वीर सपूत की शहादत से गांव में मातम, लद्दाख की बर्फ ने छीनी आईटीबीपी जवान की जान
Share your love

लद्दाख के दुर्गम और बर्फीले क्षेत्र में देश की सुरक्षा कर रहे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान कुलदीप सिंह ड्यूटी के दौरान बर्फ में दबने से शहीद हो गए। घटना की पुष्टि शनिवार को होने के बाद उनके पैतृक गांव कलौली महबुल्लापुर (थाना नवाबगंज) में शोक की लहर दौड़ गई। जैसे ही यह दुखद सूचना परिवार और ग्रामीणों तक पहुंची, पूरे गांव में मातम छा गया और लोग अपने वीर सपूत को याद कर भावुक हो उठे।
ड्यूटी के दौरान सात साथियों के साथ बर्फ में दबे थे जवान
परिजनों और ग्राम प्रधान नरेंद्र सिंह के अनुसार, आईटीबीपी की तैनाती के दौरान लद्दाख क्षेत्र में भारी बर्फबारी के बीच कुलदीप सिंह अपनी बटालियन के लगभग सात अन्य जवानों के साथ ड्यूटी पर थे। इसी दौरान अचानक बर्फ खिसकने की घटना में वे बर्फ के नीचे दब गए। घटना करीब एक सप्ताह पहले की बताई जा रही है, जबकि शनिवार को विभाग की ओर से आधिकारिक रूप से उनकी शहादत की जानकारी परिवार को दी गई। लद्दाख का क्षेत्र अत्यधिक ऊंचाई, भीषण ठंड और हिमस्खलन जैसी प्राकृतिक चुनौतियों के कारण सुरक्षा बलों के लिए बेहद कठिन माना जाता है।
2011 में आईटीबीपी में हुए थे भर्ती, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद कुलदीप सिंह, महेंद्र सिंह के पुत्र थे और वर्ष 2011 में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस में भर्ती हुए थे। वर्तमान में उनकी तैनाती लेह-लद्दाख क्षेत्र में थी, जहां वे देश की सीमाओं की सुरक्षा में लगे हुए थे। उनके परिवार में पत्नी प्रियंका, आठ वर्षीय बेटी मन्नत और चार वर्षीय पुत्र राम हैं। शहादत की खबर मिलते ही परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और घर में मातम का माहौल है।
गांव में अंतिम दर्शन की तैयारी, सैन्य सम्मान के साथ होगा अंतिम संस्कार
ग्राम प्रधान नरेंद्र सिंह ने बताया कि शहीद का पार्थिव शरीर शनिवार दोपहर बाद तक उनके पैतृक गांव पहुंचने की संभावना है। प्रशासन और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। गांव और आसपास के क्षेत्र के लोग अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने की तैयारी में जुट गए हैं।
देश की सेवा में बलिदान पर गर्व, गांव में शोक के साथ गर्व का
माहौल
ग्रामीणों और परिजनों का कहना है कि कुलदीप सिंह ने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया है। गांव के लोगों ने कहा कि उनका जाना पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन साथ ही उन्हें अपने वीर बेटे की शहादत पर गर्व भी है। उनके सम्मान में गांव में शोक के साथ-साथ श्रद्धांजलि देने का सिलसिला जारी है।






