लखनऊ में योगी-भागवत की अहम बैठक, 2027 चुनावी रणनीति पर 40 मिनट मंथन
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संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत से राजधानी लखनऊ में मुलाकात की। करीब 40 मिनट चली इस बैठक को वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संघ प्रमुख इन दिनों दो दिवसीय प्रवास पर लखनऊ आए हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार बैठक में प्रदेश सरकार की प्रमुख योजनाओं, संगठनात्मक गतिविधियों तथा जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका पर चर्चा हुई। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य होने के कारण राष्ट्रीय राजनीति में भी निर्णायक प्रभाव रखता है। ऐसे में संगठन और सरकार के बीच बेहतर तालमेल पर विचार-विमर्श को अहम माना जा रहा है।
वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार बहुमत प्राप्त किया था। अब पार्टी की निगाह 2027 पर है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि समय रहते रणनीतिक बैठकों का सिलसिला यह संकेत देता है कि संगठन और सरकार आगामी चुनावी चुनौतियों को लेकर सतर्क हैं। सामाजिक समीकरण, क्षेत्रीय संतुलन और विपक्षी रणनीतियों पर भी चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है।
बैठक में प्रदेश की प्रमुख विकास परियोजनाओं, कानून-व्यवस्था की स्थिति, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन जैसे मुद्दों पर भी विमर्श हुआ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार बुनियादी ढांचे के विस्तार और औद्योगिक निवेश को अपनी सरकार की प्राथमिकता बताते रहे हैं। ऐसे में संघ नेतृत्व के साथ इन विषयों पर फीडबैक साझा करना स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आगामी महीनों में सरकार की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विशेष जनसंपर्क अभियान चलाए जा सकते हैं। संघ के व्यापक नेटवर्क और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। सामाजिक समरसता और व्यापक जनाधार को मजबूत करने पर भी चर्चा होने की संभावना है।
इस मुलाकात पर विपक्षी दलों की भी पैनी नजर बनी हुई है। हालांकि सत्तापक्ष इसे नियमित संगठनात्मक संवाद और मार्गदर्शन की प्रक्रिया बता रहा है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी चुनावी रणनीति की दृष्टि से महत्वपूर्ण मान रहे हैं।
करीब 40 मिनट चली इस बैठक का औपचारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है, फिर भी इसे प्रदेश की भविष्य की राजनीतिक दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में होने वाली हलचलों पर इस बैठक का प्रभाव स्पष्ट दिखाई दे सकता है।






