भीषण हमले से कांपा ईरान: अमेरिका-इज़राइल की संयुक्त कार्रवाई ने मचाई तबाही
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संवाद 24 नई दिल्ली । मध्य-पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की आग में झुलसता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे संयुक्त सैन्य अभियान ने अब नई और खतरनाक दिशा ले ली है। ईरान की राजधानी तेहरान और उसके आसपास के कई रणनीतिक ठिकानों पर हुए भीषण हवाई हमलों के बाद शहर के कई हिस्सों में भारी तबाही देखी गई। तेल भंडारण डिपो, सैन्य प्रतिष्ठानों और रणनीतिक ढांचों को निशाना बनाए जाने से आसमान में काले धुएँ के विशाल गुबार उठते दिखाई दिए, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई।
युद्ध की शुरुआत और बढ़ता टकराव
इस संघर्ष की शुरुआत फरवरी 2026 में हुई, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई महत्वपूर्ण सैन्य और परमाणु ठिकानों पर समन्वित हवाई हमले शुरू किए। इन हमलों का उद्देश्य ईरान के मिसाइल कार्यक्रम, सैन्य क्षमताओं और नेतृत्व संरचना को कमजोर करना बताया गया। इसी अभियान के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत की भी पुष्टि हुई, जिसने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सैन्य हलचल तेज कर दी। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का सिलसिला लगातार जारी है, जिससे मध्य-पूर्व में व्यापक युद्ध की आशंका बढ़ गई है।
तेहरान में तबाही के भयावह दृश्य
हाल के दिनों में तेहरान पर हुए नए हवाई हमलों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। इज़राइली हमलों में तेल डिपो और रिफाइनरी जैसे ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया गया, जिसके बाद कई स्थानों पर आग लग गई और जहरीला धुआँ वातावरण में फैल गया। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल शहर में पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है, बल्कि स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।
हमलों के बाद कई इलाकों में लोगों को घरों के भीतर रहने की सलाह दी गई है। ईरानी अधिकारियों ने इन हमलों को “युद्ध अपराध” करार देते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की मांग की है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई
ईरान ने भी इस सैन्य कार्रवाई का जवाब देने में देर नहीं की। ईरानी सेना और उसके सहयोगी समूहों ने इज़राइल और अमेरिका के हितों को निशाना बनाते हुए मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। रिपोर्टों के अनुसार ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और कुछ सहयोगी देशों पर भी हमले किए, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया। इसके अलावा ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर हमले जारी रहे तो वह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश कर सकता है। यह रास्ता दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए बेहद अहम माना जाता है, इसलिए ऐसी स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकती है।
बढ़ती मौतें और मानवीय संकट
इस युद्ध में अब तक भारी जानमाल का नुकसान हुआ है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार ईरान में एक हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और कई हजार लोग घायल हुए हैं। वहीं लेबनान, इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में भी कई लोग मारे गए हैं। हजारों नागरिकों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ा है। अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि संघर्ष लंबा चला तो यह क्षेत्र बड़े मानवीय संकट में बदल सकता है।
वैश्विक राजनीति पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष केवल ईरान और इज़राइल के बीच सीमित नहीं रहेगा। अमेरिका की प्रत्यक्ष भागीदारी और खाड़ी देशों की रणनीतिक भूमिका के कारण यह पूरे मध्य-पूर्व को प्रभावित कर सकता है। कई देशों ने अपने नागरिकों को इस क्षेत्र से निकालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। दुनिया भर के नेताओं और संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है। हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष ने युद्धविराम के संकेत नहीं दिए हैं।
आगे क्या होगा?
मौजूदा हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज हो सकता है। यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह टकराव एक व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसके असर पूरी दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकते हैं।






