अखिलेश के बयान पर भाजपा का जवाब: अमृतपुर विधायक ने सियासी मोर्चा खोला
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संवाद 24 संवाददाता। अमृतपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सुशील शाक्य ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे पर अखिलेश यादव की टिप्पणी के बाद शुरू हुई बयानबाज़ी अब प्रदेश की सियासत में नए आरोप-प्रत्यारोप का रूप लेती दिख रही है।
सुशील शाक्य ने कहा कि केवल तंज कसने या नारे लगाने से जनसमर्थन नहीं मिलता। उन्होंने अखिलेश यादव की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए कहा कि “ऊल-जलूल बातें बोलकर सरकार नहीं बनाई जा सकती, जनता काम और सुरक्षा के आधार पर वोट देती है।”
विधायक शाक्य ने सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के राजनीतिक अभियान को निशाने पर लिया। उनका आरोप है कि सपा शासनकाल में इन्हीं वर्गों के लोग अपराध से सबसे अधिक प्रभावित थे। उन्होंने कहा कि उस समय अपहरण, लूट और पशु चोरी जैसी घटनाओं से आम नागरिक परेशान रहते थे और कानून-व्यवस्था एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई थी।
बसपा विधायक के यहां पड़ी रेड पर अखिलेश यादव के तंज के संदर्भ में शाक्य ने कहा कि यदि उन्हें किसी कार्रवाई पर संदेह है तो सार्वजनिक बयान देने के बजाय न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आरोप गंभीर हों तो विधिक प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर पूछे गए सवाल पर भाजपा विधायक ने दावा किया कि प्रदेश में भाजपा को रोकने वाला कोई नहीं है और अगली सरकार भी भाजपा की ही बनेगी। ‘ब्राह्मण नाराज़गी’ के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह विपक्षी दलों की राजनीतिक धारणा है, वास्तविकता में ऐसा कोई व्यापक असंतोष नहीं है।
शाक्य ने विभिन्न दलों द्वारा जातीय समीकरणों के आधार पर राजनीति करने पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केवल सामाजिक या जातीय पहचान के नाम पर वोट सुनिश्चित नहीं होते और कई दलों की जमानतें जब्त होने के उदाहरण सामने हैं। उन्होंने समाजवादी पार्टी को अपने शासनकाल के विकास कार्यों के आधार पर जनता के बीच जाने की सलाह देते हुए आरोप लगाया कि पार्टी मुद्दों के बजाय सामाजिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है।
प्रदेश की राजनीति में लोकसभा चुनाव के बाद अब 2027 विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि बननी शुरू हो गई है। नेताओं के बीच बढ़ती बयानबाज़ी से संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तीखे हो सकते हैं। फिलहाल, भाजपा और सपा के बीच यह शब्दयुद्ध स्थानीय स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक सियासी तापमान बढ़ाने लगा है।
