शंकराचार्य विवाद के बीच डिप्टी सीएम ने 101 बटुकों का किया पूजन, ब्राह्मण समाज को साधने की कोशिश

Share your love

संवाद 24 लखनऊ। उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य विवाद के बीच प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को अपने लखनऊ स्थित सरकारी आवास पर 101 ब्राह्मण बटुकों का विधिवत पूजन किया। उन्होंने पत्नी नम्रता पाठक के साथ बटुकों का तिलक कर पुष्पवर्षा की और हाथ जोड़कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कार्यक्रम संपन्न हुआ।

मामला 18 जनवरी को मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज में आयोजित माघ मेला प्रयागराज से जुड़ा है। उस दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों और पुलिस के बीच पालकी को लेकर विवाद हो गया था। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने एक शिष्य की चोटी पकड़कर घसीटा और मारपीट की। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया और संत समाज में नाराजगी फैल गई।

बताया जाता है कि पालकी को संगम से लगभग एक किलोमीटर दूर ले जाया गया, जिससे क्षत्रप (छत्र) भी क्षतिग्रस्त हो गया। घटना से नाराज शंकराचार्य ने कई दिनों तक अपने शिविर के बाहर धरना दिया और बाद में वाराणसी लौट गए।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने हाल ही में एक मीडिया कार्यक्रम में कहा था कि “चोटी नहीं खींचनी चाहिए थी, यह महाअपराध है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।” हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं लिया। इसके दो दिन बाद बटुक पूजन का यह कार्यक्रम आयोजित किया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम ब्राह्मण समाज के बीच बने असंतोष को कम करने और संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कार्यक्रम से पहले पार्टी नेतृत्व को भी अवगत कराया गया था।

विवाद के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा था कि “कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।” उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति स्वयं को शंकराचार्य नहीं कह सकता और व्यवस्था सभी के लिए समान है।

वहीं, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने वाराणसी में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सनातन धर्म में शंकराचार्य की मान्यता किसी राजनीतिक प्रमाणपत्र से तय नहीं होती और यह धार्मिक परंपरा का विषय है।

प्रदेश में ब्राह्मण समाज की आबादी लगभग 9 से 11 प्रतिशत मानी जाती है और करीब 31 जिलों की 100 से अधिक विधानसभा सीटों पर इसका प्रभाव निर्णायक माना जाता है। राजनीतिक इतिहास बताता है कि समय-समय पर ब्राह्मण मतदाता विभिन्न दलों के साथ शिफ्ट होते रहे हैं, जिससे चुनावी परिणामों पर सीधा असर पड़ा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि ब्राह्मण समाज की नाराजगी बनी रहती है तो आगामी चुनावों में इसका असर कई सीटों पर पड़ सकता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में 100 से अधिक सीटों पर जीत-हार का अंतर 10 हजार वोट से कम था, ऐसे में मामूली वोट स्विंग भी परिणाम बदल सकता है।

डिप्टी सीएम का बटुक पूजन कार्यक्रम ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत भी लखनऊ में प्रवास पर बताए जा रहे हैं। कार्यक्रम के बाद पाठक की उनसे मुलाकात की चर्चा भी है, हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पूरे विवाद पर आगे क्या कदम उठाती है और संत समाज की नाराजगी किस हद तक शांत होती है।

Shivpratap Singh
Shivpratap Singh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Get regular updates on your mail from Samvad 24 News