LPG संकट गहराया: मैसेज आ रहा, लेकिन सिलेंडर नहीं! उपभोक्ता परेशान

उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में रसोई गैस संकट लगातार बना हुआ है। प्रशासन और पूर्ति विभाग द्वारा सप्लाई सुचारू होने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गैस बुकिंग के बाद उपभोक्ताओं के मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज तो पहुंच रहा है, लेकिन वास्तविकता में सिलेंडर की डिलीवरी नहीं हो पा रही है।

मैसेज मिला, गैस नहीं”—एजेंसियों के चक्कर काट रहे लोग

स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि उन्हें गैस बुकिंग के बाद डिलीवरी का कन्फर्मेशन मैसेज मिल जाता है, लेकिन कई दिनों तक सिलेंडर घर नहीं पहुंचता। मजबूरी में लोग गैस एजेंसियों और गोदामों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इससे आम जनता में आक्रोश और असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

कालाबाजारी के आरोप, व्यवस्था पर उठे सवाल

स्थिति को और गंभीर बनाते हुए उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसियों के कुछ कर्मचारियों पर कालाबाजारी के आरोप लगाए हैं। आरोप है कि बिना सिलेंडर दिए ही डिलीवरी का मैसेज भेज दिया जाता है, जिससे रिकॉर्ड में सप्लाई दिखती रहे। यह मामला गैस वितरण व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है।

व्यावसायिक गैस संकट से ठप होती रोजी-रोटी

रसोई गैस ही नहीं, व्यावसायिक गैस की कमी ने छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट वेंडरों की कमर तोड़ दी है। कई दुकानदार अब गैस के अभाव में भट्ठी (कोयले/लकड़ी) का सहारा लेकर काम चला रहे हैं। कचौड़ी, समोसा, चाय जैसे रोजमर्रा के व्यवसाय प्रभावित हो रहे हैं, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय संकट का स्थानीय असर

विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, खासकर इजरायल-ईरान संघर्ष का असर ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा है। इससे गैस की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिसका असर देश के कई हिस्सों में देखने को मिल रहा है।

प्रशासन का पक्ष: “सप्लाई सामान्य, भीड़ KYC की”

जिला पूर्ति अधिकारी का कहना है कि जिले में गैस सप्लाई सामान्य है और एजेंसियों पर भीड़ मुख्यतः केवाईसी और मोबाइल नंबर अपडेट कराने वालों की है। हालांकि उपभोक्ताओं की शिकायतें इस दावे से मेल नहीं खातीं, जिससे स्थिति पर सवाल बने हुए हैं।

भरोसे और व्यवस्था के बीच फंसा उपभोक्ता

पूरे मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित आम उपभोक्ता है, जो सिस्टम और वास्तविकता के बीच फंसा हुआ है। एक ओर सरकारी दावे हैं, दूसरी ओर जमीनी संकट। यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

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