आधी आबादी का पूरा दम! बिहार की पंचायतों में महिलाओं ने संभाली कमान
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संवाद 24 बिहार । अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बिहार के ग्रामीण इलाकों से महिला सशक्तिकरण की एक बेहद गौरवशाली और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आ रही है। राज्य की पंचायतों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने न केवल प्रशासनिक ढांचे को मजबूत किया है, बल्कि गांवों में शिक्षा और साक्षरता की नई अलख जगा दी है। सरकारी आंकड़ों और जमीनी रिपोर्ट्स के अनुसार, जिन पंचायतों की कमान महिला मुखियाओं या जन प्रतिनिधियों के हाथों में है, वहां साक्षरता दर में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
रसोई से पंचायत भवन तक का सफल सफर
कभी घर की चौखट तक सीमित रहने वाली बिहार की बेटियां और बहुएं अब पंचायत स्तर पर बड़े फैसले ले रही हैं। बिहार सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को दिए गए 50 प्रतिशत आरक्षण का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखने लगा है। महिला प्रतिनिधि न केवल सड़कों और नालियों के निर्माण पर ध्यान दे रही हैं, बल्कि उनका मुख्य जोर बालिका शिक्षा, स्वच्छता और पोषण पर है। उनके इस सक्रिय रुख के कारण गांवों में स्कूल छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या में भारी कमी आई है।
साक्षरता दर में ऐतिहासिक सुधार
रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला प्रधान पंचायतों में ‘अक्षर आंचल’ जैसे कार्यक्रमों को बेहतर ढंग से लागू किया गया है। इन क्षेत्रों में बुजुर्ग महिलाओं और किशोरियों के बीच साक्षरता अभियान को एक आंदोलन का रूप दिया गया है। महिला मुखियाओं ने घर-घर जाकर अभिभावकों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक किया, जिसका नतीजा यह हुआ कि कई जिलों के सुदूर गांवों में भी साक्षरता का ग्राफ तेजी से ऊपर चढ़ा है।
बदल रही है सामाजिक सोच
महिला प्रतिनिधियों के इस नेतृत्व ने गांवों में सदियों से चली आ रही पितृसत्तात्मक सोच को भी चुनौती दी है। अब महिलाएं पंचायत की बैठकों में न केवल अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं, बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक सुधारों पर मजबूती से अपनी बात रख रही हैं। उनकी इस सफलता ने अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे राज्य में एक नए और समृद्ध बिहार की नींव पड़ रही है।






