हिंदुत्व, पंच परिवर्तन और सांस्कृतिक चेतना पर हुआ गंभीर विमर्श।
Share your love

संवाद 24 संवाददाता। श्यामनगर बस्ती स्थित सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के वंदना सभागार में शनिवार को आयोजित भव्य हिन्दू सम्मेलन में हिंदुत्व, सांस्कृतिक मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना पर व्यापक एवं विचारोत्तेजक विमर्श हुआ। सम्मेलन का उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक जागरूकता को सुदृढ़ करना तथा राष्ट्र निर्माण से जुड़े मूल विचारों को जनमानस तक पहुँचाना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का पारंपरिक स्वागत किया गया। सम्मेलन में विभिन्न वक्ताओं ने हिंदुत्व, सामाजिक समरसता और नागरिक कर्तव्यों पर अपने विचार साझा किए।
मुख्य वक्ता संजीव सोमवंशी ने अपने संबोधन में “पंच परिवर्तन” की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि सामाजिक समरसता, स्वदेशी की भावना, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य तथा पारिवारिक मूल्यों को आत्मसात किए बिना सशक्त एवं आत्मनिर्भर भारत का निर्माण संभव नहीं है। उन्होंने युवाओं से इन मूल्यों को अपने दैनिक जीवन में उतारने का आह्वान किया।
विशिष्ट वक्ता सुदेश दुबे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि संघ ने शिक्षा, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि संघ की विचारधारा आज भी समाज को संगठित कर सकारात्मक दिशा देने का कार्य कर रही है।
साध्वी सुलभा भारती ने अपने ओजस्वी वक्तव्य में हिन्दू धर्मग्रंथों के अध्ययन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि वेद, उपनिषद, श्रीमद्भगवद्गीता और पुराण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को नैतिकता, अनुशासन और कर्तव्यबोध का मार्ग दिखाने वाले शाश्वत ग्रंथ हैं।
कार्यक्रम में कवि कन्हैया लाल शर्मा की राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कविता ने वातावरण को भावनात्मक ऊँचाई प्रदान की। उनकी रचना ने श्रोताओं में संस्कृति, राष्ट्र और हिंदुत्व के प्रति गहरी संवेदनाएँ जागृत कीं।
सम्मेलन में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं समाजसेवियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य रामकृष्ण बाजपेई ने सभी अतिथियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समापन भारत माता की आरती तथा राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना के संकल्प के साथ किया गया।






