फर्रुखाबाद में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) महिलाओं की लोकतांत्रिक भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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संवाद 24 संवाददाता। ताजा आंकड़े बताते हैं कि जिले में 1.6 लाख से अधिक महिलाएं मतदाता सूची से बाहर हैं। यह स्थिति केवल प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक समस्या की ओर इशारा करती है, जहां आधी आबादी मताधिकार से वंचित होती नजर आ रही है।
एसआईआर के आंकड़ों के अनुसार, जिले में प्रति एक हजार पुरुष मतदाताओं पर केवल 799 महिला मतदाता दर्ज हैं। यह अनुपात जनगणना के आंकड़ों से भी काफी कम है। जहां प्रदेश का जेंडर रेशियो 908 और फर्रुखाबाद का 874 है, वहीं मतदाता सूची में महिला-पुरुष का अंतर और अधिक गहराता दिखाई देता है। आंकड़ों के अनुसार प्रति हजार पुरुषों पर 1207 महिलाएं मतदाता सूची से बाहर हैं।
वर्तमान में जनपद में लगभग 10.93 लाख महिलाएं हैं। सामान्य आयु संरचना के आधार पर इनमें से करीब 60 प्रतिशत यानी लगभग 6.56 लाख महिलाएं 18 वर्ष से अधिक आयु की होनी चाहिए। इसके विपरीत मतदाता सूची में केवल 4.91 लाख महिला मतदाता ही दर्ज हैं। यानी कम से कम 1.64 लाख महिलाएं मतदाता सूची से बाहर रह गई हैं।
अनुमानित 12.51 लाख पुरुष जनसंख्या के आधार पर पुरुष मतदाताओं की कमी लगभग 1.35 लाख है, जो महिलाओं की तुलना में कम है। इससे साफ है कि मताधिकार से वंचित होने की मार महिलाओं पर अधिक पड़ रही है।
एसआईआर के तहत वर्ष 2003 की मतदाता सूची या माता-पिता के जन्म और निवास से जुड़े दस्तावेज मांगे जा रहे हैं। जिन महिलाओं के मायके दूर हैं या जिनके माता-पिता का रिकॉर्ड स्थानांतरित, अनुपलब्ध या मृतक श्रेणी में आ चुका है, उनके लिए आवश्यक कागजात जुटा पाना बेहद कठिन हो गया है।
यहां कुल ईपी रेशियो 48.48 प्रतिशत है, जबकि महिला ईपी रेशियो घटकर 45.10 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पुरुष और महिला ईपी रेशियो के बीच 6.33 प्रतिशत का अंतर जिले में सर्वाधिक है। इसके बाद कायमगंज और भोजपुर का स्थान आता है, जबकि फर्रुखाबाद सदर में यह अंतर अपेक्षाकृत कम है।
यदि यह स्थिति बनी रही तो आगामी चुनावों में हजारों महिलाएं मतदान से बाहर रह सकती हैं। इसका कारण उनका कोई अपराध नहीं, बल्कि केवल यह होगा कि उनके मायके से जुड़े अभिलेख सरकारी फाइलों में उपलब्ध नहीं मिल पाए।
रजिस्ट्रीकरण अधिकारी एवं एसडीएम सदर रजनी कांत ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि महिलाओं की मैपिंग न हो पाने का मुख्य कारण मायके से जुड़े दस्तावेजों का न मिल पाना है। महिला मतदाताओं की सहायता के लिए बीएलओ और सुपरवाइजर तैनात किए गए हैं। साथ ही जिन राज्यों में एसआईआर चल रहा है, वहां की मतदाता सूची संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर और अन्य राज्यों की सूची भारत निर्वाचन आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
लोकतंत्र में समान भागीदारी की कसौटी पर यह आंकड़े एक गंभीर चेतावनी हैं। आवश्यकता है कि दस्तावेजी प्रक्रियाओं को महिला-अनुकूल बनाया जाए, ताकि पहचान के अभाव में कोई भी महिला अपने मौलिक मताधिकार से वंचित न रहे।






