
संवाद 24 डेस्क। भारत में शिक्षक बनने की राह पहले ही कठिन मानी जाती रही है, लेकिन वर्ष 2026 में आयोजित केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) के परिणामों ने इस कठिनाई को और स्पष्ट कर दिया है। इस परीक्षा में लगभग 75% अभ्यर्थियों का असफल होना केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि देश की शिक्षा प्रणाली, शिक्षक प्रशिक्षण और भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिन्ह है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में लाखों उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया, लेकिन केवल लगभग 25-26% ही सफल हो सके। यह स्थिति न केवल अभ्यर्थियों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि उन शिक्षकों के लिए भी खतरे की घंटी है जिनकी नौकरी CTET या TET योग्यता पर निर्भर है।
CTET क्या है और क्यों है अनिवार्य?
CTET (Central Teacher Eligibility Test) भारत में शिक्षक बनने के लिए एक न्यूनतम योग्यता परीक्षा है। यह परीक्षा प्राथमिक (कक्षा 1-5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6-8) स्तर के शिक्षकों के लिए अनिवार्य है।
सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सरकारी और कई निजी स्कूलों में नियुक्ति के लिए CTET या राज्य स्तरीय TET पास होना जरूरी है। इसका मतलब है कि CTET में असफल होना सीधे तौर पर नौकरी के अवसरों को प्रभावित करता है।
आंकड़ों की हकीकत: कितने पास, कितने फेल
CTET 2026 के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं:
कुल परीक्षार्थी: लगभग 23 लाख
पास उम्मीदवार: करीब 5.9 लाख
कुल सफलता दर: लगभग 25.7%
असफल उम्मीदवार: लगभग 75%
पेपर-1 (प्राइमरी स्तर) में सफलता दर अपेक्षाकृत बेहतर रही, जबकि पेपर-2 (उच्च प्राथमिक स्तर) में पास प्रतिशत और कम रहा। यह स्पष्ट करता है कि परीक्षा का स्तर और प्रतिस्पर्धा दोनों बेहद ऊंचे हैं।
कटऑफ और क्वालिफाइंग मार्क्स: कितनी है पास होने की शर्त
CTET में पास होने के लिए न्यूनतम अंक निर्धारित हैं:
सामान्य वर्ग: 60% (90/150 अंक)
OBC/SC/ST/PwD: 55% (82/150 अंक)
यह परीक्षा “क्वालिफाइंग” प्रकृति की होती है, यानी इसमें केवल न्यूनतम अंक प्राप्त करना जरूरी है, लेकिन वास्तविक नौकरी के लिए प्रतिस्पर्धा इससे कहीं अधिक कठिन होती है।
इतने बड़े स्तर पर असफलता के कारण
. परीक्षा का बढ़ता कठिन स्तर
विशेषज्ञों के अनुसार CTET में अब केवल रटने से काम नहीं चलता।
कॉन्सेप्ट क्लियर होना जरूरी है
चाइल्ड डेवलपमेंट और पेडागॉजी (CDP) सबसे कठिन सेक्शन माना जा रहा है
. अभ्यर्थियों की संख्या में भारी वृद्धि
2026 में लगभग 26 लाख पंजीकरण हुए, जो एक रिकॉर्ड है। ज्यादा उम्मीदवार = ज्यादा प्रतिस्पर्धा = कम सफलता दर
. तैयारी का स्तर
कई उम्मीदवार केवल औपचारिक तैयारी के साथ परीक्षा में बैठते हैं, जबकि परीक्षा अब विश्लेषणात्मक और अनुप्रयोग आधारित हो गई है।
. प्रशिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता
देश में कई B.Ed. और D.El.Ed. संस्थानों की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं, जिससे शिक्षक बनने वाले अभ्यर्थियों की बुनियाद कमजोर रह जाती है।
शिक्षकों की नौकरी पर संकट क्यों?
CTET केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि नौकरी की पात्रता का आधार है।
कई राज्यों में पहले से कार्यरत संविदा या अस्थायी शिक्षकों को भी TET/CTET पास करना अनिवार्य किया गया है। यदि वे निर्धारित समय में पास नहीं करते, तो नौकरी पर संकट आ सकता है।
इसलिए 75% असफलता का मतलब है:
लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अनिश्चित
पहले से कार्यरत शिक्षकों पर दबाव
भर्ती प्रक्रिया में देरी
क्या यह शिक्षा प्रणाली की विफलता है?
यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है।
यदि बड़ी संख्या में उम्मीदवार लगातार फेल हो रहे हैं, तो इसका अर्थ केवल उनकी कमजोरी नहीं, बल्कि सिस्टम की खामियां भी हो सकती हैं:
शिक्षक प्रशिक्षण में कमी
पाठ्यक्रम और परीक्षा के बीच अंतर
व्यावहारिक ज्ञान की कमी
डिजिटल और आधुनिक शिक्षण पद्धति का अभाव
सरकार और CBSE की भूमिका
CBSE ने परीक्षा को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं:
परीक्षा को दो दिनों में आयोजित करना
डिजिटल स्कोरकार्ड और DigiLocker सुविधा
उत्तर कुंजी पर आपत्ति दर्ज करने की व्यवस्था
लेकिन अब जरूरत है कि:
प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुधारी जाए
परीक्षा पैटर्न को संतुलित बनाया जाए
ग्रामीण और कमजोर पृष्ठभूमि के अभ्यर्थियों को सहायता मिले
अभ्यर्थियों के लिए क्या हैं विकल्प?
. दोबारा परीक्षा देना
CTET साल में दो बार आयोजित होती है, इसलिए उम्मीदवार पुनः प्रयास कर सकते हैं।
. राज्य स्तरीय TET
कई राज्यों की अपनी TET परीक्षाएं होती हैं, जिनमें प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम हो सकती है।
. निजी स्कूलों में अवसर
कुछ निजी स्कूल CTET को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन अनिवार्यता नहीं रखते।
विशेषज्ञों की राय: क्या बदलना जरूरी है
शिक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि समाधान केवल परीक्षा कठिन बनाने में नहीं, बल्कि तैयारी के स्तर को सुधारने में है:
शिक्षक प्रशिक्षण को प्रैक्टिकल बनाया जाए
डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा दिया जाए
स्कूल स्तर पर शिक्षण कौशल विकसित किया जाए
निरंतर मूल्यांकन प्रणाली लागू हो
एक चेतावनी, एक अवसर
CTET 2026 का परिणाम भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए एक चेतावनी है। 75% अभ्यर्थियों का असफल होना यह संकेत देता है कि हमें शिक्षक शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और भर्ती प्रक्रिया को नए सिरे से देखने की जरूरत है। यह केवल असफलता की कहानी नहीं, बल्कि सुधार का अवसर भी है। यदि सही कदम उठाए जाएं, तो यह संकट भविष्य में एक मजबूत और सक्षम शिक्षक वर्ग तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।






