UPPSC Health Education Officer भर्ती: 20 साल बाद निकली वैकेंसी, लाखों युवाओं की नजर
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संवाद 24 डेस्क। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने सरकार की मानव संसाधन नीतियों के तहत स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (Health Education Officer) की भर्ती के लिए 221 पदों पर विज्ञापन जारी किया है, जो लगभग दो दशकों के बाद पहली बार निकली इस श्रेणी की भर्ती है। इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया में इस भर्ती को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है, खासकर युवा और स्नातकोत्तर पास उम्मीदवारों के बीच।
यह भर्ती इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विशेषज्ञ कर्मचारियों की कमी, बढ़ती जनसंख्या और सरकारी योजनाओं का विस्तार ऐसे समय में हो रहा है, जब स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को और बेहतर बनाने की आवश्यकता है।
भर्ती का ऐतिहासिक और सामाजिक संदर्भ
उत्तर प्रदेश की राजनीतिक-प्रशासनिक संरचना में लोक सेवा आयोग एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। विभिन्न राज्य सेवाओं के लिए UPPSC द्वारा आयोजित परीक्षाएं यह सुनिश्चित करती हैं कि प्रशासनिक और तकनीकी कार्यों में गुणवत्ता, पारदर्शिता और क्षमता बनी रहे। 2005 के बाद से स्वास्थ शिक्षा अधिकारी की भर्ती नहीं निकली थी, जिसके कारण इस विषय में वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवारों में यह खबर उत्साह का कारण बन गई है।
यह नियुक्ति न केवल नौकरी की तलाश में लगे युवा वर्ग के लिए अवसर है, बल्कि स्वास्थ्य और कल्याण विभाग के संगठनात्मक ढांचे को भी मजबूती देने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है।
भर्ती की घोषणा: प्रक्रियाएँ और आवेदन आंकड़े
UPPSC ने 22 दिसंबर से 22 जनवरी तक इस भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन माँगे थे। आयोग को प्राप्त आवेदन की संख्या 124,806 है, यानी कुल अभ्यर्थियों की संख्या लगभग 1.25 लाख रही, जिससे स्पष्ट होता है कि हर पद पर औसतन लगभग 565 दावेदारों ने आवेदन किया है।
यह अनुपात यह दर्शाता है कि इस भर्ती के लिए प्रतिस्पर्धा अत्यंत तीव्र है और समाजशास्त्र या किसी भी सामाजिक विज्ञान विषय में स्नातकोत्तर (मास्टर) डिग्री रखने वाले उम्मीदवार इस अवसर को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं।
पदों का विभाजन और विभागीय विवरण
UPPSC द्वारा विज्ञापित विभिन्न पदों का विभागीय वितरण इस प्रकार है:
स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी (Health Education Officer) – 221 पद
चिकित्साधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य (आयुर्वेद एवं यूनानी) – 884
पशु चिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) – 404
होम्योपैथिक चिकित्साधिकारी (Homoeopathic) – 265
आयुर्वेद चिकित्साधिकारी (Ayurved) – 168
दन्त सर्जन (Dental Surgeon) – 157
यूनानी चिकित्साधिकारी (Unani) – 25
होम्योपैथिक (श्रम विभाग) – 7
औषधि निरीक्षक (Drug Inspector) – 26
विधीक्षण अधिकारी (Law Officer) – 1
इन विविध विभागों में नियुक्तियों से स्वास्थ्य, पशुधन और पारिवारिक कल्याण विभाग की कार्यक्षमता में वृद्धि होने की संभावना है, साथ ही ग्रामीण और शहरी स्तर पर सेवाओं की बेहतर डिलीवरी सुनिश्चित हो सकती है।
पात्रता मानदंड: क्या चाहिए उम्मीदवारों से?
इस भर्ती के लिए मुख्य शैक्षणिक योग्यता यह रखी गई है कि उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से सामाजिक विज्ञान के किसी विषय में स्नातकोत्तर डिग्री (Master’s Degree) होना अनिवार्य है। सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत समाजशास्त्र, मानव विज्ञान, मनोविज्ञान, सामाजिक मनोविज्ञान, राजनीति विज्ञान, भूगोल, इतिहास और अर्थशास्त्र जैसे विषय शामिल हैं।
इसके अलावा, प्राथमिक अनुभव या प्रशिक्षण आवश्यकताएँ में प्रसार कार्य का अनुभव या परिवार कल्याण क्षेत्र में प्रशिक्षण को प्राथमिकता दी गई है। प्रादेशिक सेना में न्यूनतम दो वर्ष की सेवा या राष्ट्रीय कैडेट कोर ‘बी’ प्रमाणपत्र भी एक वैकल्पिक योग्यता के रूप में मान्य है।
चयन प्रक्रिया: स्क्रीनिंग और परीक्षा पैटर्न
UPPSC ने चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और मानकीकरण को ध्यान में रखते हुए स्ट्रक्चर तैयार किया है। चुने गए उम्मीदवारों का चयन “स्क्रीनिंग परीक्षा” और उसके बाद साक्षात्कार/इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा।
मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:
प्रारूप: लिखित परीक्षा (ऑफ़लाइन मोड)
प्रश्न प्रकार: MCQ (बहुविकल्पी)
भाषा: हिंदी एवं अंग्रेज़ी
निगेटिव मार्किंग: 1/3 अंक काटा जाएगा
कट-ऑफ:
सामान्य / OBC / EWS – 40%
SC / ST – 35%
इस तरह की चयन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि उम्मीदवार न केवल विषय में पारंगत हों, बल्कि उनकी व्यक्तित्व दक्षता और सामूहिक निर्णय क्षमता भी मापी जा सके।
वेतनमान और आर्थिक लाभ
चयनित उम्मीदवारों को प्रतिमाह ₹56,100 से ₹1,77,500 तक का वेतनमान मिलेगा, जो सरकारी सेवा में उच्च ग्रेड और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा सरकारी भत्ते, यात्रा भत्ता, चिकित्सा भत्ता और अन्य सुविधाएँ भी उम्मीदवार को मिलेगा, जो जीवन स्तर में सुधार और भविष्य की योजना के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगा।
उम्मीदवारों की प्रतिक्रिया और तैयारी की चुनौतियाँ
कई उम्मीदवारों ने कहा है कि पाठ्यक्रम की आधिकारिक रूप से घोषणा नहीं होने के कारण तैयारी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। परीक्षा तारीख निर्धारित होने के बावजूद विस्तृत पाठ्यक्रम और परीक्षा योजना उपलब्ध नहीं होने से वे अपनी studie तैयारी को सही दिशा में नहीं ले पा रहे हैं। ऐसे में उन्हें असमंजस की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी मानसिक तैयारी प्रभावित हो रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा पैटर्न और विस्तृत सिलेबस को समयबद्ध रूप से जारी करना उम्मीदवारों के लिए उपयोगी रहेगा और उनमें उपस्थित प्रतियोगी तनाव भी कम होगा।
व्यापक विश्लेषण: प्रतिस्पर्धा, अवसर और चुनौती
यह भर्ती विश्लेषणात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है क्योंकि:
बड़े पैमाने पर प्रतिस्पर्धा मौजूद है (1.25 लाख आवेदनकर्ता)
रोजगार दर में सरकारी नौकरियों की मांग बढ़ रही है
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में विशेषज्ञता की आवश्यकता बढ़ी है
आर्थिक दृष्टि से उम्मीदवारों को सुरक्षित भविष्य मिलता है
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस भर्ती से केवल रोजगार का अवसर ही नहीं मिलेगा, बल्कि स्वास्थ्य प्रणालियों में सुधार, ग्रामीण स्वास्थ्य अभियानों का सुदृढ़ीकरण और परिवार कल्याण के क्षेत्र में जागरूकता फैलाने में भी मदद मिलेगी।
समय की मांग और भर्ती का महत्व
UPPSC द्वारा स्वास्थ शिक्षा अधिकारी और अन्य संबंधित पदों पर भर्ती राज्य के सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बड़ा कदम है। यह भर्ती उन उम्मीदवारों के लिए एक सोने पर सुहागा साबित हो सकती है जो वर्षों से स्थिर सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा कर रहे थे। साथ ही यह स्वास्थ्य, पशुपालन और कल्याण सेवाओं के स्तर को नये आयाम देने में समर्थ होगी।
UPPSC जैसे प्रतिष्ठित आयोग द्वारा भर्ती की प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा का स्तर बनाए रखना भविष्य के प्रशासनिक और स्वास्थ्य ढांचे को और मजबूत करेगा।






