फजर की नमाज के बाद शुरू हुआ मातमी कार्यक्रम
Share your love

फर्रुखाबाद शहर में शिया समुदाय ने 19वीं रमजान के अवसर पर पहले इमाम हजरत अली अलैहिस्सलाम की शहादत की याद में पारंपरिक ताबूत जुलूस निकाला। सोमवार तड़के दिल्ली खाली कूंचा स्थित मस्जिद में फजर की नमाज के बाद मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली ने संबोधित किया और इमाम अली पर हुए कातिलाना हमले का मंजर बयान किया, जिसे सुनकर उपस्थित अज़ादार भावुक हो उठे और कई लोगों की आंखें नम हो गईं।
अकीदत के साथ निकला ताबूत जुलूस
मजलिस के बाद मस्जिद से ताबूत का जुलूस शुरू हुआ। जुलूस में सबसे आगे बैनर, उसके पीछे हजरत अब्बास अलमदार का अलम और फिर इमाम अली का ताबूत मुबारक रखा गया। बड़ी संख्या में अज़ादार नंगे पांव और ग़मगीन माहौल में जुलूस के साथ चल रहे थे। इस दौरान मातमी नारे और नौहे पढ़े जा रहे थे, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक और अकीदत का माहौल बना रहा।
रास्ते भर गूंजते रहे मातमी नौहे
जुलूस के दौरान अज़ादारों की आंखों में आंसू थे और वे इमाम अली की शहादत को याद करते हुए मातम कर रहे थे। “तुम से छुटता है मौला तुम्हारा, रोजेदारों कयामत के दिन हैं…” जैसे नौहे गूंजते रहे। मातमी जुलूस शहर की गलियों से होते हुए आगे बढ़ा और श्रद्धालुओं ने रास्ते भर इमाम अली को श्रद्धांजलि अर्पित की।
हसन वजाहत के घर पर हुई मजलिस और मातम
जुलूस हसन वजाहत के घर पहुंचकर संपन्न हुआ, जहां दोबारा मजलिस आयोजित की गई। मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली ने मजलिस पढ़ी और इमाम अली की शहादत के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके बाद अज़ादारों ने मातम कर इमाम को पुरसा पेश किया।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर मौलाना सदाकत हुसैन सैंथली, सलीम हैदर, नादिर हुसैन, हसन वजाहत, आलीम खान, फाजिल, बब्बू और असलम सहित शिया समुदाय के कई लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण और धार्मिक श्रद्धा के माहौल में संपन्न हुआ।






