फर्रुखाबाद रोडवेज डिपो में 27 खटारा बसें, यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा पर उठे सवाल
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संवाद 24 संवाददाता। यात्रियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के दावों के बीच स्थानीय रोडवेज डिपो की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के फर्रुखाबाद डिपो के बेड़े में शामिल कुल 120 बसों में से 27 बसें ऐसी हैं, जिन्हें खटारा श्रेणी में रखा गया है। यह बसें तकनीकी मानकों के अनुसार कंडम होने की निर्धारित अवधि और किलोमीटर सीमा पूरी कर चुकी हैं, बावजूद इसके इन्हें नियमित रूप से सड़कों पर उतारा जा रहा है।
डिपो के बेड़े में वर्तमान में 94 निगम की और 26 अनुबंधित बसें संचालित हैं। निगम की 27 बसें नीलामी योग्य घोषित की जा चुकी हैं और उनकी सूची भी उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। इसके बाद भी इन बसों को आगरा, कानपुर, हरदोई और बदायूं जैसे लंबे और व्यस्त मार्गों पर चलाया जा रहा है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन खटारा बसों की खराब हालत का खामियाजा सीधे यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। आए दिन बसें रास्ते में खराब हो जाती हैं। कई मामलों में बैटरी फेल होने के कारण यात्रियों को बस धक्का लगाने तक की नौबत आ जाती है। आंकड़ों के अनुसार, हर माह औसतन 10 बसें मार्ग में खराब हो रही हैं, जिससे न केवल यात्रियों का समय खराब होता है, बल्कि स्टाफ को भी भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय स्तर पर इस गंभीर समस्या को लेकर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद खटारा बसों को हटाने के ठोस प्रयास नजर नहीं आ रहे हैं। इस संबंध में एआरएम राजेश कुमार का कहना है कि बसों की मरम्मत में कोई लापरवाही नहीं बरती जाती। कुछ बसें जल्द नीलामी के लिए प्रस्तावित हैं और अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पूरी तरह जांच और आवश्यक मरम्मत के बाद ही किसी बस को सड़क पर भेजा जाए।
हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि जब तक खटारा बसों को पूरी तरह बेड़े से बाहर नहीं किया जाता, तब तक यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलना मुश्किल नजर आता है। ऐसे में जरूरत है कि निगम स्तर पर त्वरित और ठोस निर्णय लेकर यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।






