विष्टि (भद्रा) सायं 05:40 तक चंद्र गोचर
चन्द्रमा – धनु राशि (पूरा दिन)
सूर्य, काल एवं मुहूर्त (फर्रुखाबाद स्थानीय समय)
सूर्योदय – 06:08
सूर्यास्त – 06:47
अभिजित मुहूर्त – कोई नहीं (बुधवार होने के कारण)
निशिता मुहूर्त – रात्रि 12:05 से 12:57 तक (9 अप्रैल)
राहुकाल – दोपहर 12:28 से 02:02 तक
दिशाशूल – उत्तर दिशा में (बुधवार होने के कारण)
विशेष – गण्डमूल नक्षत्र (सुबह 06:14 तक)
व्रत-पर्व विवरण
आज वैशाख कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। बुधवार का दिन भगवान गणेश और बुध देव की उपासना के लिए समर्पित है। आज भद्रा सायं 05:40 तक रहेगी, अतः शुभ कार्यों के संपादन में समय का ध्यान रखें। वैशाख मास में प्याऊ लगवाना और सत्तू का दान करना शास्त्रों में परम फलदायी बताया गया है।
विशेष जानकारी
चन्द्रमा आज मंगल की राशि से निकलकर गुरु की राशि धनु में संचरण कर रहे हैं। सुबह 06:14 के बाद केतु के नक्षत्र मूल की समाप्ति होकर शुक्र का नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा प्रारंभ होगा। आज का दिन व्यापारिक चर्चाओं, बौद्धिक विमर्श और शिक्षा से जुड़े कार्यों के लिए उत्तम है।

आज का राशिफल 8 अप्रैल 2026, बुधवार
मेष (चू, चे, चो, ला, ली, लू, ले, लो, अ)
भाग्य में वृद्धि होगी। अटके हुए सरकारी कार्य पूर्ण होंगे। पिता का सहयोग व्यापार में नई दिशा देगा। धार्मिक यात्रा की योजना बन सकती है।
उपाय – भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करें।
वृषभ (ई, ऊ, ए, ओ, वा, वी, वू, वे, वो)
आज स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहें। आकस्मिक खर्चों से बजट बिगड़ सकता है। वाणी पर नियंत्रण रखें, अन्यथा विवाद बढ़ सकता है। दोपहर के बाद स्थिति में सुधार होगा।
उपाय – पक्षियों को सप्तधान्य खिलाएं।
मिथुन (का, की, कू, घ, ङ, छ, के, को, ह)
दाम्पत्य जीवन सुखद रहेगा। व्यापार में नए अनुबंध मिल सकते हैं। आपकी कार्यशैली की प्रशंसा होगी। अविवाहितों के लिए विवाह चर्चा आगे बढ़ सकती है।
उपाय – भगवान गणेश को मूंग के लड्डू का भोग लगाएं।
कर्क (ही, हू, हे, हो, डा, डी, डू, डे, डो)
शत्रु सक्रिय रहेंगे लेकिन आपका अहित नहीं कर पाएंगे। नौकरीपेशा जातकों को कार्यभार अधिक मिल सकता है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह न रहें।
उपाय – शिव चालीसा का पाठ करें।
सिंह (मा, मी, मू, मे, मो, टा, टी, टू, टे)
संतान की ओर से प्रसन्नता प्राप्त होगी। शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि मिल सकती है। आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मित्रों के साथ समय बीतेगा।
उपाय – सूर्य नारायण को अर्घ्य दें और लाल चंदन का तिलक लगाएं।
कन्या (टो, पा, पी, पू, ष, ण, ठ, पे, पो)
पारिवारिक सुख बढ़ेगा। भूमि-भवन के क्रय का विचार बन सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी बुद्धि और कौशल की सराहना होगी। माता का आशीर्वाद लें।
उपाय – गाय को हरा चारा खिलाएं।
तुला (रा, री, रू, रे, रो, ता, ती, तू, ते)
साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होगी। भाई-बहनों का सहयोग प्राप्त होगा। व्यापारिक यात्रा सफल रहेगी। संचार माध्यमों से शुभ समाचार मिलेगा।
उपाय – ‘ॐ बुं बुधाय नमः’ का जाप करें।
वृश्चिक (तो, ना, नी, नू, ने, नो, या, यी, यू)
धन लाभ के प्रबल योग हैं। परिवार में मांगलिक चर्चा हो सकती है। आपकी वाणी का जादू आज लोगों पर चलेगा। निवेश के लिए समय अनुकूल है।
उपाय – हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
धनु (ये, यो, भा, भी, भू, ध, फा, ढा, भे)
मानसिक शांति का अनुभव होगा। व्यक्तित्व में निखार आएगा। सोचे हुए कार्य समय पर पूरे होंगे। सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी।
उपाय – मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं।
मकर (भो, जा, जी, खी, खू, खा, खो, गा, गी)
आज खर्चों पर नियंत्रण रखना अनिवार्य है। व्यर्थ की भागदौड़ से बचें। शाम के बाद व्यापार में कोई सुखद अवसर मिल सकता है। विदेश संबंधी कार्यों में प्रगति होगी।
उपाय – शनि मंदिर में दीप जलाएं।
कुंभ (गु, गे, गो, सा, सी, सू, से, सो, दा)
आय के नए स्रोत बनेंगे। पुराने मित्रों से लाभ मिलेगा। व्यापार में विस्तार की योजनाएं सफल होंगी। महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति का दिन है।
उपाय – गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ करें।
मीन (दी, दू, थ, झ, ञ, दे, दो, चा, ची)
कार्यक्षेत्र में आपकी धाक जमेगी। पिता के सहयोग से बड़ा लाभ होगा। राजकीय कार्यों में सफलता मिलेगी। नई जिम्मेदारी मिलने के योग हैं।
उपाय – भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें।

