पानीपत की धरती पर संघ का महामंथन, शताब्दी वर्ष की उपलब्धियों और भविष्य की रणनीति पर होगा विचार-विमर्श
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संवाद 24 | विशेष रिपोर्ट
ऐतिहासिक पानीपत की भूमि, जो तीन युगान्तकारी युद्धों की साक्षी रही है, इस बार एक भिन्न किन्तु उतनी ही महत्त्वपूर्ण घटना की आतिथेय बनी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की सर्वोच्च निर्णायक इकाई अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) का वार्षिक अधिवेशन 13 से 15 मार्च 2026 तक समालखा स्थित ‘माधव सृष्टि परिसर’ में आयोजित हो रहा है। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब संघ अपने शताब्दी वर्ष का उत्सव मना रहा है और देशभर में ऐतिहासिक जन-संपर्क अभियानों के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक अपनी पहुँच सुनिश्चित कर चुका है।
पानीपत जिले के समालखा क्षेत्र का ग्रामविकास एवं सेवा साधना केन्द्र ‘माधव सृष्टि’, जो अपने प्राकृतिक वातावरण और सात्विक परिवेश के लिए जाना जाता है, इस बार देश के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन के सबसे बड़े निर्णायक मंच का केन्द्र बना है। यहाँ उठने वाले विचार और लिए जाने वाले निर्णय केवल एक संगठन की दिशा नहीं, अपितु देश के सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय जीवन की भावी रूपरेखा का निर्धारण भी करेंगे।
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा: संघ का सर्वोच्च मंच
संघ की संरचना में अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (ABPS) का स्थान वही है जो किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था में संसद का होता है। यह संघ की सबसे बड़ी निर्णय लेने वाली इकाई है। प्रतिवर्ष मार्च माह में आयोजित होने वाली यह बैठक अब तक केवल नागपुर तक सीमित थी, किन्तु 1988 के बाद से इसे देश के विभिन्न स्थानों पर आयोजित किया जाने लगा है।

इस वर्ष की बैठक विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह संघ के शताब्दी वर्ष (विजयादशमी 2025 से विजयादशमी 2026) के मध्य में आयोजित हो रही है। सरसंघचालक डॉ. मोहन राव भागवत और सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने 13 मार्च की प्रातः 9 बजे भारत माता के चित्र पर पुष्पार्चन कर बैठक का शुभारंभ किया। उद्घाटन समारोह में देशभर से आए संघ के शीर्ष नेतृत्व और प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस अवसर को और भी गरिमामयी बना दिया।
1487 प्रतिनिधि: देश का विशाल प्रतिनिधित्व
इस तीन दिवसीय महाअधिवेशन में देशभर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और संघ प्रेरित संगठनों के कुल 1487 प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इनमें संघ के अखिल भारतीय पदाधिकारी, विभिन्न क्षेत्रों और प्रांतों के संघचालक, कार्यवाह, प्रचारक और संघ प्रेरित 32 संगठनों के शीर्ष पदाधिकारी सम्मिलित हैं। इन 32 संगठनों में विश्व हिन्दू परिषद, भारतीय मजदूर संघ, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, स्वदेशी जागरण मंच, विद्या भारती आदि प्रमुख हैं।
संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने प्रेस वार्ता में बताया कि इस बैठक में सभी अखिल भारतीय पदाधिकारियों के अलावा क्षेत्र एवं प्रांत कार्यकारी मंडल के सभी सदस्य, संघ शिक्षा वर्ग के प्रशिक्षक तथा विभिन्न विभागों के प्रमुख भी उपस्थित रहेंगे। उत्तर क्षेत्र के संघचालक पवन जिंदल ने इस आयोजन को हरियाणा प्रांत के लिए गर्व का अवसर बताया।

शताब्दी वर्ष का लेखा-जोखा: 10 करोड़ से अधिक घरों तक पहुँच
बैठक का एक महत्वपूर्ण एजेंडा है, संघ के शताब्दी वर्ष कार्यक्रमों की समीक्षा। विजयादशमी 2025 से संघ अपने शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर चुका है और तब से देशभर में अभूतपूर्व जन-सम्पर्क अभियान चलाया गया है। बैठक की प्रेस वार्ता में खुलासा हुआ कि शताब्दी वर्ष में अब तक देशभर में 10 करोड़ से अधिक घरों तक गृह संपर्क अभियान के माध्यम से पहुँच बनाई जा चुकी है।
‘गृह संपर्क अभियान’ शताब्दी वर्ष का केन्द्रीय कार्यक्रम रहा। नवम्बर 2025 से प्रारम्भ इस अभियान में देशभर के लाखों स्वयंसेवक 20-20 और 50-50 की टोलियों में घर-घर गए। प्रत्येक घर में भारत माता का चित्र, संघ का साहित्य और ‘पंच परिवर्तन’ का पत्रक भेंट किया गया। यह विश्व का सबसे बड़ा घर-घर संपर्क अभियान बताया जा रहा है। ‘पंच परिवर्तन’ संघ के शताब्दी वर्ष का केंद्रीय संकल्प है जिसके पाँच सूत्रों को लेकर स्वयंसेवकों ने गाँव-गाँव, बस्ती-बस्ती जाकर समाज से संवाद स्थापित किया।
संगठनात्मक पुनर्गठन पर विचार
इस बैठक में संघ एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक बदलाव की संभावना पर भी विचार-विमर्श कर सकता है। सूत्रों के अनुसार, संघ अपनी वर्तमान प्रांत व्यवस्था में आमूल परिवर्तन की योजना पर विचार कर रहा है। वर्तमान में संघ के 45 प्रांत और 11 क्षेत्र हैं। प्रस्तावित पुनर्गठन के अंतर्गत प्रांत प्रचारक के स्थान पर संभाग प्रचारक की व्यवस्था लागू की जा सकती है। हालाँकि इस बदलाव को अंतिम रूप आगामी वर्ष 2027 में नागपुर में होने वाली अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में दिया जा सकता है। वर्तमान बैठक में इस प्रस्ताव पर गहन विचार-विमर्श अपेक्षित है। यह बदलाव संघ के विस्तार और कार्यकुशलता को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
संत रविदास जयंती और सामाजिक समरसता
बैठक के एजेंडे में एक अत्यंत महत्त्वपूर्ण सामाजिक विषय भी सम्मिलित है संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती। फरवरी 2025 से फरवरी 2026 तक चलने वाले इस वर्षव्यापी कार्यक्रम की समीक्षा और भावी योजनाओं पर चर्चा भी इस बैठक में होगी।
संत रविदास 15वीं-16वीं शताब्दी के महान संत और समाज सुधारक थे जिन्होंने समाज में जाति-भेद और ऊँच-नीच की भावना को मिटाने का संदेश दिया। उनकी 650वीं जयंती के अवसर पर संघ ने सामाजिक समरसता का व्यापक संदेश देने का संकल्प लिया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से संघ यह संदेश देना चाहता है कि भारतीय समाज की एकता और अखंडता का आधार सामाजिक समरसता है।
संघ की दृष्टि में समरसता का अर्थ केवल सामाजिक समानता नहीं, बल्कि समाज के सभी वर्गों का एकजुट होकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देना है। ग्राम संपर्क अभियान के माध्यम से भी इसी संदेश को घर-घर तक पहुँचाया गया।

माधव सृष्टि परिसर: एक अनुकरणीय केन्द्र
यह बैठक जिस ‘माधव सृष्टि’ परिसर में हो रही है, वह अपने आप में एक अनूठा आदर्श प्रकल्प है। पट्टीकल्याणा, समालखा में स्थित यह ‘ग्राम विकास एवं सेवा साधना केन्द्र’ संघ के सेवा भाव और ग्राम-विकास के संकल्प का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस परिसर में प्रशिक्षण, सेवा और साधना का अद्भुत संगम है।
हरे-भरे वृक्षों और प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह परिसर संघ के उस दर्शन का साकार रूप है जो मानता है कि सेवा ही साधना है और ग्राम-विकास ही राष्ट्र-विकास है। देश के शीर्ष स्वयंसेवकों का इस परिसर में एकत्रित होना इस आयोजन को एक विशिष्ट आध्यात्मिक-सामाजिक आयाम देता है।
15 मार्च: सरकार्यवाह की प्रेस वार्ता से होगा समापन
तीन दिवसीय इस महाअधिवेशन का समापन 15 मार्च को होगा। अंतिम दिन सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले एक विशेष प्रेस वार्ता आयोजित करेंगे जिसमें वे बैठक में लिए गए समस्त निर्णयों और पारित प्रस्तावों की विस्तृत जानकारी पत्रकारों को देंगे। पत्रकारों के प्रश्नों का उत्तर भी इस अवसर पर दिया जाएगा। यह प्रेस वार्ता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की जनता को संघ की भावी नीतियों और योजनाओं की जानकारी इसी माध्यम से मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार की बैठक में शताब्दी वर्ष के अनुभवों का जो सार निकलेगा वह आने वाले दशक के लिए संघ की दिशा निर्धारित करेगा।
व्यापक राष्ट्रीय संदर्भ में बैठक का महत्त्व
इस बैठक का महत्त्व केवल संगठनात्मक नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि जब संघ जैसा विशाल एवं अनुशासित संगठन अपनी दिशा और कार्ययोजना निर्धारित करता है, तो उसका प्रभाव समग्र राष्ट्रीय जीवन पर पड़ता है। संघ प्रेरित 32 संगठन शिक्षा, मजदूर कल्याण, आदिवासी सेवा, महिला जागरण, पर्यावरण, स्वास्थ्य और अनेक अन्य क्षेत्रों में कार्यरत हैं। अतः इस बैठक में लिए गए निर्णय प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से देश के करोड़ों नागरिकों के जीवन को प्रभावित करेंगे।
संघ 1925 में नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित किया गया था। तब से लेकर आज तक की इस शताब्दी-लम्बी यात्रा में संघ ने आपातकाल की चुनौतियों, सामाजिक आंदोलनों, सेवा प्रकल्पों और राष्ट्रीय संकटों में सदैव अपनी भूमिका का निर्वाह किया है। आज जब वह अपने 100 वर्ष पूरे कर रहा है, तो यह बैठक उसके आत्ममंथन और नव-संकल्प का अवसर भी है।
हरियाणा की धरती का सौभाग्य
समालखा और समग्र हरियाणा प्रांत के लिए यह आयोजन एक अभूतपूर्व गौरव का अवसर है। हरियाणा प्रांत के प्रचार प्रमुख राजेश कुमार ने पुष्टि की है कि प्रतिनिधि सभा की मेजबानी के लिए प्रांत के स्वयंसेवकों ने महीनों पहले से तैयारियाँ शुरू कर दी थीं और सभी व्यवस्थाएँ पूर्ण रूप से सुचारु हैं।
पानीपत का नाम इतिहास में सदैव निर्णायक घटनाओं से जुड़ा रहा है। 1526, 1556 और 1761 की लड़ाइयों ने भारत का इतिहास बदला था। आज 2026 में यहाँ संघ का जो महामंथन हो रहा है, वह यद्यपि युद्ध नहीं, परन्तु समाज-निर्माण के मोर्चे पर एक नयी रणनीति का शंखनाद अवश्य है।
संवाद 24 का मानना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यह अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा केवल एक संगठनात्मक बैठक मात्र नहीं है। यह 100 वर्षों की सेवा-साधना का लेखा-जोखा है, शताब्दी वर्ष की उपलब्धियों का उत्सव है, और आने वाले कल के लिए एक नए ‘भारत-निर्माण’ का संकल्प है। 10 करोड़ घरों तक पहुँच, संत रविदास की 650वीं जयंती पर समरसता का संदेश, और पंच परिवर्तन का सामाजिक अभियान ये सब मिलकर एक ऐसे संगठन की कहानी कह रहे हैं जो अपनी जड़ों से जुड़ा है और अपने लक्ष्य के प्रति अडिग है। पानीपत की यह बैठक निश्चित रूप से संघ और देश के लिए एक नए अध्याय का आरंभ सिद्ध होगी।






