UPTET में बीएड को लेकर फिर बढ़ा विवाद: क्या है सुप्रीम कोर्ट का फैसला और क्यों उलझा प्राथमिक स्तर का मामला?
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संवाद 24 डेस्क। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) को एक बार फिर से भ्रम की स्थिति बन गई है। खासकर प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) की परीक्षा में B.Ed अभ्यर्थियों को शामिल करने या न करने को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। हाल के वर्षों में सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की गाइडलाइन और विभिन्न राज्यों की भर्ती प्रक्रियाओं ने इस विषय को जटिल बना दिया है। ऐसे में लाखों अभ्यर्थी यह जानना चाहते हैं कि आखिर प्राथमिक शिक्षक भर्ती में B.Ed मान्य है या नहीं, और UPTET पर इसका क्या असर पड़ेगा।
प्राथमिक शिक्षक भर्ती का मूल नियम क्या कहता है?
भारत में प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के शिक्षक बनने के लिए न्यूनतम योग्यता का निर्धारण राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) द्वारा किया जाता है। RTE Act, 2009 की धारा 23 के अनुसार, प्राथमिक शिक्षकों के लिए विशेष प्रशिक्षण आवश्यक है, जिसमें सामान्यतः निम्न योग्यता शामिल होती है-
12वीं के बाद Diploma in Elementary Education (D.El.Ed / BTC)
इसके बाद TET / UPTET / CTET जैसी पात्रता परीक्षा
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अन्य शर्तें सुप्रीम कोर्ट ने भी कई मामलों में कहा है कि प्राथमिक स्तर के बच्चों को पढ़ाने के लिए विशेष प्रकार का प्रशिक्षण जरूरी होता है, जो सामान्य B.Ed पाठ्यक्रम से अलग होता है।
B.Ed को प्राथमिक स्तर में शामिल करने का विवाद कैसे शुरू हुआ?
2018 में केंद्र सरकार के निर्देश के बाद NCTE ने एक नोटिफिकेशन जारी कर B.Ed डिग्री धारकों को भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए पात्र मान लिया था। इस फैसले का कई राज्यों में विरोध हुआ क्योंकि D.El.Ed धारकों का कहना था कि प्राथमिक स्तर की शिक्षा के लिए अलग प्रशिक्षण होता है। मामला अदालत तक पहुंचा और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने इस पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: B.Ed प्राथमिक शिक्षा के लिए उपयुक्त नहीं
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम निर्णय देते हुए कहा कि:
B.Ed को प्राथमिक शिक्षक के लिए आवश्यक योग्यता नहीं माना जा सकता प्राथमिक स्तर पर पढ़ाने के लिए विशेष प्रशिक्षण जरूरी है केवल “उच्च डिग्री” होने से व्यक्ति प्राथमिक शिक्षक बनने के योग्य नहीं हो जाता अदालत ने कहा कि प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने के लिए बच्चों की मनोवैज्ञानिक समझ और अलग प्रकार की शिक्षण पद्धति की जरूरत होती है, जो D.El.Ed प्रशिक्षण में दी जाती है, जबकि B.Ed मुख्यतः उच्च कक्षाओं के लिए होता है। इसी आधार पर 2018 का नोटिफिकेशन रद्द कर दिया गया।
UPTET पर इस फैसले का क्या असर पड़ा?
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई राज्यों में प्राथमिक शिक्षक भर्ती से B.Ed अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया गया। उत्तर प्रदेश में भी UPTET से जुड़े अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति बन गई क्योंकि पहले B.Ed उम्मीदवार भी परीक्षा में शामिल हो रहे थे।
एक रिपोर्ट के अनुसार, फैसले के बाद यह स्पष्ट हुआ कि प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए केवल D.El.Ed / BTC धारक ही पात्र होंगे, जिससे लाखों अभ्यर्थियों को राहत मिली और कई B.Ed उम्मीदवार प्रभावित हुए।
फिर क्यों पैदा हो रहा है नया भ्रम?
हाल के समय में कुछ भर्ती प्रक्रियाओं और विज्ञापनों में अलग-अलग नियम दिखाई देने लगे हैं। कुछ भर्तियों में B.Ed को प्राथमिक स्तर में शामिल नहीं किया गया कुछ में केवल उच्च प्राथमिक या TGT स्तर पर ही मान्यता दी गई कुछ मामलों में अदालतों में नई याचिकाएं दायर हुईं इसी कारण UPTET के नए नोटिफिकेशन को लेकर अभ्यर्थियों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या फिर से B.Ed को शामिल किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने नीति निर्धारण किसके हाथ में बताया?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि शिक्षक की योग्यता तय करना एक शैक्षणिक नीति का विषय है, और यह काम NCTE जैसी विशेषज्ञ संस्था का है। लेकिन यदि कोई निर्णय कानून या शिक्षा के उद्देश्य के खिलाफ होगा, तो अदालत हस्तक्षेप कर सकती है। यही कारण है कि B.Ed को प्राथमिक स्तर में शामिल करने के निर्णय को अदालत ने असंगत माना।
TET अनिवार्य होने से भी बढ़ा विवाद
एक अन्य फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि
कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए TET पास करना जरूरी है यह नियम पहले से नियुक्त शिक्षकों पर भी लागू हो सकता है इससे राज्यों में भर्ती नियमों को लेकर नई बहस शुरू हो गई।
उत्तर प्रदेश में क्यों ज्यादा असर?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा शिक्षा तंत्र वाला राज्य है, इसलिए यहां किसी भी नियम का असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ता है। UPTET, SUPER TET और शिक्षक भर्ती की बड़ी संख्या के कारण—
B.Ed अभ्यर्थी बड़ी संख्या में हैं
BTC / D.El.Ed अभ्यर्थी भी बड़ी संख्या में हैं
दोनों के बीच पात्रता को लेकर विवाद बार-बार उठता है
इसी वजह से हर बार सुप्रीम कोर्ट का फैसला सीधे UPTET से जुड़ जाता है।
क्या भविष्य में फिर बदल सकता है नियम?
विशेषज्ञों का मानना है कि नियम बदल सकते हैं, लेकिन इसके लिए तीन स्तरों पर निर्णय जरूरी होगा:
NCTE नई गाइडलाइन जारी करे
केंद्र सरकार उसे मंजूरी दे
अदालत उसे वैध माने
जब तक ऐसा नहीं होता, प्राथमिक शिक्षक भर्ती में B.Ed को शामिल करना मुश्किल माना जा रहा है।
अभ्यर्थियों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों की सलाह है कि अभ्यर्थी अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक नोटिफिकेशन देखें।
UPTET नोटिफिकेशन
NCTE गाइडलाइन
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
इन तीनों के आधार पर ही पात्रता तय होगी।
UPTET का विवाद अभी खत्म नहीं हुआ
B.Ed बनाम D.El.Ed का विवाद केवल उत्तर प्रदेश का नहीं बल्कि पूरे देश का मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने प्राथमिक स्तर पर विशेष प्रशिक्षण की आवश्यकता को स्पष्ट कर दिया है, लेकिन भर्ती नियमों में बदलाव और नई याचिकाओं के कारण भ्रम बना हुआ है। आने वाले समय में UPTET का नया नोटिफिकेशन ही तय करेगा कि प्राथमिक स्तर में कौन पात्र होगा और लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य किस दिशा में जाएगा।






