रिक्शा, भीड़ और बेबस ट्रैफिक फर्रुखाबाद की सड़कों पर होली का हंगामा
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संवाद 24 संवाददाता। रंगों के त्योहार होली की खरीदारी और बढ़ती आवाजाही ने शहर की यातायात व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को सामने ला दिया है। पिछले कुछ दिनों से बाजारों और प्रमुख मार्गों पर सुबह से देर शाम तक जाम की स्थिति बनी रही, जिससे आम नागरिकों, व्यापारियों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। त्योहार की चहल-पहल जहां आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाती है, वहीं व्यवस्थागत कमियों को भी उजागर कर देती है।
लिंजीगंज बाजार में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग खरीदारी के लिए पहुंचे। संकरी गलियों में एक साथ ई-रिक्शा, दोपहिया और चारपहिया वाहनों की आवाजाही ने हालात को विकट बना दिया। कई जगह पैदल चलना तक मुश्किल हो गया। लालगेट तिराहे पर ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी के बावजूद प्रतिबंधित मार्गों में वाहनों की एंट्री जारी रही, जिससे बार-बार जाम लगता रहा। लोगों का कहना है कि ट्रैफिक नियंत्रण की योजना कागजों तक सीमित नजर आई।
फतेहगढ़ का कानपुर रोड, घुमना, त्रिपोलिया चौक और रेलवे रोड जैसे प्रमुख मार्गों पर भी यातायात बाधित रहा। दोपहर के समय कई स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। एंबुलेंस और स्कूली वाहनों को भी निकलने में कठिनाई हुई, जो शहर की यातायात संवेदनशीलता को दर्शाता है।
शहर में अनियंत्रित ई-रिक्शा संचालन जाम का प्रमुख कारण बनकर उभरा है। बिना तय रूट और स्टैंड के संचालन से सड़क की क्षमता कम हो रही है। कई चालक सवारियां बैठाने के लिए बीच सड़क में वाहन रोक देते हैं, जिससे ट्रैफिक रुक जाता है। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों का कहना है कि यदि ई-रिक्शाओं के लिए निर्धारित मार्ग और पार्किंग स्थल तय कर दिए जाएं, तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।
यातायात प्रभारी सतेंद्र सिंह के अनुसार चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस के साथ गार्ड और पीआरडी जवानों की तैनाती की गई है। त्योहार के कारण बाजारों में निजी वाहनों की संख्या बढ़ने से दबाव बढ़ा है। शहर के अंदर ई-रिक्शा प्रवेश रोकने के निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन प्रभावी पालन कराना चुनौती बना हुआ है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फर्रुखाबाद की सड़कों की चौड़ाई और मौजूदा यातायात दबाव के बीच संतुलन नहीं है। त्योहारों पर यह समस्या और बढ़ जाती है, पर वास्तविक मुद्दा दीर्घकालिक ट्रैफिक प्रबंधन की कमी है। निर्धारित पार्किंग स्थलों का अभाव ई-रिक्शा के लिए रूट प्लान नहीं बाजार क्षेत्र में वन-वे व्यवस्था लागू न होनाअतिक्रमण और अस्थायी दुकानेंये सभी कारण मिलकर जाम की स्थिति पैदा करते हैं।
त्योहारों के दौरान अस्थायी ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाए।
बाजार क्षेत्रों में पैदल जोन (Pedestrian Zone) बनाया जाए।
ई-रिक्शा के लिए स्टैंड और तय मार्ग अनिवार्य किए जाएं।
प्रमुख चौराहों पर सीसीटीवी और चालान व्यवस्था सख्ती से लागू हो।
अतिक्रमण हटाने की नियमित कार्रवाई की जाए।
होली जैसे बड़े त्योहार शहर की सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाते हैं, लेकिन यह भी स्पष्ट कर देते हैं कि शहर की यातायात व्यवस्था अभी दबाव सहने के लिए तैयार नहीं है। यदि प्रशासन स्थायी ट्रैफिक योजना लागू करे और नागरिक भी नियमों का पालन करें, तो जाम की समस्या काफी हद तक नियंत्रित की जा सकती है। त्योहार की खुशी तभी पूरी होगी जब सड़कें भी सुरक्षित और सुगम हों वरना रंगों का उत्साह जाम की परेशानी में फीका पड़ता रहेगा।






