
संवाद 24 संवाददाता। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए यूजीसी कानून के विरोध में परशुराम सेना के पदाधिकारियों और सदस्यों ने शनिवार को प्रदर्शन की तैयारी की थी। संगठन की ओर से जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम प्रस्तावित था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने संगठन से जुड़े पदाधिकारियों को उनके आवास से बाहर निकलने से रोक दिया।
परशुराम सेना के सदस्यों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें घरों में ही रोककर हाउस अरेस्ट जैसा व्यवहार किया। संगठन से जुड़े लोगों ने इस कार्रवाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा कीं, जो देखते ही देखते वायरल हो गईं। वायरल तस्वीरों को लेकर संगठन ने प्रशासन पर शांतिपूर्ण विरोध को दबाने का आरोप लगाया है।
राष्ट्रीय संगठन प्रभारी सुधीर द्विवेदी, जिलाध्यक्ष शिवम चतुर्वेदी और प्रदेश उपाध्यक्ष मोनू दुबे ने बताया कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से यूजीसी कानून के विरोध में ज्ञापन देने जा रहे थे। उनका कहना है कि पुलिसकर्मियों ने उनके आवास पर पहुंचकर बाहर जाने से मना कर दिया और ज्ञापन सौंपने की अनुमति नहीं दी।
वहीं पुलिस प्रशासन ने हाउस अरेस्ट के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पुलिस का कहना है कि किसी भी पदाधिकारी को नजरबंद नहीं किया गया, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से एहतियातन उन्हें रोका गया था। पुलिस के अनुसार, किसी प्रकार की जबरदस्ती या अवैधानिक कार्रवाई नहीं की गई है।
फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर प्रशासन और संगठन के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। यूजीसी कानून को लेकर विरोध की गतिविधियों पर प्रशासन की नजर बनी हुई है।






