सचिव के पहुंचते ही बदला मंडी का माहौल, आलू की बोली ने पकड़ी रफ्तार
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संवाद 24 संवाददाता। विवाद के बाद कृषि उत्पादन मंडी समिति कमालगंज में आलू की बिक्री एक बार फिर नीलामी प्रणाली से शुरू हो गई। फर्रुखाबाद से पहुंचे प्रभारी मंडी सचिव अनूप कुमार दीक्षित की मौजूदगी में खुले तौर पर बोली लगवाई गई, जिससे मंडी में व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आई और किसानों को प्रतिस्पर्धात्मक भाव मिला।
मंडी में आलू की बिक्री 211 रुपये प्रति पैकेट (50 किलोग्राम) से शुरू हुई, जो बढ़ते-बढ़ते 269 रुपये प्रति पैकेट यानी 538 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई। बोली प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से सचिव के सामने कराई गई, जिससे आढ़तियों और किसानों दोनों का भरोसा बहाल हुआ।
गौरतलब है कि 31 दिसंबर को कमालगंज आलू मंडी का शुभारंभ नागेंद्र सिंह राठौर ने किया था। उस समय सातनपुर मंडी की तर्ज पर नीलामी के जरिए बिक्री की व्यवस्था लागू की गई थी। प्रभारी मंडी सचिव अनूप कुमार दीक्षित के नियमित निरीक्षण के दौरान नीलामी से ही कारोबार होता रहा, लेकिन उनके न आने के बाद बोली प्रक्रिया ठप हो गई थी।
मंगलवार को बोली बंद रहने को लेकर मंडी में विवाद की स्थिति बन गई। आढ़ती संजय कमल ने फोन पर सचिव को अवगत कराया कि नीलामी न होने से मंडी की स्थिति प्रभावित हो रही है। सूचना मिलते ही सचिव कमालगंज मंडी पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया।
सबसे पहले मुख्तार की आढ़त पर उनके सामने बोली कराई गई, जहां श्यामबाबू ने बोली की आवाज लगाई। इसके बाद गौरव की आढ़त पर भी नीलामी हुई। अधिकतम भाव वाले आलू में 211 रुपये से शुरू बोली 58 रुपये बढ़कर 269 रुपये प्रति पैकेट तक पहुंची।
उच्च गुणवत्ता वाला यह आलू टढ़उआ गांव के किसान हेमराज का बताया गया। बड़े साइज के कारण तीन बीघा खेती से 146 पैकेट आलू का उत्पादन हुआ। वहीं किसान मोनू मिश्रा के आलू की बोली 211 रुपये से बढ़कर 261 रुपये प्रति पैकेट तक गई।
प्रभारी मंडी सचिव अनूप कुमार दीक्षित ने बताया कि कमालगंज मंडी को व्यवस्थित और सुचारु रूप से चलाया जाएगा। एसआईआर में ड्यूटी के चलते वे कुछ समय मंडी नहीं आ पाए थे, लेकिन अब नीलामी व्यवस्था को नियमित बनाए रखा जाएगा, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके और व्यापार पारदर्शी रहे।






