योगी पर अखिलेश का बड़ा हमला ‘धुरंधर से भी बड़े धुरंधर’, LPG से लेकर AI MoU तक उठे सवाल
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा हमला बोला।उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “योगी जी तो धुरंधर से भी बड़े धुरंधर हैं, हमारी विधायक को गुमराह कर ले गए, अब बताइए FIR कहां लिखवाऊं?”
यह बयान विधायक पूजा पाल के पार्टी बदलने के संदर्भ में दिया गया, जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
विधायक के पाला बदलने पर सपा की सफाई
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि संबंधित विधायक को पहले महिला होने के कारण पार्टी से नहीं निकाला गया था, लेकिन परिस्थितियों के चलते कार्रवाई करनी पड़ी।उन्होंने आरोप लगाया कि अब टिकट पाने की लालसा में बयानबाजी की जा रही है।राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मुद्दा आगामी चुनावों से पहले दल-बदल की राजनीति को और तेज कर सकता है।
LPG संकट पर सरकार घिरी, ‘लाइन में लगाने वाली सरकार’ का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने LPG गैस की कथित कमी को लेकर सरकार को घेरा।उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार केवल जनता को लाइन में खड़ा करना जानती है और सिलेंडर के वजन में कमी कर दी गई है।उन्होंने व्यंग्य में कहा कि उन्होंने खुद मिट्टी के चूल्हे खरीद लिए हैं और भविष्य में लकड़ी-कोयले पर निर्भर रहना पड़ सकता है।यह बयान आम जनता की बढ़ती महंगाई और संसाधनों की उपलब्धता को लेकर चिंता को दर्शाता है।
25 हजार करोड़ के AI MoU पर उठाए गंभीर सवाल
अखिलेश यादव ने राज्य सरकार के AI निवेश समझौतों (MoU) पर भी सवाल उठाए।उनका आरोप है कि जिन कंपनियों के साथ हजारों करोड़ के समझौते किए गए हैं, उनकी वास्तविक वित्तीय स्थिति बेहद कमजोर है।उन्होंने मांग की कि सभी MoU की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि निवेश की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।
राजनीतिक संदेश: ‘पहले यूपी से भाजपा का सफाया’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में सपा प्रमुख ने भाजपा पर सीधा हमला करते हुए कहा कि देश की राजनीति का रास्ता उत्तर प्रदेश से होकर जाता है, इसलिए पहले यूपी से भाजपा को हटाना जरूरी है।उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक मुद्दों को भी छुआ और आरोप लगाया कि कुछ मामलों में परंपराओं का सम्मान नहीं किया गया।
विश्लेषण: चुनावी माहौल में बयानबाजी तेज
राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयानबाजी आगामी चुनावों की तैयारी का हिस्सा है।जहां एक ओर सपा सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा अपने विकास कार्यों और कानून-व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बना रही है।प्रदेश की राजनीति फिलहाल आरोप-प्रत्यारोप के दौर में प्रवेश कर चुकी है, जिसका सीधा असर आने वाले चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।






