फर्रुखाबाद में ‘एक जनपद–एक नदी’ योजना को मिली गति, बघार नाले के कायाकल्प को मंजूरी
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संवाद 24 संवाददाता। शासन की महत्वाकांक्षी एक जनपद–एक नदी योजना के तहत जिले में बघार नाले का चयन किया गया है। ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार वर्ष 1912 के गजट में बघार नाले को 52 किलोमीटर लंबी नदी के रूप में दर्ज किया गया था। इसी आधार पर सिंचाई विभाग द्वारा प्रस्ताव भेजा गया, जिसे शासन से मंजूरी मिल गई है। इससे नाले के कायाकल्प की दिशा में ठोस पहल शुरू होने जा रही है।
शहर और ग्रामीण क्षेत्रों का दायरा लगातार बढ़ने के कारण जल निकासी की समस्या गंभीर होती जा रही है। कई नाले सीधे गंगा नदी में गिरते हैं, जिससे प्रदूषण और जलभराव की स्थिति बनती है। इसी पृष्ठभूमि में शासन द्वारा जिले के पुराने अभिलेखों की समीक्षा कर बघार नाले को एक जनपद–एक नदी योजना में शामिल किया गया।
बघार नाला कमालगंज क्षेत्र के फतेहपुर कायस्थान गांव से लेकर नवाबगंज क्षेत्र के अद्दूपुर गांव तक लगभग 52 किलोमीटर तक फैला है। इसके कायाकल्प के लिए लगभग एक करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव तैयार किया गया है। शासन स्तर से 60 से 70 लाख रुपये की धनराशि शीघ्र जारी होने की संभावना जताई जा रही है, जिसके बाद कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
योजना के अंतर्गत सिंचाई विभाग द्वारा नाले की सफाई, गहरीकरण और प्रवाह सुधार जैसे कार्य कराए जाएंगे। वहीं वन विभाग दोनों तटों पर पौधारोपण कर हरित पट्टी विकसित करेगा। लघु सिंचाई विभाग जल संरक्षण के लिए चेकडैम जैसे संरचनात्मक कार्य करेगा। इसके अतिरिक्त, नाले से जुड़े गांवों में मनरेगा के माध्यम से तालाबों की खुदाई, नालियों का निर्माण और अन्य जल संरक्षण कार्य भी प्रस्तावित हैं। हालांकि शासन से प्राप्त होने वाली धनराशि मुख्य रूप से नदी की सफाई पर ही खर्च की जाएगी, अन्य विभागों की कार्ययोजनाएं अलग से क्रियान्वित होंगी।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता दुर्ण कुमार ने बताया कि बघार नाले को एक जनपद–एक नदी योजना में शामिल कर लिया गया है। वर्ष 1912 के गजट में नदी के रूप में दर्ज होने के कारण इसके चयन को ऐतिहासिक आधार मिला। उन्होंने कहा कि जैसे ही बजट जारी होगा, सफाई और पुनर्जीवन से जुड़े कार्य तेजी से शुरू करा दिए जाएंगे।
इस पहल से न केवल जल निकासी व्यवस्था में सुधार होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, भूजल संवर्धन और ग्रामीण आजीविका को भी बल मिलने की उम्मीद है। बघार नाले का कायाकल्प जिले के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।






