दिल्ली की सड़कों पर संग्राम: JNU छात्रों का ‘लॉन्ग मार्च’ और पुलिस का चक्रव्यूह; क्या फिर सुलग उठा है कैंपस?
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संवाद 24 नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की सड़कों पर एक बार फिर विरोध और प्रदर्शन का शोर गूंज उठा है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्रों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर संसद की ओर ‘लॉन्ग मार्च’ निकालने का एलान किया, लेकिन यह मार्च शुरू होते ही रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। दिल्ली पुलिस और छात्रों के बीच हुई इस तीखी झड़प ने एक बार फिर जेएनयू विवाद को सुर्खियों में ला दिया है।
शांतिपूर्ण मार्च या संघर्ष की तैयारी?
शुक्रवार की दोपहर जेएनयू परिसर के साबरमती ढाबे से शुरू हुआ यह मार्च जैसे ही कैंपस के गेट से बाहर निकला, वहां पहले से तैनात भारी पुलिस बल ने उसे रोकने की कोशिश की। छात्रों का समूह ‘नारेबाजी’ करते हुए आगे बढ़ रहा था, लेकिन पुलिस ने बैरिकेडिंग कर रास्ता पूरी तरह ब्लॉक कर दिया था। जब छात्रों ने इन अवरोधकों को लांघने की कोशिश की, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। देखते ही देखते धक्का-मुक्की शुरू हुई और पुलिस को प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा।
क्यों सड़कों पर उतरे छात्र?
छात्र संघ का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगों को अनसुना कर रहा है। उनकी मुख्य मांगों में हॉस्टल फीस में की गई वृद्धि को वापस लेना, स्कॉलरशिप की समय पर बहाली और परिसर के भीतर लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना शामिल है। छात्रों का कहना है कि वे संसद जाकर अपनी आवाज सरकार तक पहुँचाना चाहते थे, लेकिन उन्हें रास्ते में ही ‘कैदी’ की तरह रोक लिया गया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने महिला छात्रों के साथ भी बदसलूकी की, जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि उन्होंने केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए न्यूनतम बल का प्रयोग किया।
छावनी में तब्दील हुई दिल्ली की सीमाएं
इस प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने व्यापक इंतजाम किए थे। जेएनयू से लेकर संसद भवन तक के रास्ते को कई लेयर की सुरक्षा में रखा गया था। वाटर कैनन (पानी की बौछार), दंगा रोधी वाहन और भारी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई थी। इस हंगामे के कारण दक्षिण दिल्ली के इलाकों, विशेषकर आरके पुरम, मुनिरका और वसंत कुंज के आसपास भारी ट्रैफिक जाम लग गया, जिससे आम जनता को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
राजनीतिक रंग और आगामी रणनीति
जेएनयू का यह विरोध प्रदर्शन अब केवल कैंपस तक सीमित नहीं रहा है। कई विपक्षी दलों ने छात्रों के समर्थन में बयान जारी किए हैं, जिससे मामला और गरमा गया है। छात्र संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने आने वाले दिनों में और भी बड़े प्रदर्शनों की चेतावनी दी है।






