हॉर्मुज संकट पर टला बड़ा फैसला: संयुक्त राष्ट्र में मतभेद, अगले हफ्ते होगी अहम वोटिंग
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संवाद 24 नई दिल्ली। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर होने वाली अहम वोटिंग को टाल दिया है। पहले यह मतदान तुरंत होने वाला था, लेकिन अब इसे अगले सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।
क्या है पूरा मामला?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से लगभग 20% वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। मौजूदा युद्ध के चलते इस मार्ग पर आवागमन लगभग ठप हो चुका है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।
वोटिंग क्यों टली?
राजनयिक सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा परिषद के भीतर इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं। खासकर चीन और रूस जैसे स्थायी सदस्य देशों ने सैन्य बल के इस्तेमाल को लेकर कड़ा विरोध जताया है, जिसके कारण निर्णय टालना पड़ा।
क्या था प्रस्ताव में?
बहरीन द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में समुद्री जहाजों की सुरक्षा के लिए “रक्षात्मक उपायों” को मंजूरी देने की बात कही गई थी। शुरुआती ड्राफ्ट में बल प्रयोग की अनुमति भी शामिल थी, लेकिन विरोध के बाद इसे नरम किया गया।
अगले हफ्ते क्या होगा?
अब उम्मीद जताई जा रही है कि अगले सप्ताह इस पर फिर से चर्चा होगी और वोटिंग कराई जाएगी। हालांकि अभी तक कोई निश्चित तारीख तय नहीं की गई है, जिससे यह साफ है कि मामला अभी भी जटिल बना हुआ है।
ईरान की चेतावनी ने बढ़ाया तनाव
इस बीच ईरान ने संयुक्त राष्ट्र को चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की “उकसाने वाली कार्रवाई” हालात को और बिगाड़ सकती है। ईरान पहले ही इस जलमार्ग पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
दुनिया पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हॉर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बाधित रहा, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों, व्यापार और खाद्य आपूर्ति पर पड़ेगा। पहले ही तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा जा चुका है।
बढ़ती जा रही कूटनीतिक चुनौती
संयुक्त राष्ट्र के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह सभी देशों को एक मंच पर लाकर समाधान निकाल सके। लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए यह आसान नहीं लग रहा है।
आने वाले फैसले पर टिकी दुनिया की नजर
अब पूरी दुनिया की नजर अगले हफ्ते होने वाली संभावित वोटिंग पर टिकी है। यह फैसला तय करेगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय मिलकर इस संकट को संभाल पाएगा या फिर हालात और बिगड़ेंगे।






