फर्रुखाबाद में शब-ए-बरात पर इबादत का माहौल, रातभर मस्जिदों-कब्रिस्तानों में रौनक
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संवाद 24 संवाददाता। मंगलवार को फर्रुखाबाद में शब-ए-बरात का पर्व पूरी अकीदत, सादगी और धार्मिक अनुशासन के साथ मनाया गया। इस मौके पर मस्जिदों, मदरसों और विभिन्न धार्मिक जलसों में अमन-चैन, भाईचारे और देश-दुनिया की सलामती के लिए विशेष दुआएं की गईं। बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने रात भर इबादत की और कब्रिस्तानों में जाकर अपने दिवंगत परिजनों के लिए फातिहा पढ़ी।
पर्व को लेकर शहर के प्रमुख कब्रिस्तानों और इबादतगाहों में विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। कब्रिस्तानों में रोशनी के व्यापक इंतजाम रहे, जबकि मस्जिदों और मदरसों को आकर्षक झालरों से सजाया गया। शमशेर खानी और बहादुरगंज तराई जमाते इस्लामिया सहित कई स्थानों पर धार्मिक जलसों का आयोजन हुआ, जिनमें लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही।
इस अवसर पर प्रसिद्ध इस्लामिक विद्वान मुफ्ती जफर कासमी ने तकरीर करते हुए कुरान और पैगंबर मोहम्मद साहब की सुन्नतों पर अमल करने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि शब-ए-बरात के अवसर पर आतिशबाजी, स्टंट या किसी भी तरह के दिखावे से बचना चाहिए। उनके अनुसार यह रात गुनाहों की माफी मांगने, नमाज पढ़ने और अपने आचरण को बेहतर बनाने का अवसर है।
मुफ्ती कासमी ने स्पष्ट किया कि शब-ए-बरात मनोरंजन या रतजगे की नहीं, बल्कि पूरी तरह से इबादत और आत्ममंथन की रात है। इसी क्रम में रकाबगंज तिराहा मस्जिद जान अली और जमातिया इस्लामिया मदरसा सहित अन्य मस्जिदों व मदरसों में भी जलसे आयोजित किए गए।
डिग्गी ताल, भीकमपुरा, बंगशपुरा, नखास, जसमई और हद्दू का तकिया जैसे कब्रिस्तानों को रोशनी से सजाया गया था। शाम होते ही इन कब्रिस्तानों में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ने लगी, जो देर रात तक जारी रही। लोगों ने शांतिपूर्ण माहौल में फातिहा पढ़कर अपने मरहूम रिश्तेदारों के लिए दुआएं कीं।
कार्यक्रमों में मौलाना लहिक़ ताहिर, हाफिज मौलाना जियाउर रहमान, मौलाना अतिकुल रहमान और सभासद फुरकान अहमद खान सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। प्रशासन और स्थानीय समितियों के सहयोग से पूरे शहर में शांति, अनुशासन और धार्मिक सौहार्द का वातावरण बना रहा।






