दहेज की मांग बनी मौत का कारण: 18 साल बाद मिला इंसाफ
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कायमगंज थाना क्षेत्र में चर्चित दहेज हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (त्वरित न्यायालय संख्या-01) संजय कुमार ने पति समेत तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए सात-सात वर्ष के कारावास और छह हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना अदा न करने पर दो माह के अतिरिक्त कारावास का भी प्रावधान किया गया है।
शादी के बाद शुरू हुआ प्रताड़ना का सिलसिला
मामले के अनुसार, कोतवाली कायमगंज के गांव अताईपुर जदीद निवासी राजेश कुमार ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बताया था कि उनकी बेटी रिंकी की शादी 3 फरवरी 2005 को रायपुर खास निवासी बबलू के साथ हुई थी। शादी के कुछ समय बाद ही ससुराल पक्ष द्वारा दहेज में 20 हजार रुपये, रंगीन टीवी और भैंस की मांग की जाने लगी। दहेज की मांग पूरी न होने पर रिंकी को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता रहा, जिससे उसका वैवाहिक जीवन कष्टमय हो गया।
जहर देकर हत्या का आरोप
अभियोग के मुताबिक, 10 जून 2007 को आरोपियों ने दहेज की मांग पूरी न होने पर रिंकी को जहर देकर मौत के घाट उतार दिया। घटना के बाद तत्काल पुलिस कार्रवाई न होने पर पीड़ित पिता को न्याय के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ा।
अदालत के आदेश पर दर्ज हुई FIR
सीजेएम कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने पति बबलू उर्फ प्रमोद कुमार उर्फ विनोद कुमार, देवर प्रदीप कुमार, ससुर प्रेमचंद्र और सास हीरा देवी के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच पूरी होने के बाद आरोप पत्र अदालत में दाखिल किया गया।सुनवाई के दौरान ससुर प्रेमचंद्र की मृत्यु हो जाने के कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई समाप्त कर दी गई।
गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर फैसला
अभियोजन पक्ष ने मृतका के माता-पिता सहित कुल आठ गवाह पेश किए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट, पंचायतनामा, एफआईआर समेत अन्य दस्तावेज अदालत में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए गए। दोनों पक्षों की दलीलों, गवाहों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों का गहन परीक्षण करने के बाद अदालत ने पति समेत तीन आरोपियों को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।
न्याय में देरी, लेकिन फैसला सख्त
करीब 18 साल पुराने इस मामले में अदालत का यह फैसला दहेज प्रथा के खिलाफ एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। यह निर्णय दर्शाता है कि भले ही न्याय में समय लगे, लेकिन दोषियों को सजा से बचाया नहीं जा सकता।






