महंगाई का नया झटका: 1 अप्रैल से कमर्शियल गैस सिलेंडर महंगा, कारोबारियों पर बढ़ा बोझ
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संवाद 24 नई दिल्ली। नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही आम लोगों और खासकर कारोबारियों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। 1 अप्रैल से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम में करीब 195.50 रुपये तक का इजाफा किया है, जिससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यवसायों की लागत बढ़ना तय माना जा रहा है।
एक महीने में दूसरी बार बढ़े दाम
गौर करने वाली बात यह है कि यह बढ़ोतरी अचानक नहीं हुई है, बल्कि पिछले एक महीने में दूसरी बार कीमतों में इजाफा किया गया है। इससे पहले मार्च में भी सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए थे। लगातार हो रही इस वृद्धि ने व्यापारियों और छोटे दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी है। नई दरों के लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर अब लगभग 2078.50 रुपये में मिलेगा। अन्य महानगरों में भी कीमतों में इसी तरह का इजाफा देखा गया है, जिससे पूरे देश में कारोबार की लागत पर असर पड़ रहा है।
घरेलू उपभोक्ताओं को राहत
हालांकि इस बढ़ोतरी के बीच एक राहत की बात यह है कि घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। 14.2 किलो वाला घरेलू सिलेंडर पहले की तरह ही पुराने दाम पर उपलब्ध रहेगा। इससे आम घरों पर सीधा असर फिलहाल नहीं पड़ेगा, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अप्रत्यक्ष रूप से इसका असर खाने-पीने की चीजों के दाम पर दिख सकता है।
वैश्विक कारणों से बढ़ी कीमतें
जानकारों के अनुसार इस मूल्य वृद्धि के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी प्रमुख कारण है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और आपूर्ति में बाधा के चलते ऊर्जा की लागत बढ़ गई है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर साफ दिख रहा है। भारत अपनी गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक हालात सीधे तौर पर घरेलू बाजार को प्रभावित करते हैं। यही वजह है कि हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय दरों के आधार पर कीमतों की समीक्षा करती हैं।
रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों पर असर
कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने का सबसे ज्यादा असर होटल, ढाबा, कैटरिंग और छोटे फूड बिजनेस पर पड़ता है। इन कारोबारों में गैस का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए लागत बढ़ने से मुनाफा घट सकता है या फिर ग्राहकों पर कीमतों का बोझ डाला जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में चाय, नाश्ता और बाहर खाने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। पहले से ही कई शहरों में गैस की कमी और महंगाई के चलते खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में उछाल देखा जा चुका है।
आम लोगों पर अप्रत्यक्ष असर
हालांकि घरेलू सिलेंडर की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन कमर्शियल गैस महंगी होने से आम जनता भी इससे अछूती नहीं रहेगी। होटल और रेस्टोरेंट अपने खर्च को संतुलित करने के लिए मेन्यू के दाम बढ़ा सकते हैं, जिससे आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। इसके अलावा, छोटे उद्योग और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स भी प्रभावित होंगे, जिससे बाजार में कई उत्पाद महंगे हो सकते हैं।
आगे क्या हो सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। हालांकि सरकार और तेल कंपनियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और जरूरत पड़ने पर राहत देने के विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है। फिलहाल, नए वित्त वर्ष की शुरुआत महंगाई के इस झटके के साथ हुई है, जिसने कारोबारियों और उपभोक्ताओं दोनों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है।






