“रांची बजट 2026-27 में बड़ा स्वास्थ्य फैसला: RIMS में कैंसर के लिए PET-SCAN जांच अब मुफ्त!”
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संवाद 24 झारखंड । सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र में इस साल के बजट में एक ऐसा बड़ा निर्णय लिया है जिसने मरीजों और उनके परिवारों की उम्मीदें और बढ़ा दी हैं। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट सत्र के दौरान राज्य के स्वास्थ्य बजट में लगभग 200 करोड़ रुपये का एक विशेष प्रावधान शामिल किया गया है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम जनता ने स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा है। इस प्रावधान के अंतर्गत अब रांची स्थित राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज (RIMS) में कैंसर से जुड़ी PET-SCAN जांच मुफ्त (यानी मरीजों के लिए बिना शुल्क के) कराई जाएगी, जिससे राज्य के तमाम गंभीर मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद बनी है।
बजट में कैंसर-उपचार को मिले बड़े प्रावधान
झारखंड के स्वास्थ्य बजट 2026-27 में, स्वास्थ्य विभाग के लिये कुल लगभग 7,990 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है, जिसमें कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज हेतु विशेष रूप से 200 करोड़ रुपये को अलग से आवंटित किया गया है। इस घटक का मुख्य उद्देश्य है राज्य के अस्पतालों, विशेष रूप से RIMS जैसे बड़े चिकित्सा केंद्रों में प्रोफेशनल कैंसर उपचार व्यवस्था का विस्तार करना। अब तक कई मरीजों को PET-SCAN जांच के लिये निजी केंद्रों पर जाना पड़ता था, जहाँ जांच के खर्चे कई बार परिवार की आर्थिक क्षमता से बाहर हो जाते थे। PET-SCAN एक उन्नत डायग्नोस्टिक तकनीक है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के फैलाव का पता लगाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह तकनीक शारीरिक संरचनाओं में जैविक गतिविधियों को भी स्पष्ट रूप से दिखाती है, जिससे इलाज की योजना बेहतर ढंग से बनाई जा सकती है।
RIMS के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य योजनाएँ
राज्य सरकार का कहना है कि PET-SCAN की मुफ्त सुविधा RIMS के मरीजों के लिये एक बड़ा लाभ होगा। हालांकि यह योजना फिलहाल RIMS में लागू है, बजट के प्रावधान में यह भी कहा गया है कि अगली योजनाओं में अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों में भी PET और अन्य उन्नत जांच मशीनें स्थापित की जाएँगी — ताकि मरीजों को और नजदीकी स्तर पर सुविधाएँ उपलब्ध हो सकें।
वित्त मंत्री ने बजट घोषणा के दौरान कहा कि कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों की रोकथाम और इलाज को राज्य सरकार बहुत गंभीरता से ले रही है, और इसी लिये इन भारी निवेशों को स्वास्थ्य बजट का अहम हिस्सा बनाया गया है। इसके साथ ही CTR और मैमोग्राफी मशीनें भी जिला स्तर पर उपलब्ध कराई जाएँगी ताकि स्तन और अन्य प्रकार के कैंसर की शीघ्र पहचान भी सुनिश्चित हो सके।
लक्षित स्वास्थ्य बदलाव का बड़ा उद्देश्य
विशेषज्ञों के मुताबिक, झारखंड जैसे राज्य में जहाँ ग्रामीण-शहरी भेद बहुतायत है, स्वास्थ्य सुविधाओं का समान वितरण एक बड़ा चुनौती रहा है। PET-SCAN जैसी महँगी जांच को मुफ्त करना राज्य सरकार की प्राथमिकता का संकेत है — खासकर तब जब कैंसर जैसे रोग का संक्रमण बढ़ता जा रहा है और तमाम मरीज समय पर निदान नहीं करा पाते हैं। यह पहल आयुष्मान भारत-PMJAY जैसी सरकारी योजनाओं के साथ भी तालमेल बैठाने में सहायक हो सकती है, जिससे गरीब और मध्यवर्गीय परिवारों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ और अधिक विस्तार से मिल सके।
मरीजों और स्वास्थ्य जगत की प्रतिक्रिया
इस कदम को पहले से ही स्वास्थ्य क्षेत्र के कई विशेषज्ञों और समुदाय के नेताओं द्वारा सराहा जा रहा है। मरीजों के नज़दीकी समूहों का कहना है कि PET-SCAN जैसे उन्नत डायग्नोस्टिक परीक्षणों के लिये अब तक कई को राजधानी से बाहर भी जाना पड़ता था और खर्च भी भारी होता था। मुफ्त सेवा मिलने से उनकी आर्थिक और स्वास्थ्य-संबंधी चिंताएँ कम होंगी। कई संगठनों ने यह भी सुझाव दिया है कि राज्य सरकार को इससे आगे बढ़कर अभियान-आधारित जांच शिविर भी शुरू करने चाहिए, जिससे ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य परीक्षण पहुँच सके। क्योंकि कैंसर जैसे रोग अक्सर समय से इलाज शुरू नहीं होने पर बहुत गंभीर रूप ले लेते हैं।
बजट के अन्य स्वास्थ्य प्रावधान
इस बजट में केवल PET-SCAN सुविधा ही नहीं, बल्कि जिला स्तर पर मैमोग्राफी मशीनों की स्थापना, कैंसर-विशेष उपचार केंद्रों का विकास, तथा आधुनिक चिकित्सा-परीक्षण सुविधाओं को सरकारी अस्पतालों तक पहुंचाना भी शामिल है। वित्त मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि बजट को स्वास्थ्य के लिये “सबसे बड़ा” बनाने की दिशा में काम किया गया है, ताकि झारखंड के हर नागरिक को बेहतर और किफायती इलाज मिल सके।






