“शंकराचार्य पर आरोप मानना कठिन”: फर्रुखाबाद पहुंचे सलमान खुर्शीद, कहा सच्चाई कोर्ट तय करेगा
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फर्रुखाबाद जनपद के कायमगंज क्षेत्र स्थित पितौरा गांव पहुंचे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने कई राष्ट्रीय और स्थानीय मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। लोगों से मुलाकात के दौरान उन्होंने शंकराचार्य पर लगे आरोपों, देश की विदेश नीति, यूजीसी विवाद और प्रयागराज में बटुकों की पिटाई जैसे मामलों पर प्रतिक्रिया दी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक पद से जुड़े व्यक्ति पर लगे आरोपों को सीधे स्वीकार करना कठिन है और इस मामले की वास्तविकता अदालत के माध्यम से ही सामने आएगी।
“इतने बड़े धार्मिक व्यक्तित्व पर आरोप गंभीर मामला”: कोर्ट ही बताएगा सच
शंकराचार्य पर लगे आरोपों को लेकर पूछे गए सवाल पर सलमान खुर्शीद ने कहा कि इतने बड़े धार्मिक अस्तित्व से जुड़े व्यक्ति पर लगे आरोपों को तुरंत मान लेना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में भावनाओं से अधिक कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा करना चाहिए।
खुर्शीद के अनुसार, आरोपों की सत्यता अंततः न्यायालय द्वारा ही तय होगी और अदालत ही इस मामले की सच्चाई सामने लाएगी।
यूजीसी विवाद पर बोले—सुप्रीम कोर्ट करेगा अंतिम फैसला
यूजीसी से जुड़े विवाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कई लोग अपनी चिंता व्यक्त कर चुके हैं और मामला अब न्यायिक विचाराधीन है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी नीति या निर्णय को लागू करती है और उसमें कोई खामी पाई जाती है तो सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट ही अंतिम निर्णय देते हैं। ऐसे मामलों में न्यायपालिका की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और लोगों को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा रखना चाहिए।
प्रयागराज में बटुकों की पिटाई पर नाराजगी: “किसी के साथ दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं”
प्रयागराज में बटुकों की पिटाई के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ दुर्व्यवहार गलत है, चाहे वह समाज में सम्मानित व्यक्ति हो या सामान्य नागरिक।
उन्होंने कहा कि देश में “रूल ऑफ लॉ” सर्वोपरि होना चाहिए और पुलिस, प्रशासन तथा राजनीतिक नेतृत्व—सभी को कानून का सम्मान करना चाहिए। किसी भी विवाद का समाधान हिंसा या अपमानजनक व्यवहार से नहीं होना चाहिए।
विदेश नीति पर सरकार को घेरा: “क्या हमारी नीति में नैतिकता बची है?”
देश की विदेश नीति पर टिप्पणी करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि आज यह सवाल उठ रहा है कि भारत की विदेश नीति में नैतिकता कितनी बची है। उन्होंने कहा कि विदेश नीति केवल व्यापारिक सौदों या समझौतों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें वैश्विक शांति और नैतिक नेतृत्व का तत्व भी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारत हमेशा विश्व मंच पर शांति दूत की भूमिका निभाता रहा है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में वह भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं दे रही है।
इजरायल-ईरान तनाव पर भारत की चुप्पी पर सवाल
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और इजरायल-ईरान संघर्ष के संदर्भ में उन्होंने कहा कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय संकट पर भारत का रुख स्पष्ट होना चाहिए। उनके अनुसार भारत के दोनों देशों से लंबे समय से संबंध रहे हैं, इसलिए भारत को संतुलित और सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति के लिए भारत को संवाद और समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए।
रूस से तेल खरीद पर तंज: “क्या विदेश नीति आदेश से चलेगी?”
अमेरिका द्वारा रूस से सीमित अवधि के लिए तेल खरीद की अनुमति से जुड़े सवाल पर खुर्शीद ने कहा कि यदि भारत को अपनी विदेश नीति के फैसले किसी अन्य देश के संकेत या अनुमति के आधार पर लेने पड़ें, तो यह चिंताजनक स्थिति है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भारत वास्तव में स्वतंत्र रूप से निर्णय ले रहा है या बाहरी दबाव में नीतियां तय हो रही हैं।
2027 विधानसभा चुनाव पर बोले—पार्टी के फैसले पर चलेगी कांग्रेस
आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस गठबंधन में चुनाव लड़ेगी या अकेले, इसका अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कार्यकर्ता के रूप में उनका दायित्व संगठन को मजबूत करना है और पार्टी के निर्णय के अनुसार ही आगे बढ़ना होगा।
“ईरान पर हमले का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा”
पूर्व विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों और क्षेत्रीय युद्ध जैसी स्थिति का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। उनका मानना है कि इस तरह के संघर्ष वैश्विक व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं और भारत जैसे बड़े लोकतांत्रिक देश को शांति बहाली के प्रयासों में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।






