मरीजों के भोजन से लॉन्ड्री तक, सीएमओ कार्यालय के टेंडरों में गड़बड़ी का आरोप

संवाद 24। जनपद के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से जुड़े करोड़ों रुपये के टेंडरों में कथित अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कादरीगेट निवासी प्रदीप सिंह ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर उपमुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेश चन्द्र माथुर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि विभागीय टेंडर प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर कुछ चुनिंदा ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा रहा है, जिससे सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की निविदा पर विवाद

शिकायत के अनुसार स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित 55 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर (एचडब्ल्यूसी) से जुड़ी लगभग 1 करोड़ 10 लाख रुपये की निविदा पारस नाथ इंटरप्राइजेज, झारखंड को दी गई। आरोप है कि निविदा प्रक्रिया में शामिल अन्य दो फर्मों के दस्तावेजों में जाली प्रमाणपत्र होने की शिकायत पहले ही अधिकारियों को दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उल्लेखनीय है कि देशभर में आयुष्मान भारत योजना के तहत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए स्थापित किए जा रहे हैं।

मैनुअल लॉन्ड्री टेंडर में नियमों की अनदेखी का आरोप

प्रदीप सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि अस्पतालों की मैनुअल लॉन्ड्री सेवा से संबंधित निविदा नियमों के विपरीत “न्यू पैंथर सिक्योरिटी” नामक फर्म को दे दी गई। शिकायत के मुताबिक पिता-पुत्र के नाम से पंजीकृत दो अलग-अलग फर्मों को पास कर टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई, जबकि इन फर्मों द्वारा लगाए गए दस्तावेजों को भी कथित तौर पर फर्जी बताया गया है।

मरीजों के भोजन की निविदा में भी सवाल

मरीजों के लिए निशुल्क भोजन व्यवस्था से जुड़ी निविदा प्रक्रिया को लेकर भी शिकायतकर्ता ने अनियमितताओं का आरोप लगाया है। तकनीकी जांच के दौरान कुछ फर्मों के पास जिला स्तर का वैध फूड लाइसेंस नहीं पाया गया था। आरोप है कि बाद में कथित रूप से फोन कर एक फर्म को फर्जी पते पर लाइसेंस बनवाने की सूचना दी गई और निविदा की अंतिम तिथि के बाद जारी लाइसेंस को भी स्वीकार कर लिया गया।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। देश के विभिन्न राज्यों में भी समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग की खरीद और टेंडर प्रक्रियाओं में पारदर्शिता को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं, जिनकी जांच के बाद कई मामलों में कार्रवाई भी की गई है।

सीएमओ ने आरोपों को बताया असंतुष्ट ठेकेदारों की शिकायत

वहीं मुख्य चिकित्साधिकारी अवनिन्द्र कुमार ने कहा कि शिकायत करने वाले लोगों को टेंडर नहीं मिले, इसलिए वे आरोप लगा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है तो उसकी जांच कराई जाएगी और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

Anuj Singh
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