मिसाइल ठिकानों पर प्रलय बनकर टूटे अमेरिकी बी-2 बमवर्षक: खाड़ी में 2500 मरीन सैनिकों की तैनाती से ईरान की पूर्ण घेराबंदी
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संवाद 24 नई दिल्ली । पश्चिम एशिया के सुलगते रेगिस्तान और फारस की खाड़ी के अशांत जलक्षेत्र में युद्ध के बादल अब और गहरे हो गए हैं। अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य रणनीति को बेहद आक्रामक मोड़ देते हुए खाड़ी क्षेत्र में 2500 जांबाज मरीन सैनिकों की तैनाती का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यह कदम केवल सैनिकों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके साथ ही दुनिया के सबसे घातक बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों ने ईरानी सीमा के भीतर घुसकर उसके सामरिक ठिकानों को तहस-नहस करना शुरू कर दिया है।
ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’: ईरान की कमर तोड़ने की तैयारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में शुरू हुआ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अब अपने सबसे निर्णायक चरण में पहुंच गया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि बी-2 स्टील्थ बमवर्षकों ने ईरान के भीतर उन संवेदनशील ठिकानों को निशाना बनाया है, जहाँ बैलिस्टिक मिसाइलों का उत्पादन और भंडारण किया जाता था। अमेरिका का उद्देश्य केवल तात्कालिक हमले रोकना नहीं है, बल्कि ईरान की उस क्षमता को ही जड़ से मिटाना है जिससे वह भविष्य में दोबारा सैन्य पुनर्निर्माण कर सके। इन हमलों ने ईरान की नौसेना और मिसाइल सुविधाओं को भारी क्षति पहुँचाई है।
2500 मरीन सैनिकों का ‘लोहे का घेरा’
फारस की खाड़ी में वैश्विक तेल आपूर्ति और ऊर्जा ढांचे पर मंडराते ईरानी खतरे को देखते हुए 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट (MEU) को तैनात किया गया है। जापान से भेजी गई इस यूनिट में ‘यूएसएस त्रिपोली’ जैसे तीन विशाल एम्फीबियस युद्धपोत शामिल हैं। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने स्पष्ट लहजे में कहा है कि अमेरिका हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। 2500 मरीन सैनिकों की यह मौजूदगी ईरान के समुद्री रास्तों पर एक अभेद्य दीवार की तरह खड़ी हो गई है।
तेहरान में धमाके और बढ़ता तनाव
इधर, तेहरान से आ रही खबरें विचलित करने वाली हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ‘कुद्स दिवस’ के मौके पर जब हजारों लोग अमेरिका और इजरायल विरोधी प्रदर्शनों के लिए जमा थे, तभी एक मुख्य चौक पर भीषण विस्फोट हुआ। हालांकि इस विस्फोट के कारणों पर स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसने क्षेत्र में दहशत फैला दी है। ईरान का दावा है कि संघर्ष की इस आग में अब तक उसके 1300 से अधिक नागरिक मारे जा चुके हैं, वहीं इजरायली हमलों में लेबनान के भीतर भी भारी तबाही हुई है।
युद्ध की भारी कीमत: इराक में अमेरिकी विमान हादसा
जंग की इस विभीषिका में अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ा है। पश्चिमी इराक में एक मिशन के दौरान अमेरिकी केसी-135 टैंकर विमान (KC-135 Tanker) दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें चालक दल के 6 सदस्य शहीद हो गए। इसके साथ ही ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ में जान गंवाने वाले अमेरिकी सैनिकों की संख्या 13 तक पहुंच गई है। तकनीकी खराबी या दुश्मन का हमला, इसकी जांच जारी है, लेकिन इस हादसे ने युद्ध की विभीषिका को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव कम नहीं हुआ, तो इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। फारस की खाड़ी दुनिया की ऊर्जा धमनियों में से एक है, और यहाँ अमेरिका की इतनी बड़ी सैन्य घेराबंदी संकेत देती है कि आने वाले दिन वैश्विक कूटनीति और अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।






