हिंदू धर्म के “सिमटने” पर संत समाज की चिंता: कन्नौज में महंत राजू दास का बड़ा बयान
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कन्नौज जिले के मानीमऊ गांव में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान महंत राजू दास ने हिंदू समाज और धर्माचार्यों की भूमिका पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि आज हिंदू धर्म के सिमटने की स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समाज और धर्मगुरु जागरूक नहीं हुए तो परंपराओं और धार्मिक संस्कारों का क्षरण तेज हो सकता है। यह बयान उन्होंने सनातन धर्म सेवा संस्थान की ओर से शुरू की जा रही आनंद जनजागरण यात्रा के शुभारंभ से पहले ध्वज पूजन के अवसर पर दिया।
“धर्म और परंपराओं से दूर हो रहा हिंदू समाज”
अपने संबोधन में महंत राजू दास ने कहा कि हिंदुस्तान में हिंदू समाज धीरे-धीरे अपनी धार्मिक जड़ों से दूर होता दिखाई दे रहा है। उनके अनुसार, कई लोग अपने धर्म और परंपराओं को भूलते जा रहे हैं, जिससे सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान कमजोर पड़ सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि एक तरफ ऐसे लोग हैं जो धर्म से विमुख हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में लोग ऐसे भी हैं जो अब भी सनातन धर्म के प्रति आस्था रखते हैं और उसे आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। महंत के अनुसार समाज के भीतर यह दोहरी स्थिति भविष्य के लिए गंभीर चिंतन का विषय है।
धर्माचार्यों की भूमिका पर उठाए सवाल
कार्यक्रम में बोलते हुए महंत राजू दास ने कुछ धर्माचार्यों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई धार्मिक नेता अपने मठ-मंदिरों तक सीमित होकर रह गए हैं और समाज के बीच जाकर धर्म के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास नहीं कर रहे।
उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि कुछ धर्माचार्य आरामदायक जीवन में सीमित होकर रह गए हैं, जबकि उन्हें समाज के बीच जाकर धार्मिक मूल्यों और परंपराओं के संरक्षण के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। महंत के अनुसार यदि संत समाज जनजागरण का कार्य करेगा तो धर्म और संस्कृति की जड़ें और मजबूत होंगी।
शादी-समारोहों में बदलती परंपराओं पर जताई चिंता
महंत राजू दास ने आधुनिक सामाजिक आयोजनों में बदलती प्रवृत्तियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज शादी-बारातों में डीजे, खान-पान और अन्य व्यवस्थाओं पर भारी खर्च किया जाता है, लेकिन जब वैदिक मंत्रोच्चारण करने वाले पंडितों को उचित दक्षिणा देने की बात आती है तो कई लोग असहज हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार विवाह संस्कार में मंत्र जल्दी पढ़ने का दबाव भी बनाया जाता है, जिससे धार्मिक अनुष्ठानों की गरिमा प्रभावित होती है और धीरे-धीरे परंपराएं कमजोर पड़ने लगती हैं।
जनजागरण की आवश्यकता पर जोर
महंत राजू दास ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में समाज और संतों दोनों को मिलकर जनजागरण का कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि धार्मिक शिक्षा, परंपराओं का पालन और संस्कारों का संरक्षण ही समाज को मजबूत बना सकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों और परिवारों को धर्म और संस्कृति से जोड़ें ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी परंपराओं को समझ सकें और उनका सम्मान कर सकें।
कई जनप्रतिनिधि और संत रहे मौजूद
मानीमऊ में आयोजित इस कार्यक्रम में कई धार्मिक और राजनीतिक हस्तियां भी उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में संत-समाज के प्रतिनिधियों के साथ क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
इस अवसर पर पंडित कौशल महाराज, कैलाश राजपूत और भाजपा जिलाध्यक्ष वीर सिंह भदौरिया सहित कई गणमान्य लोग मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और समाज में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी चर्चा की गई।






