
संवाद 24 प्रयागराज। उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि किसी भी आपराधिक मामले में आरोपित को एफआईआर, पुलिस रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेजों की प्रति उपलब्ध कराना निष्पक्ष जांच और सुनवाई का अनिवार्य हिस्सा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज उपलब्ध न कराना आरोपी के मूल अधिकारों का उल्लंघन माना जाएगा।
न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि संबंधित ट्रायल कोर्ट ने बीएनएसएस की धारा 230 के तहत अनिवार्य दस्तावेज आरोपित को उपलब्ध नहीं कराए थे। इसे गंभीर प्रक्रिया त्रुटि मानते हुए अदालत ने संबंधित मामले की चार्जशीट को निरस्त कर दिया।
हाई कोर्ट ने कहा कि आरोपी को अपने बचाव की तैयारी के लिए पुलिस रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों की जानकारी होना आवश्यक है। यदि जांच या सुनवाई के दौरान इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता, तो पूरी कार्यवाही की निष्पक्षता प्रभावित होती है।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि गैंगस्टर एक्ट को एकल आपराधिक मामले में भी लागू किया जा सकता है और इसके लिए लंबा आपराधिक इतिहास होना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा, अवैध मतांतरण से जुड़े एक मामले में दो आरोपितों को सशर्त जमानत भी प्रदान की गई।






